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ओलावृष्टि का असर : गेहूं की औसत पैदावार 16 क्विंटल कम

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क्रॉप कटिंग करते हुए अ​धिकारी। आर्काइव
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अंबाला सिटी। मार्च के महीने में मौसम बिगड़ने के कारण गेहूं की फसल की औसत पर असर दिखाई दिया है। बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष की औसत पैदावार में 1600 किलोग्राम का अंतर आ गया है।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 23-24 में औसत पैदावार 6707 किलो प्रति हेक्टेयर थी। इस वर्ष क्रॉप कटिंग के सभी नमूनों के नतीजे आ गए हैं। इसमें इस वर्ष की पैदावार घटकर 5164 किलो प्रति हेक्टेयर रह गई है। जबकि इस बार मंडियों में गेहूं की आवक बीते वर्ष के मुकाबले अधिक देखने को मिली है। ओलावृष्टि के कारण सबसे अधिक प्रभाव अंबाला दो के क्षेत्र में पड़ा है। यहां पर गेहूं की औसत सबसे कम रही है।
खंड स्तर पर गेहूं का ये रहा औसत आंकड़ा
अंबाला ब्लाॅक एक - 4898 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर
अंबाला ब्लाॅक दो - 4861 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर
बराड़ा ब्लाॅक - 5171 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर
साहा ब्लाॅक - 5475 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर
नारायणगढ़ ब्लाॅक - 5700 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर
शहजादपुर ब्लाॅक - 4901 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर
1960 से अधिक लिए थे नमूने
कृषि विभाग की टीम ने प्रत्येक ब्लॉक में जाकर सेकड़ों नमूने लिए थे। इसमें अंबाला वन में 498, अंबाला टू में 218, बराड़ा से 292, साहा से 260, नारायणगढ़ से 372 और शहजादपुर से 320 नमूने लिए थे। जिले में कुल 1960 नमूने लिए गए थे। इन्हीं के आधार पर औसत पैदावार की जांच होती है।
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वर्जन
फिलहाल सभी ब्लाॅक के आंकड़े तो आ गए हैं। मगर अभी आंकड़ों में कुछ फेरबदल किया जाएगा। उसके बाद थोड़ी औसत बढ़ने की उम्मीद है। इस वर्ष मौसम में बदलाव के कारण कुछ क्षेत्रों में औसत पर असर पड़ा है।
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मंजीत कौर, जिला सहायक सांख्यिकी अधिकारी, कृषि विभाग अंबाला।
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