काव्य कलश कार्यक्रम में मंच पर खड़े पदाधिकारी। संस्था
काव्य कलश की महफिल में कवियों ने बांधा समां
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। साज ओ सामान भी ये दिल नहीं बहलाएंगे, दोस्त अहबाब भी तो साथ नहीं जायेंगे... जैसी संजीदा पंक्तियों और व्यवस्था पर तीखे कटाक्ष के बीच रविवार की शाम अंबाला छावनी साहित्य के रंग में सराबोर नजर आई। सामाजिक संगठन गुदगुदी जंक्शन समूह के साहित्यिक मंच अक्षरम् की ओर से फारूखा खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में साहित्यिक सम्मेलन काव्य कलश का आयोजन किया गया। दिवंगत स. आज्ञापाल सिंह की स्मृति में सजी इस महफिल में जुटे 18 कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं।
डॉ. गुलशन राय शर्मा ने कहा, दोनों ही ओर से यकसां हों जो दिखने में, ऐसे सिक्के तो उछाले भी नहीं जा सकते। ओम बनमाली ने नेताओं पर तंज कसते हुए कहा, आज के नेता तो सुबह-शाम मुझसे ज्यादा तेजी से कर रहे हैं रंग बदलने का काम। डॉ. अनुपमा आर्य ने कहा, एक दिमाग वाला दिल रख मां, यह दिल वाला दिल सिर्फ तकलीफ देता है। जगमाल सिंह राणा, रविन्द्र शर्मा रवि और मनीषा नारायण की रचनाओं को भी खूब सराहना मिली। अंजलि सिफ़र ने मंच संचालन भी किया। मौके पर रोटेरियन डॉ. विनय मल्होत्रा, प्रिंसिपल केपी सिंह, समूह अध्यक्ष चंद्रमौलि गौड़, सांस्कृतिक अधिकारी इंद्र परुथी, सुरेंद्र धीमान, असीम अग्रवाल और संजय कपूर मौजूद रहे।