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Ambala News: बढ़ रही नशे की होड़, 600 से अधिक ले रहे छोड़ने की दवा

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अंबाला सिटी। जिला अंबाला में नशा करने की होड़ युवाओं में बढ़ती जा रही है। ऐसे में नशा मुक्ति अभियान बस जागरूकता तक ही सिमट गया है। युवाओं के साथ-साथ बच्चों में भी नशे की लत देखने को मिल रही है।
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इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में टीके का नशा छोड़ने के लिए 600 से अधिक मरीज ओएसटी सेंटर में पंजीकृत हैं। इनमें से भी सिर्फ 120 मरीज ही रोजाना दवा लेने के लिए आ रहे हैं। यहां पर मरीजों को कर्मचारियों की ओर से खुद दवा दी जाती है।
आकड़ों के अनुसार प्रत्येक वर्ष 40 से 50 मरीज बढ़ जाते हैं।अभी तक टीके का नशा करने वाले 72 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में नशे के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम विफल होती दिखाई दे रही है। विपक्ष भी इसे लेकर सरकार पर तंज कस रहा है। वहीं राजनैतिक दलों के घोषणा पत्रों में भी नशे पर लगाम लगाने का संकल्प भरा जा रहा है।
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नहीं बना सरकारी नशा मुक्ति केंद्र
नागरिक अस्पताल में सरकारी नशा मुक्ति केंद्र न होने के कारण मरीजों को सामान्य वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है। इधर निजी केंद्रों में लगातार अनियमितताएं देखने को मिल रही है। जिले में 15 निजी केंद्र है जिनमें से सभी को जिला कमेटी द्वारा नोटिस दिए जा चुके हैं। हाल ही में एक केंद्र को बंद भी करवाया गया है। ऐसे में नशे की चपेट में आए लोगों के लिए उपचार का कोई बेहतर विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि विभाग के अधिकारी सरकारी केंद्र को फिर से टीबी सेंटर में स्थापित करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। रोजाना एनसीडी के मानसिक रोग विभाग में 100 से अधिक मरीज अपना उपचार करवाने के लिए आते हैं। इनमें से 50 मरीज सिर्फ नशा करने वाले होते हैं। इसके साथ ही 10 से 15 बच्चे भी उपचार के लिए आ रहे हैं।
विभाग को नहीं मिला ओएसटी चिकित्सक
ओएसटी सेंटर में मरीजों की जांच के लिए भी अभी तक विभाग को चिकित्सक नहीं मिला है। टीबी चिकित्सक ही मरीजों को दवा लिखने का काम कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों को पहले टीबी सेंटर और फिर ओएसटी सेंटर में आना पड़ रहा है। डीटीओ अधिकारी डॉ सीमा ने बताया कि आचार संहिता से पहले उन्हें चिकित्सक की मंजूरी मिल गई थी लेकिन आचार संहिता के कारण नियुक्ति नहीं हो सकती है। चुनावों के बाद चिकित्सक अपनी सेवाएं फिर से देना शुरू कर देंगे।
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