लॉकडाउन में जिले में 1082 से ज्यादा वाहन चालकों के लाइसेंस अटक गए हैं। हालात यह हैं कि जिन आवेदकों ने लॉकडाउन से पहले भी आवेदन किया था उनके भी अभी तक लाइसेंस बनकर नहीं आए हैं। अलबत्ता अब लाइसेंस की आस में दूर-दराज से युवा तपती दोपहर में धक्के खाते ई-दिशा केंद्र पहुंचते हैं लेकिन वहां से किसी को सटिक जवाब नहीं मिलता। मसलन खाली हाथ निराशा लिए वापस लौट जाते हैं। एक-दो दिन से नहीं बल्कि पिछले पूरे दो सप्ताह से यह खेल खेला जा रहा है और आवेदकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही।
लाइसेंस अप्लाई करने के तीन माह बाद भी वाहन चालकों को लाइसेंस नहीं मिल रहा है। इस कारण आवेदकों पर तिगुना बोझ पड़ रहा है। एक तो उन्हें भरी दोपहर में धक्के खाकर ई-दिशा केंद्र पहुंचना पड़ रहा है। लॉकडाउन के बीच पुलिस का भी चेकिंग अभियान जोरों पर हैं और वह धड़ाधड़ वाहन चालकों के चालान काटने में जुटी है। लाइसेंस न होने पर वाहन चालकों के भारी भरकम चालान काट रहे हैं। तीसरा लाइसेंस की तमाम प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद लाइसेंस नहीं मिल रहा। इस तरह सरकारी विभागों की लापरवाही का खामियाजा एक हजार से ज्यादा उपभोक्ता भुगत रहे हैं।