अंबाला। रेल लाइन की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों की कार्यशैली और मौके का निरीक्षण करने के लिए अंबाला के रेल मंडल प्रबंधक प्रोफेसर बन गए। प्रोफेसर की वेशभूषा में रात 12 बजे वो सहारनपुर के पास यार्ड में पहुंचे। वहां ब्लॉक लेकर चल रहे कार्य के दौरान कहानी लिखने के नाम पर सवाल-जवाब किए। सभी कर्मचारी सही तरीके से कार्य करते नजर आए।
हैरानी की बात यह रही कि रात दो बजे तक डीआरएम कर्मचारियों के बीच घूम-घूमकर रेल लाइनों सहित सुरक्षा के लिए किए जाने वाले प्रबंधों के बारे में जानकारी हासिल करते रहे, लेकिन किसी भी कर्मचारी को इसकी भनक नहीं लगी कि जिस व्यक्ति से वो बात कर रहे हैं। वो उनके उच्चाधिकारी हैं। इस दौरान उन्होंने चाय भी पी ताकि किसी कोई शक न हो।
एक ही था राजदार
डीआरएम अंबाला के औचक निरीक्षण को लेकर मंडल के किसी भी अधिकारी को कोई जानकारी नहीं थी। वो तामझाम के बिना ही रेलवे यार्ड में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने एक सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारी को अपने साथ लिया। उसे भी हिदायत दी कि वो उनके बारे में किसी को भी नहीं बताएगा, सिर्फ लेखक के तौर पर मिलवाएगा और कहेगा की रेल लाइनों की सुरक्षा को लेकर वो एक कहानी लिख रहे हैं। वहीं सुपरवाइजर ने भी अपना मुंह नहीं खोला और चुपचाप पूरी कार्रवाई को देखता रहा।
मंडल में हलचल
छह माह पहले अंबाला मंडल रेल प्रबंधक के तौर पर आईआरटीएस अधिकारी विनोद भाटिया ने पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद से ही वो अपने अधीनस्थ रेल खंडों, स्टेशनों व रेलवे यार्ड का निरीक्षण कर रहे हैं। छह माह में उन्होंने लगभग 100 से अधिक निरीक्षण करके विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली को भी परख लिया है। इसलिए उन्होंने इस बार बिना किसी आधिकारिक निरीक्षण के अकेले ही वास्तविकता जांचने की योजना बनाई ताकि धरातल पर हो रहे कार्याें की सही जानकारी उनके सामने आ सके।
कर्मचारियों की कार्यशैली पर नजर रखने के लिए औचक निरीक्षण किया था। काफी हद तक सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गई। एक दो कर्मचारी लापरवाह नजर आए थे। उनके विभागीय अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विनोद भाटिया, डीआरएम अंबाला।