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पहले होता था अरबों का व्यापार, अब खाली बैठे हैं दुकानदार

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तिलक राज बठला। - फोटो : Panipat
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पानीपत। शहर की कंबल मार्केट में हर साल अरबों रुपये का व्यापार होता था लेकिन अब इस मार्केट के व्यापारी पिछले एक साल से मंदी की मार झेल रहे हैं। इस व्यापार से करीब 1200 दुकानदार और व्यापारी जुड़े हैं, जो अब हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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त्योहारी सीजन भी शुरू हो चुका है लेकिन अब तक बाजार में ग्राहकों की चहलकदमी नहीं बढ़ी है। कंबल मार्केट के सभी दुकानदार ग्राहकों की बाट जोह रहे हैं। यहां के दुकानदारों का कहना है कि अगर दीवाली पर भी मार्केट में ग्राहक नहीं आए तो कुछ दुकानदारों को तो दीवाली पर दिवालिया तक निकल जाएगा। अब उन्हें सिर्फ दीवाली पर्व पर ही आस है कि ग्राहक आएंगे और काम चलेगा।
दुकानदारों ने कहा कि वे पहले से ही आर्थिक मंदी से जूझ रहे थे, ऊपर से प्रशासन ने जीटी रोड से बाजार की ओर जाने वाले रास्ते के कट पर बेरिकेड लगा दिया। इससे ग्राहकों को पचरंगा और चौड़ा बाजार की ओर आने जाने का रास्ता ही बंद हो गया। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि कम से कम इस बेरिकेड वाले पत्थरों को हटाकर बाजार का रास्ता खोला जाए।
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कच्चा माल घटा लेकिन तैयार ने तोड़ी कमर
यहां के व्यापारियों ने बताया कि कंबल के कच्चे माल के तो रेट कई बार टूटे हैं लेकिन तैयार माल के रेट कम नहीं हुए। इससे बाजार में रेट न बढ़े और न घटे। कुछ चुनिंदा बड़ी मिलों के मालिक इनके रेट घटाने को तैयार ही नहीं है। जिसका पूरा असर बाजार के दुकानदारों, व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ता है। बाजार में इस सीजन भी पिछले सीजन वाले रेट पर ही कंबल उपलब्ध हैं।
मंदी पर अब प्रशासन की मार
पहले से बाजार के व्यापारी और दुकानदार आर्थिक मंदी की मार झेल रहे थे। अब प्रशासन ने जीटी रोड से बाजार जाने वाले कट को ही बंद कर दिया। इससे ग्राहक दूसरी ओर शिफ्ट हो रहे हैं और बाजार के सभी दुकानदार खाली बैठे हैं। - सुरेश बवेजा, प्रधान चौड़ा बाजार।
एक साल से मंदा है बाजार
पिछले एक साल से बाजार में मंदा है। दुकानदार आर्थिक तौर पर काफी परेशान हैं। अगर अबकी बार भी मंदा रहा तो दुकानदारों के लिए बड़ी परेेशानी हो जाएगी। - जगदीश
दीवाली पर है उम्मीद
त्योहार का सीजन है। इसलिए सभी दुकानदारों को अब दीवाली पर उम्मीद है। बाजारों में हर प्रकार का कंबल है, दुकानें सजाई हैं, अब सिर्फ ग्राहक के आने की बारी है। - गोपाल दास
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दुकानदारों के लिए मुसीबत
शहर भर में पहले करोड़ों रुपये का व्यापार होता था। अब मंदी ने सभी को जकड़ लिया है। इसलिए व्यापार भी सिमटता जा रहा है। - दर्शन नागपाल
बीस प्रतिशत रहा काम
पहले के मुकाबले में अब काम महज बीस प्रतिशत ही रह गया है। पूरी मार्केट का यही हाल है। दीवाली पर सभी दुकानदार आस लगाए बैठे हैं। - तिलक राज बठला
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