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एनएसपी पोर्टल के फेर में फंसे 75 विद्यार्थी, नवीनीकरण नहीं होने से अटकी 45 लाख रुपये की छात्रवृत्ति

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- फोटो : Ambala
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गवर्नमेंट पीजी कॉलेज अंबाला छावनी के 75 विद्यार्थी एनएसपी पोर्टल के फेर फंस गए हैं। इनकी 45 लाख रुपये की छात्रवृत्ति अटक गई है। इस साल इन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नवीनीकरण के लिए आवेदन करना है लेकिन पोर्टल से कॉलेज का नाम ही गायब हो गया। जबकि आवेदन की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है। उधर अंबाला शहर के राजकीय महिला कॉलेज का नाम पोर्टल पर जुड़ गया। जब छात्र-अपनी छात्रवृत्ति के नवीनीकरण के लिए आवेदन करते हैं तो उन्हें गवर्नमेंट महिला कॉलेज अंबाला शहर का नाम ही शो हो रहा है। यही कारण है कि वह नवीनीकरण आवेदन ही नहीं कर पा रहे। उधर विद्यार्थी जब कॉलेज में बातचीत के लिए जाते हैं तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया जाता है कि तुमने गत वर्ष गलती से स्कॉलरशिप ले ली। यदि ज्यादा बोलोगे तो वह भी वापस लौटानी पड़ेगी।
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क्या है एनएसपी का प्रावधान
हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा पास करने वाले कुल 100 प्रतिशत में टाप करने वाले कुल 20 प्रतिशत छात्र मेरिट के अनुसार नेशनल स्कालरशिप पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। इन्हें इनकी मेरिट के चलते अंडर ग्रेजुएट के 3 वर्षों में 10-10 और इसके बाद एमए में दाखिला लेने पर 20-20 हजार दो वर्षों में मिलते हैं। इस पोर्टल पर दिव्यांग और अल्पसंख्यक छात्र भी आवेदन कर सकते हैं। इन्हें भी 5 साल में 70 हजार रुपये की छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। हर विद्यार्थी को कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पोर्टल पर नवीनीकरण फार्म भरना होता है। जोकि इस समय गवर्नमेंट पीजी कॉलेज अंबाला छावनी के छात्र नहीं भर पा रहे। यह विद्यार्थी एक वर्ष की छात्रवृत्ति ले चुके हैं इसीलिए प्रत्येक के 60 हजार रुपये फंस गए हैं।
कैसे हुआ खुलासा
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर जब छात्र आवेदन करने लगे तो छावनी गवर्नमेंट कॉलेज का नाम ही पोर्टल पर नहीं आया। पूछताछ में छात्रों को कहा गया कि आप गवर्नमेंट महिला कॉलेज शहर चले जाएं। विद्यार्थी भटकते हुए छावनी से शहर पहुंचे जहां उन्हें बताया गया कि आप तो हमारे छात्र ही नहीं है इसीलिए आपको तो हम वेरिफाई नहीं कर सकते। आप फार्म डिफीट कर लें।
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कहां से खड़ी हुई समस्या
दरअसल गवर्नमेंट पीजी कॉलेज छावनी में वर्ष 2018-19, 19-20 के लिए एनएसपी पोर्टल का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। इस साल अभी न तो उनका नाम हटाया गया था नहीं उनसे चार्ज लिया गया था। सितंबर माह में उनकी अंबाला शहर महिला कॉलेज में डेपुटेशन हो गई। अक्तूबर में बिना उनसे चार्ज लिए बिना कॉलेज की प्राध्यापक हरसिमरण कौर को नोडल अधिकारी नियुक्त कर ओटीपी के जरिए पोर्टल से रमेश अहलावत की जगह हरसिमरण कौर का मोबाइल नंबर डाल दिया गया।
हरसिमरण कौर के नंबर के बाद एक और ओटीपी जनरेट किया गया इसके जरिए हरसिमरण कौर के स्थान पर महिला कॉलेज अंबाला शहर के प्राध्यापक सुभाष का नंबर जोड़ दिया गया। क्योंकि सुभाष अंबाला शहर महिला कालेज के अध्यापक हैं तो पोर्टल पर महिला कॉलेज का नाम जुड़ गया और छावनी के पीजी कॉलेज का नाम लिस्ट से उड़ गया। बता दें कि नोडल अधिकारी ही अपने मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के आधार पर छात्रवृत्ति लेने वाले विद्यार्थियों को वेरिफाई करता है।
मैंने आज ही ज्वाइनिंग की है। एनएसपी के बारे में मुझे अभी जानकारी नहीं है। यदि नोडल अधिकारी बदला गया है तो वह पूर्व प्रिंसिपल के आदेशों के बाद ही बदला गया होगा। विद्यार्थियों को क्यों दिक्कतें आ रही हैं। इस बारे में आज ही पता करवाकर उनकी समस्या का निश्चित तौर पर समाधान करवाया जाएगा।
-बबीता वर्मा, नवनियुक्त प्रिंसिपल गवर्नमेंट पीजी कालेज।
कॉलेज ने आज तक मुझसे चार्ज टेकओवर नहीं किया। न ही ऑफिशियल इस बारे में मुझे कोई जानकारी है। मुझे जुलाई 2018 में एनएसपी का नोडल अधिकारी बनाया गया था। 3 सितंबर 2019 को नोडल रजिस्ट्रेशन फार्म भी मेरे ही नाम से भेजा गया है। एसएआईएसएचई कोड सी-10773 गवर्नमेंट कॉलेज अंबाला छावनी का है जो कई वर्षों से चल रहा है। अब कैसे किसी दूसरे को मुझसे चार्ज लिए बिना दे दिया गया है इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मैंने यह चार्ज 2018 में गुरदेव सिंह व मलकीत सिंह से प्रिंसिपल के ऑफिस आदेश पर लिया था।
-डॉ. रमेश अहलवात, नोडल अधिकारी एनएसपी गवर्नमेंट कॉलेज।
मुझे प्रिंसिपल मैडम के आदेश पर ही एनएसपी का नोडल अधिकारी बनाया गया है। गवर्नमेंट पीजी कालेज का कोड अलग है और हमारा पूरी तरह से अलग है। चूंकि वह विद्यार्थी गवर्नमेंट पीजी कॉलेज छावनी के हैं तो हम इसीलिए उन्हें वेरिफाई नहीं कर सकते। हां यदि वह फार्म डिफीट कर दें तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं आने देंगे।
-सुभाष, नोडल अधिकारी राजकीय महिला कालेज अंबाला शहर।
प्रिंसिपल के आदेश पर विभाग ने पोर्टल पर हरसिमरण कौर मैडम का नंबर डाला था। वहीं गवर्नमेंट पीजी कॉलेज की वर्ष 2020-21 की नोडल अधिकारी हैं। शहर के किसी भी कॉलेज के प्राध्यापक को हमने नोडल अधिकारी नहीं बनाया। फिर भी हमने दोनों कॉलेजों के प्रिंसिपल को पत्र लिखकर इस बारे में जवाब मांग लिया है। अगर कोई अपने स्तर पर आकर धमकी देगा तो उसके विरुद्ध कार्रवाई के लिए हम उपायुक्त एवं शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों कार्रवाई के लिए लिख देंगे। लेकिन हम किसी भी विद्यार्थी की छात्रवृत्ति नहीं अटकने देंगे।
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-विनोद कुमार, जिला समाज कल्याण विभाग अधिकारी।
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