राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रिधिमा अपने पिता नरेश मेहता, माता और बहन के साथ। स्वंय
नारायणगढ़ (अंबाला)। एक समय था जब नारायणगढ़ के छोटे से गांव लखनौरा के रहने वाले नरेश मेहता ने स्कूल और ब्लॉक स्तर पर आयोजित दौड़ में भाग लेकर नाम कमाया था। इस दौरान पदक भी अपने नाम किए मगर जागरूकता के अभाव में वह खेल के क्षेत्र में कॅरिअर नहीं बना सके।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बेटी को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाया। पिता नरेश ने चार साल तक गांव में ही बेटी रिधिमा को 400 मीटर दौड़ की तैयारी करवाई। उनकी मेहनत रंग लाई और अब बेटी स्कूल, ब्लाॅक और जिलास्तर पर पदक ले चुकी है। अब रिधिमा दौड़ में नए नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।
ग्यारहवीं में पढ़ती हैं रिधिमा
पिता नरेश मेहता ने बताया कि वह दवा व्यापारी हैं और खेती भी करते हैं। शुरुआत में उनकी खेल में काफी रुचि थी। कुछ प्रतियोगिताएं जीते भी मगर खेल में आगे बढ़ने को उनके पास जानकारी का अभाव था। इसके बाद उन्होंने बेटी रिधिमा खेल से जुड़ी प्रतिभा देखी और उसे तराशना शुरू कर दिया। रिधिमा नारायणगढ़ के डीएवी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में 11वीं कक्षा की छात्रा है। पिता ने बताया कि जब बेटी चौथी कक्षा में पढ़ती थी तब ही उन्होंने सोनीपत के राई स्थित मोतीलाल नेहरा स्कूल में उसे दौड़ में ट्रायल दिलवा दिया था। रिधिमा ने ट्रायल तो पास कर लिया लेकिन लिखित परीक्षा में रह गई। इसके बाद उन्होंने खुद ही चार साल तक गांव में अपनी बेटी रिधिमा को दौड़ का अभ्यास कराया। इसके साथ ही उन्होंने बेटी को पंचकूला के ताऊ देवी लाल खेल स्टेडियम में तैयारी कराई। इसका नतीजा यह रहा कि रिधिमा ने स्कूल, ब्लॉक और जिलास्तर पर पदक जीतकर नाम रोशन किया।
तीन साल से पुणे में कर रही तैयारी
पिता ने बताया कि रिधिमा तीन साल से महाराष्ट्र के पुणे में दौड़ का अभ्यास कर रही है। उसने 400, 600, 800 और 1000 मीटर में लगभग 15 से ज्यादा पदक अपने नाम किए हैं। इसके साथ ही करनाल के करण स्टेडियम में आयोजित 13 वीं यूथ स्टेट चैंपियनशिप में एक किलोमीटर की दौड़ दो मिनट 58 सेकेंड में पूरी कर ली थी। जिसकी काफी सराहना भी हुई थी। वहीं सीबीएसई कलस्टर चीका, नॉर्थ जोन जूनियर एथलेटिक्स, करनाल जूनियर नेशनल गोहाटी और सीबीएसई नेशनल में भी पदक प्राप्त किए हैं। आने वाले समय में रिधिमा बिहार के पटना में राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चैंपियनशिप में भाग लेगी।