कंप्यूटर ट्रेड होने के बावजूद अंबाला की राजकीय कल्पना चावला महिला आईटीआई में बिना यूपीएस बैकअप के हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की परीक्षा करवाई गई। प्रदेशभर में इसी परीक्षा के आधार पर अगस्त-सितंबर 2019 में 192 नियुक्ति भी हो गई। लेकिन अंबाला में बनाए गए कल्पना चावला राजकीय पॉलिटेक्निक सेंटर में परीक्षा के दौरन जमकर अनियमतिताएं हुई। सेंटर में भर्ती परीक्षा तय समय के 2 घंटे बाद भी चलती रही बल्कि राज्यस्तरीय भर्ती परीक्षा होने के बावजूद इस सेंटर में कंप्यूटरों पर यूपीएस बैकअप की कोई सुविधा ही नहीं थी जोकि असंभव सी बात है। क्योंकि इस सेंटर में करीब 500 छात्राएं नियमित शिक्षा ग्रहण कर रही हैं और कंप्यूटर ट्रेड भी इस संस्थान में चल रही है। अलबत्ता बिना यूपीएस सिस्टम के कंप्यूटर ट्रेड नहीं चलाई जा सकती। ऐसे में वह कौन की विशेष परिस्थितियां थी जब इस परीक्षा के लिए जनरेटर चलाने पड़े और जनरेटर बंद करने से परीक्षा बाधित हुई? इसका जवाब न तो हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन और न ही तकनीकी निदेशालय और संस्थान के पास है।
जनरेटर बंद करने वाले के पास नहीं था चार्ज
4 बजकर 50 मिनट पर परीक्षा के दौरान जनरेटर बंद करने वाले वर्कशॉप अनुदेशक पिंटू नांगल के पास न तो जनरेटर चलाने का जिम्मा था न ही बिजली की व्यवस्था का। जबकि इसकी जिम्मेदारी अनुदेशक राव विरेंद्र की थी। चार्जशीट के अनुसार पिंटू ने 4 बजकर 50 मिनट पर जनरेटर बंद किया। इसी कारण उसे चार्जशीट किया गया। लेकिन पूरी चार्जशीट में इस बात को क्यों छिपाया गया कि लाइट और जनरेटर की जिम्मेदारी राव विरेंद्र की थी। ऐसे कौन से कारण रहे कि राव विरेंद्र ने आर्डर होने के बावजूद जनरेटर की जिम्मेदारी खुद नहीं ली? इतना ही नहीं उन्होंने खुद की मौजूदगी में कैसे जनरेटर बंद करने दिया? जबकि राव विरेंद्र को यह भी पता था कि कंप्यूटर पर बैकअप की सुविधा नहीं है? प्रिंसिपल ने ऐसे आदेश क्यों नहीं जारी किए कि सेंटर परीक्षा बंद होने के बाद बंद किया जाएगा। क्या परीक्षा गुपचुप तरीके से करवाई जा रही थी, इनके जवाब किसी के पास नहीं हैं?
क्या है पूरा मामला
दरअसल इस भर्ती परीक्षा को 7 फरवरी 2019 को 3 शिफ्ट में करवाया गया। तीसरी शिफ्ट 3 बजे खत्म होनी थी। यह भर्ती परीक्षा भी हो गई और इसी आधार पर भर्ती भी। लेकिन 7 फरवरी को कल्पना चावला पॉलिटेक्निक में एक कर्मचारी को चार्जशीट किया गया। क्योंकि उसने परीक्षा के दौरान जनरेटर बंद कर दिया। लेकिन जब इस चार्जशीट की पड़ताल की गई तो पता चला कि 4 बजकर 50 मिनट पर परीक्षा चल रही थी जब उसने जनरेटर बंद किया जबकि परीक्षा का समय ही 3 बजे समाप्त होने का था। ऐसे में वो कौन सी परिस्थितियां आन पड़ी की परीक्षा तय समय के दो घंटे बाद भी चलती रही।
इन सवालों के नहीं मिले जवाब
जब पहले ही पता चल गया था कि यूपीएस खराब हैं तो आयोग को क्यों सूचना नहीं दी गई?
जनरेटर और बिजली इंचार्ज राव विरेंद्र ने जनरेटर की चाबी पिंटू से क्यों नहीं ली?
ऐसे क्या कारण थे कि पिंटू ने 4 बजकर 50 मिनट पर जनरेटर बंद किए और अपने सहयोगी के साथ दुर्व्यवहार किया?
प्रिंसिपल के अनुसार उन्हें जब सूचना मिली तो वह जंडली पुल पर पहुंच चुकी थी और सूचना मिलने के बाद वापस आई इसका मतलब वह परीक्षा खत्म होने से पहले ही सेंटर छोड़ गई थी, क्यों?
12 हजार 900 रुपये एडवांस में डीजल के लिए दिए गए यूपीएस किराये पर क्यों नहीं लिए?
कर्मी को चार्जशीट होने के बावजूद किसी ने भी यह ध्यान क्यों नहीं दिया कि जब परीक्षा 3 बजे तक चलनी थी तो 4 बजकर 50 मिनट तक संस्थान में क्या चल रहा था?
ऐसे में साफ है कि इस भर्ती परीक्षा में कुछ न कुछ गड़बड़ हो रही थी तभी यह खेल-खेला गया।
मैं उस दिन आन ड्यूटी ही था। 4 बजकर 50 मिनट पर पिंटू नांगल आया और मुझसे लड़ने लगा। मेरे कहने के बावजूद उसने जनरेटर बंद कर दिया। इसकी सूचना मैंने प्रिंसिपल मैडम को भी दी। वह कॉलेज से जा चुकी थी जैसे ही उन्हें पता चला वह वापस आई। इसके बाद दोबारा परीक्षा शुरू करवाई गई। जहां तक बैकअप की बात है तो हमने सुबह भी यूपीएस चेक करवाए थे वह चल रहे थे लेकिन बाद में वह अचानक बंद हो गए किसी तकनीकी दिक्कत के चलते। इसीलिए हमने पिंटू को एडवांस 12 हजार 900 रुपये डीजल के सुबह ही दे दिए थे।
राव विरेंद्र, अनुदेशक, पॉलिटेक्निक कल्पना चावला।
वर्जन
मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं बता सकता, आपको जो भी पूछना हो उस बारे में सोमवार को ही जानकारी दी जा सकेगी।
केके कटारिया, निदेशक, तकनीकी शिक्षा विभाग चंडीगढ़।