संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र/करनाल/निगधू। नीलोखड़ी के गुरू ब्रह्मानंद पाॅलिटेक्निक काॅलेज में सिविल इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे निगदू थाना के पतनपुरी गांव निवासी छात्र तनुज पाल (20) ने जहरीला पदार्थ निगलकर जान दे दी। छात्र पिछले पांच साल से शुगर की बीमारी के कारण परेशान था। कई जगह इलाज भी करवाया लेकिन दिन प्रतिदिन शारीरिक कमजोरी आती गई। इससे छात्र परेशान हो गया। शनिवार दोपहर को उसने जहरीला पदार्थ निगल लिया और अपनी माता को बता दिया। इसके बाद कुरूक्षेत्र अस्पताल ले जाया गया। वहां इलाज के दाैरान शनिवार रात को दम तोड़ दिया। निगदू थाना पुलिस ने मामले की
जांच शुरू कर दी है।
निगदू थाना के पुलिस जांच अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि पतनपुरी निवासी तनुज पाल नीलोखेड़ी पॉलिटेक्निक में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे तनुज पाल अपने घर पर मौजूद था। वह घर से बाहर आया और पशुओं के तबेले में चला गया। वहां से दो घंटे बाद लाैटा और पानी पिया। इसके कुछ देर बाद उसे उल्टियां लगनी शुरू हो गई। उसने अपनी माता को जहरीला पदार्थ निगलने की जानकारी दे दी थी। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे निगदू के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन उसे कुरुक्षेत्र के निजी अस्पताल लेकर गए। वहां भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और इलाज के दौरान शनिवार देर रात को तनुज पाल ने दम तोड़ दिया। मौत की सूचना के बाद निगदू थाना पुलिस माैके पर पहुंची।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को साैंप दिया। परिजनों ने कोई भी पुलिस कार्रवाई करने से इंकार कर दिया।
पांच साल से शुगर से पीड़ित था तनुज पाल, परेशानी में रहता था। पिता नितिन पाल ने बताया कि तनुज पाल को करीब पांच साल से शुगर की बीमारी से पीड़ित था। उसकी शुगर काफी ज्यादा बढ़ गई थी। उसका अलग-अलग अस्पताल में इलाज भी करवाया गया। तनुज को बार-बार इंसुलिन के इंजेक्शन लग रहे थे। शुगर बढ़ने के कारण वह काफी कमजोर हो गया था। इसी कारण मानसिक तनाव में रहता था। परिवार ने उसे बहुत समझाया था। इसके बावजूद भी वह तनाव में रहता था। इसी के चलते उसने जहरीला पदार्थ
निगलकर अपनी जान दे दी है।
पिता एंबुलेंस चालक, माता आंगनवाड़ी वर्कर, परिवार में पसरा मातम
तनुज पाल के पिता नितिन नीलोखेड़ी अस्पताल में बतौर एम्बुलेंस चालक कार्यरत हैं। वहीं माता आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। वह सिविल इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष का छात्र था। बेटे का सपना इंजीनियर बनने का था। लेकिन बढ़ती शुगर की बीमारी से जिंदगी की जंग हार गया। वहीं अब परिवार में उसका एक भाई और बहन हैं। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।