इस साल डीएसआर और मेरा पानी मेरी विरासत योजना से बहुत से किसान जुड़े हैं। कार्य क्षेत्र में 72 गांव आते हैं और करीब 14 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। कृषि विकास अधिकारी सुखबीर नरवाल ने बताया कि इस साल 370 एकड़ में डीएसआर विधि से धान बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जबकि 700 एकड़ भूमि में डीएसआर विधि से किसानों द्वारा धान बिजाई की गई है। यदि खेत में पानी नहीं भी हो तो भी डीएसआर विधि से धान की बिजाई की जा सकती है। इसके बाद बिजाई के 24 घंटे के अंदर पानी देना होता है। करीब 15-20 दिन तक पानी की जरूरत नहीं होती है। जबकि रोपनी पद्धति में रोपाई के समय भी खेत में पानी चाहिए और इसके बाद भी लगातार पानी की जरूरत होती है। वहीं मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत 65 एकड़ भूमि में मक्की, 10 एकड़ में दालें, 2 एकड़ में तिल व इसके अलावा कुछ किसान तो 10 एकड़ खाली छोड़ रहे हैं। मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ व डीएसआर विधि से धान बुआई पर 5 हजार रुपये एकड़ किसानों को अनुदान दिया जाएगा। यह योजना ढाई एकड़ तक ही लागू रहेगी।
डीएसआर तकनीक से धान रोपाई की विधि
डीएसआर विधि में खेत तैयार करते समय खेत का समतलीकरण अच्छी तरह करें, क्योंकि ऊंचा-नीचा खेत होने पर धान के बीज का जमाव एक समान नहीं हो पाता। खेत से जल निकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर लें क्योंकि अधिक वर्षा होने पर पौधों के मरने की संभावना हो जाती है। खेत में प्रति एकड़ डीएपी 50 किलोग्राम, यूरिया 110 किलोग्राम, पोटाश 40 किलोग्राम व जिंक सल्फेट यदि 21 प्रतिशत है तो 10 किलोग्राम और यदि 33 प्रतिशत है तो करीब 6 किलोग्राम डालना चाहिए। खेतों में सीधी बिजाई करने के बाद 24 घंटे के अंदर शाम को 1300 से 1500 मिली पेंडीमेथालिन नाम की खरपतवार नाशक दवाई का छिड़काव करना चाहिए। इसके करीब 20 दिन बाद नोमिनी गोल्ड दवाई का छिड़काव करना चाहिए। इससे किसानों को खरपतवार से छुटकारा मिलेगा।