सर, हम कोरोना से तो पता नहीं मरेंगे या नहीं, लेकिन हमारी डायलिसिस आज नहीं हुई तो हम जरूर मर जाएंगे। अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में डायलिसिस करवाने आए मरीजों ने कुछ इसी तरह विलाप करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की। मरीजों ने बताया कि 3 दिनों से डायलिसिस यूनिट बंद हैं और प्राइवेट अस्पताल उनकी डायलिसिस करने से इंकार कर रहे हैं। ऐसे में बिना डायलिसिस वह कैसे जीएं? इनमें से कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें सप्ताह में तीन बार डायलिसिस करवाना पड़ता है। यहीं कारण था कि बुधवार सुबह से ही तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में डायलिसिस करवाने वाले मरीजों का जमावड़ा लगा था।
अब यह की गई व्यवस्था : मरीजों की जान आफत में देख स्वास्थ्य विभाग ने लीलावती अस्पताल अंबाला शहर में डायलिसिस करवाने की सुविधा मरीजों की उपलब्ध करवा दी। वहीं जो मरीज आर्थिक रूप से कमजोर हैं उन्हें जगाधरी और कैथल नागरिक अस्पताल में भेजा जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस ऐसे मरीजों को अपने साथ निशुल्क वहां तक लेकर जाएगी और वापस लाएगी।
पहले किया इंतजार फिर जताया रोष : डायलिसिस यूनिट में कई घंटे मरीजों ने सुबह के समय पहले तो इंतजार किया कि शायद उन्हें उपचार मिल जाए। लेकिन जब किसी ने एक न सुनी तो उन्होंने रोष भी जताया। मरीजों का कहना था कि डायलिसिस विंग को बंद करने से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी ताकि मरीजों को समय पर उपचार तो मिल सके।
पेट में दर्द तो किसी को फूलने लगी सांस : बुधवार को अस्पताल में आए मरीजों की तबीयत इस कद्र बिगड़ गई थी कि कई मरीज तो सांस फूलने के कारण फर्श ही बैठे हुए थे तो कई कुर्सियों पर लेटे हुए थे। सुबह से केवल इस इंतजार में थे कि शायद डायलिसिस विंग चालू हो जाए। कई-कई घंटों बाद भी उपचार नहीं मिला तो वह वापस लौट गए तो कुछ वहीं बैठे रहे।
स्टाफ की स्क्रीनिंग के चलते डायलिसिस विंग बंद : छावनी के डायलिसिस विंग से तबीयत बिगड़ने पर जिन मरीजों को रेफर किया गया था, वो कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। जिसके चलते पूरे स्टाफ सहित डायलिसिस विंग के मरीजों के टेस्ट किए गए। ऐसे में विभाग ने विंग को बंद करने का फैसला लिया। दो दिन से यह विंग बंद है। जबकि 90 मरीज यहां से डायलिसिस करवाते हैं। रोजाना 30 से 35 मरीजों की उपचार मिलता है।