नारायणगढ़। श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर नारायणगढ़ के गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। 5वें श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के उपरांत कीर्तन दरबार सजाए गए। इसमें हजूरी रागी मलकीत सिंह, रणजीत सिंह और फरिंद्र पाल सिंह ने कथा कीर्तन और गुरु इतिहास सुनाकर निहाल किया।
गुरुद्वारा साहिब के सचिव फरिंद्र पाल गुलियानी ने पंचम पातशाह की शहादत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु साहिब का जन्म 1563 को गोइंदवाल की धरती पर माता भानी जी की कोख से पिता रामदास जी के घर हुआ। इनके अलावा गुरु साहिब के दो भाई भी थे। गुरु साहिब ने सिखी, धर्म और गुरुबाणी का प्रचार किया।
गुरु राम दास जी के जोती जोत समाने के बाद गुरु अर्जुन देव जी को गद्दी पर बिठाया गया जिन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन किया और भाई गुरदास जी से गुरुग्रंथ साहिब लिखवाया और श्री हरिमंदिर साहिब में पहला प्रकाश करके बाबा बुड्ढा साहिब को पहला हेड ग्रंथी सजाया।
लाहौर में जहांगीर ने गुरु साहिब को बुलवाया और दीवान चंदू ने कई तरह के तासिहे देते हुए गुरु साहिब को गर्म तवी पर बिठाकर उनके सिर पर तपती हुई रेत डालकर शहीद किया। उन्होंने बताया कि शहीदी की शुरुआत गुरु अर्जन देव जी से हुई और सिख धर्म के गुरु साहिब पहले शहीद बने। उन्होंने हर समय वाहेगुरु के नाम का सिमरन करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।