अंबाला। ट्रैफिक नियमों की अवहेलना करने पर कटने वाले चालान का डिजिटल भुगतान कराना मुलाजिमों के मुश्किल बन गया है। पोस मशीनें (प्वाइंट ऑफ सेल) तो जिलाभर में मुलाजिमों को थमा दी हैं लेकिन प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) नहीं दिया गया।
अभी तक उन्हें सही ढंग और बिना किसी परेशानी के भुगतान कराने के लिए ट्रेनिंग ही नहीं दी गई, जो प्राथमिक जानकारी दी गई है, उसी से काम चलाया जा रहा है। ऐसे में कई बार पोस मशीन में डिजिटल भुगतान से पहले अंगूठा न लगने की शिकायत आ जाती है। कई-कई बार सर्वर की दिक्कत आ जाती है। यही कारण है कि इन मशीनों का इस्तेमाल बेहद कम किया जा रहा है। ट्रैफिक नाकों पर मुलाजिम नकद भुगतान पर ही जोर दे रहे हैं। साथ ही लोग भी इससे बच रहे हैं। जिलाभर में इस तरह की 30 मशीनें वितरित की थी।
लोगों में भी जागरूकता की कमी : ट्रैफिक पुलिस की तरफ से जिलाभर में जगह-जगह नाकाबंदी कर वाहन चालकों के चालान काटे जा रहे हैं लेकिन डिजिटल भुगतान के लिए कोई प्रचार प्रसार ही नहीं किया जा रहा।
न ही किसी नाके पर डिजिटल भुगतान की सुविधा का कोई बोर्ड लगा होता है। यही कारण है कि जो इससे भुगतान में कमी देखने को मिल रही है।
अभी इस तरह से हो रहा भुगतान : ट्रैफिक पुलिस की तरफ से नाकाबंदी कर वाहनों के चालान किए जाते हैं। उनका अपनी मशीन के जरिये एक प्रिंट वाली पर्ची निकाली जाती है।
दो पर्ची निकलने के बाद एक पर संबंधित व्यक्ति के हस्ताक्षर करवाए जाते हैं। मौके पर ही नकद भुगतान के बाद संबंधित ट्रैफिक अधिकारी बाद में चालान ब्रांच में सभी का भुगतान करता है।