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Ambala News: 18,710 एकड़ भूमि पर सीधी बिजाई का पंजीकरण, सत्यापन में निकली 7,765 एकड़

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डीएसआर योजना में हुआ खुलासा, जिले के 4,382 में से 1,756 किसान ही पाए गए
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वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। राज्य सरकार की ओर से भूजल बचाने के उद्देश्य से शुरू की गई धान की सीधी बिजाई योजना (डीएसआर) में बड़ा खुलासा हुआ है। भौतिक सत्यापन में सामने आया है कि योजना के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले जिले के 60 प्रतिशत किसानों ने सीधी धान की बिजाई की ही नहीं।
इन किसानों ने पारंपरिक रोपाई को ही तवज्जो दी। जिले में 4,382 किसानों ने 18,710.41 एकड़ भूमि के लिए उत्साह दिखाकर पंजीकरण तो कराया था लेकिन जब भौतिक सत्यापन हुआ तो केवल 1,756 किसानों ने ही 7,765.87 एकड़ में सीधी बिजाई की गई थी।
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30 से 40 प्रतिशत होती है बचत
पिछले साल जहां अकेले अंबाला में करीब 9.5 एकड़ में सीधी बिजाई हुई थी, वहीं इस बार इसके लक्ष्य को बढ़ाकर 25 हजार एकड़ तक किया गया था। धान की सीधी बिजाई में मजदूरी की बचत होती है। साथ ही साथ 30 से 40 प्रतिशत पानी की भी बचत होती है। इस तकनीक पर धान उगाने पर सरकार भी प्रति एकड़ 4500 रुपये अनुदान किसान को देती है।

जमीनी हकीकत निराशाजनक
प्रदेशभर की स्थिति पर नजर डालें तो खरीफ 2026 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 1,42,786 पंजीकृत किसानों के 6,95,388.42 एकड़ क्षेत्र में से अब तक सत्यापन के दौरान केवल 3,01,265.25 एकड़ में ही सीधी बिजाई पाई गई है। जिला यमुनानगर में 6,417 किसानों के पंजीकरण के मुकाबले केवल 1,733 किसान (10,469.39 एकड़) ही डीएसआर अपनाते मिले।

अंबाला के अलावा अन्य जिलों में भी यही हालात
केस-1-
जिले में 9,500 एकड़ से ज्यादा में की पारंपरिक रोपाई
अंबाला के किसानों ने करीब 9,552 एकड़ भूमि पर पंजीकरण कराने के बाद भी सीधी बिजाई नहीं की। जिले में योजना के तहत 4,382 किसानों ने पंजीकरण कराया था लेकिन भौतिक सत्यापन में केवल 1,756 किसान ही सीधी बिजाई करते मिले जबकि 9,552.65 एकड़ जमीन पर किसानों ने पंजीकृत कराने के बावजूद पारंपरिक रोपाई ही की। जिसमें पानी अधिक खर्च होता है।

केस-2-
यमुनानगर में 6,417 किसानों ने डीएसआर के लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से मात्र 1,733 किसानों ने ही इसे अपनाया और 10,469.39 एकड़ क्षेत्र में किसानों ने सीधी बिजाई से दूरी बना ली।

केस-3-
जींद जिले में 13,801 पंजीकृत किसानों में से 6,185 किसानों ने डीएसआर विधि को अपनाया जबकि रिकॉर्ड 38,479.47 एकड़ भूमि पर किसानों ने पंजीकरण के बाद भी पारंपरिक तरीके से धान लगाया।
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केस-4-
सोनीपत में 14,570 किसानों ने योजना में रुचि दिखाते हुए पंजीकरण कराया था लेकिन सत्यापन के दौरान 8,104 किसान ही सीधी बिजाई करते पाए गए और 20,920.34 एकड़ रकबे में किसानों ने कद्दू (रोपाई) पद्धति को ही चुना।

केस-5
रोहतक में 10,971 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया था जिनमें से 6,734 किसानों ने डीएसआर अपनाई जबकि 16,452.09 एकड़ क्षेत्र में किसानों ने योजना से पीछे हटते हुए पारंपरिक रोपाई की।

केस-6-
दक्षिण हरियाणा में योजना पूरी तरह पस्त
मेवात में महज 22 किसानों (370.94 एकड़) और पंचकूला में मात्र 92 किसानों (259.74 एकड़) ने ही सीधी बिजाई की, जिससे स्पष्ट है कि योजना प्रदेश के कई हिस्सों में पूरी तरह उपेक्षित है।
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सुस्त सत्यापन प्रक्रिया-
विभाग के पास अब भी पूरे प्रदेश में 1,46,983.56 एकड़ रकबे का भौतिक सत्यापन अटका पड़ा है। सत्यापन में हो रही इस देरी के कारण किसानों में मिलने वाले प्रोत्साहन और अनुदान को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। सीधी बिजाई में खरपतवार और पैदावार में कमी की आशंकाओं के कारण किसान अब भी इस योजना पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
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इस योजना में कई किसानों ने फर्जी एंट्री कर दी थी। सत्यापन के दौरान यह तथ्य सामने आए। उनके आवेदनाें को अमान्य कर दिया गया है। विशेष सत्यापन के बाद अंबाला में 1700 एकड़ और रकबा जोड़ लिया गया है। फार्म भरते समय सीएससी पर कई बार किसान योजना पर क्लिक कर देते हैं, इस कारण से भी यह संख्या बढ़ गई होगी।
- जसविंदर सैनी, जिला उप कृषि निदेशक
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