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कपाट न खुलने से 71 साल में दूसरी बार भक्त नहीं कर पाएंगे नागा बाबा समाधि के दर्शन

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नागा बाबा दरगाह मेले को लेकर गुरुद्वारा साहिब में शुरू तैयारियां - फोटो : Ambala
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नागा बाबा की समाधि के दर्शनों का इंतजार कर रहे प्रदेशभर के अलावा अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार दर्शन नहीं होंगे। 71 साल में यह दूसरा मौका होगा जब हजारों भक्त एयरफोर्स बेस के अंदर बनी नागा बाबा दरगाह के दर्शन नहीं कर सकेंगे। प्रशासन ने कोरोना और किसान आंदोलन को देखते हुए दर्शनों की अनुमति देने से इंकार कर दिया है।
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मतलब एकदम साफ इस बार नागा बाबा की समाधि के दर्शनों के लिए कपाट नहीं खुलेंगे। धूलकोट स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा प्रधान ने यह जानकारी दी है। अलबत्ता अब एयरफोर्स स्टेशन स्थित नागा पीर बाबा की दरगाह पर 14 फरवरी रविवार को आस्था का सैलाब नजर नहीं आएगा। साल में एक बार लगने वाले धार्मिक मेले को लेकर न तो प्रशासन की तरफ से कोई तैयारी की गई है और न ही एयरफोर्स की तरफ से। बता दें कि नागा बाबा की दरगाह पर हरियाणा ही नहीं बल्कि पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और यूपी आदि से लाखों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। -संवाद
2016 में भी नहीं हुए थे दर्शन
वर्ष 2016 में भी भक्तों को नागा बाबा के दर्शन नहीं हुए थे। पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एयरफोर्स ने परमीशन देने से इंकार कर दिया था। लगभग पांच साल बाद अब यह दूसरा मौका है कि नागा बाबा दरगाह बंद रहेगी।
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मान्यता-सूखे कुएं में भरा था पानी
धूलकोट के रहने वाले तरुण कुमार ने बताया कि उनके बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में गांव में एक फकीर बाबा आए थे और उनके साथ एक काले रंग का कुत्ता भी था। बाबा ने गांव में सूखे पड़े कुएं को पानी से भरकर चमत्कार कर दिया था। ये भी बताया जाता है कि बाबा पहले जिस गांव को छोड़कर आए थे, उनके आने के बाद वहां भयंकर आपदा आ गई थी। यहां आने के कुछ समय बाद बाबा ने यहीं देह त्याग दी थी। लोग बाबा की देह दफना रहे थे, इसी दौरान उनके साथ रहने वाले कुत्ते ने भी उसी गड्ढे में छलांग लगाकर जान दे दी थी। गांव के लोगों ने यहां बाबा की समाधि के साथ ही कुत्ते की भी एक दरगाह बना दी।
एयरफोर्स स्टेशन के रक्षक हैं बाबा
1965 में पाक ने किया हमला तो हवाई पट्टी पर नहीं गिरा एक भी बम
यहां आने वाले लोगों की मान्यता है कि नागा बाबा एयरफोर्स स्टेशन के भी रक्षक हैं। वायुसेना भी बाबा की आध्यात्मिक शक्ति को खूब मानती है। साल 1965 में जब पाकिस्तान ने हमला किया था, तो पाकिस्तानी वायुसेना ने अंबाला एयरफोर्स स्टेशन की हवाई पट्टी को उड़ाने के लिए यहां बमबारी की थी, लेकिन एक भी बम पट्टी पर न गिरकर यहां से कुछ दूरी पर गिर गया था। तब से आज तक एयरफोर्स के अधिकारी भी बाबा की शक्ति के सामने नतमस्तक हैं।
गुरुद्वारा साहिब में होंगे समागम
नागा बाबा की सेवा में अर्पित धूलकोट स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में इस बार भी विशेष समागम होंगे और बरसों से चली आ रही परंपरा को बरकरार रखेंगे। 12 फरवरी को श्री अखंड पाठ साहिब के पाठ आरंभ करेंगे। 14 फरवरी को सुबह 8.30 बजे श्री अखंड पाठ साहिब संपन्न होंगे और दोपहर 2 बजे तक विशेष कथा-कीर्तन द्वारा संगत को इलाहीबाणी श्रवण करवाएंगे। इस दौरान संगत के लिए अटूट लंगर और मिष्ठान प्रसार बांटे जाएंगे।
- मोहन सिंह, मुख्य ग्रंथी।
1955 से जारी है परंपरा
दादा-परदादा के समय से दरगाह पर मेला लगता है। वर्ष 1955 में गांव के अधीन जमीन थी और गांववासी समाधि पर माथा टेकने आते थे। 1965 की लड़ाई के बाद एयरफोर्स ने इसे अपने कब्जे में ले लिया। 2016 तक गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से मेले का कार्य संपन्न किया जाता था, लेकिन अब लेखा-जोखा एयरफोर्स द्वारा रखा जाता है जो भी चंदा इकट्ठा होता है वो कमेटी की मौजूदगी में रेडक्रॉस सोसायटी को दे दिया जाता है।
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- सुरजीत सिंह, गुरुद्वारा प्रधान।
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