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Ambala News: शहीदी पर्व पर गुरुद्वारों में सजे दीवान

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अंबाला। जपियो जिन अर्जुन देव गुरु फिर संकट जोन गर्भ न आयो शब्द सुनकर संगत निहाल हो गई और पूरा वातावरण बोले सो निहाल सत श्रीअकाल के जयकारों से गूंज उठा। मौका था सिखों के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के शहीदी पर्व का।
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जब संगत ने गुरु चरणों में शीश नवाकर गुरु महाराज की शहादत को नमन किया। इस मौके पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ उपप्रधान सुदर्शन सिंह सहगल ने गुरु महाराज की जीवनी पर आधारिक विचार व्यक्त किए कि किस प्रकार उन्हें धर्म की रक्षा के लिए मुगलों द्वारा सजा दी गई जोकि आम इंसान के लिए सोचने मात्र से ही सिहरन हो जाती है, लेकिन गुरु जी ने उफ तक नहीं की और नाम जपते हुए शहादत को गले लगाया। ऐसे गुरु को ही शहीदों का सरताज कहा जाता है।
इस मौके पर आठ जून को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा गोबिंद नगर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के अखंड पाठ आरंभ किए जोकि 10 जून शहीदी पर्व पर सुबह सात बजे संपन्न किए गए। तत्पश्चात महिला मंडली द्वारा श्री सुखमणि साहिब के पाठ संपन्न किए गए। गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब से आए कीर्तनी जत्थे भाई कमलजीत सिंह ने इलाहीबाणी के जाप द्वारा संगत को नाम सिमरण करवाया। दोपहर लगभग 12 बजे समागम संपन्न हुए और फिर गुरु चरणों में अरदास उपरांत संगत में अटूट लंगर का वितरण किया गया।
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40 दिन की लड़ी संपन्न
पिछले 40 दिनों से गुरुद्वारा साहिब में चल रही श्री सुखमणि साहिब के पाठों की लड़ी सोमवार को संपन्न हो गई। महिला मंडली द्वारा किए गए इस कार्य की गुरुद्वारा प्रबंधकों द्वारा प्रशंसा की गई। उन्होंने बताया कि 40 दिनों के दौरान महिला मंडली ने आमजन को गुरु की बाणी से जोड़ा और गुरु घर को सवा लाख रुपये के करीब चंदा सौंपा जोकि संगत से एकत्रित किया गया था।
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