संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के एकता विहार कीर्ति नगर स्थित शिव कुटीर धर्मशाला में श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया गया। कथा व्यास डॉ. स्वामी महामंडलेश्वर शिव चैतन्य महाराज ने शिव चरित्र का सुंदर वर्णन कर मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान श्री शिव द्वारा विवाह के लिए सहमत होने की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि दक्ष प्रजापति के महायज्ञ में भगवान श्री शिव के अपमान से सीख मिलती है कि किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। इससे आयोजन का फल नहीं मिलेगा। बिना आमंत्रण श्री शिव के मना करने के बावजूद सती का पिता के घर जाना, पति का अपमान देख योगाग्नि में स्वयं को भस्म करने के प्रसंग पर श्रोता भाव विभोर हो गए। सती के अग्नि में भस्म होने के बाद तीनों लोकों को भगवान श्री शिव का कोप भाजन बनना पड़ा।
शिव व पार्वती के विवाह का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा विवाह भूतकाल व भविष्य में देखने को नहीं मिलेगा। कथा के दौरान बराड़ा के शिवा एंड ग्रुप द्वारा शिव मेरा है, जोगी मेरा है आदि भजनों पर भक्तजन झूमने लगे। कथा व्यास ने श्रीराम कथा को प्रसाद बताते हुए कहा कि प्रसाद शब्द में प्र का अर्थ प्रभु, सा का अर्थ साक्षात और द का अर्थ दर्शन है अर्थात प्रसाद का आशय प्रभु का साक्षात दर्शन है।
कथा में मंत्रोच्चारण के बीच पंडित सतीश शांडिल्य द्वारा यजमान निर्मल अग्रवाल, नत्थू राम, वीर सेन, शिल्पी द्वारा विधिविधान पूर्वक पूजन संपन्न कराया। श्री राम कथा के बाद यजमान द्वारा आरती की गई। इस अवसर पर वंत राम धीमान, अजय जिंदल, राम कुमार कलसी, विशाल सिंगला, सुरिन्द्र बांगा,राजेश गौड, आशा सेठी, उषा बंसल, मीरा हरजाई, वीना शर्मा आदि मौजूद रहे।