अंबाला। छावनी के क्षेत्र रामबाग गोशाला में दिव्या श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्राद्ध पक्ष में आयोजित किया जा रहा है। कथा के पांचवें दिन सतगुरु देव देशमुख वशिष्ठ महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण भगवान पहली बार घर से बाहर निकले तो उनकी बृज से बाहर मित्र मंडली बन गई। सभी मित्र मिलकर रोजाना माखन चोरी करने जाते थे। सब बैठकर पहले योजना बनाते किस गोपी के घर माखन की चोरी करनी है। श्रीकृष्ण माखन लेकर बाहर आ जाते और सभी मित्रों के साथ बांटकर खाते थे। भगवान बोले, जिसके यहां चोरी की हो, उसके द्वार पर बैठकर माखन खाने में आनंद आता है। माखन चोरी की लीला का बखान करते हुए उन्होंने भगवान कृष्ण के बाल रूप का सुंदर प्रकार से वर्णन किया।
गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा की कथा अनुसार एक बार देव राज इंद्र को अपनी शक्तियों पर बहुत ज्यादा घमंड हो गया था, तब भगवान कृष्ण ने उनके अहंकार को तोड़ने के लिए एक योजना बनाई। एक बार गोकुल में जब सभी लोग तरह-तरह के पकवान बना रहे थे और हर्षोल्लास के साथ नृत्य-गीत कर रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने अपनी मां यशोदा से कहा कि आप लोग किस उत्सव की तैयारी में लगे हैं, पर मां यशोदा ने कहा कि बेटा हम देव राज इंद्र की पूजा कर रहे हैं। भगवान कृष्ण ने अपनी माता से भगवान इंद्र की पूजा करने का कारण पूछा। यशोदा मैया ने उन्हें बताया कि भगवान इंद्र की कृपा से ही हम सभी को अच्छी बारिश मिलती है और इससे हमारे अन्न की पैदावार अच्छी होती है। माता की बात सुनकर भगवान कृष्ण ने कहा कि अगर ऐसा है, तब तो हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि यही हमारी गाय चारा चरने जाती हैं और वहां पर लगे पेड़-पौधो की वजह से ही यहां अच्छी बारिश होती है।