जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक गुप्ता ने भ्रू्ण जांच से संबंधित मामले में दोषियों द्वारा दायर अपील को रद्द करते हुए झोलाछाप जसपाल सिंह व दो अन्य दोषियों की दो-दो वर्ष की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने क ा आदेश दिया है। एक-एक हजार रुपये के जुर्माने को भी बरकरार रखा गया है। सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में शामिल महिला मनजिंद्र कौर को बरी कर दिया है।
पीएनडीटी के नोडल अधिकारी एवं उप सिविल सर्जन डॉ. बीबी लाला ने बताया कि न्यायिक अधिकारी प्रथम श्रेणी सुश्री रेखा की अदालत ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए 2 जून को इस मामले में शामिल सौंडा निवासी जसपाल सिंह, अम्बाला निवासी पंकज गुप्ता, बनूड़ निवासी मनजिन्द्र कौर और बनूड़ के ही गगनदीप सिंह को दो-दो वर्ष की सजा सुनाई थी और सभी चारों दोषियों को एक-एक हजार रुपये जुर्माने के आदेश भी जारी किए थे। इस फैसले के विरुद्घ मामले के दोषियों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी और वीरवार को सत्र न्यायाधीश ने तीन दोषियों को निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखते हुए जेल भेजने के आदेश दिये हैं जबकि महिला दोषी मनजिन्द्र कौर को बरी कर दिया है।
सिविल सर्जन डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया कि 9 जुलाई 2012 को गांव सौंडा में जसपाल सिंह के घर पर गैर कानूनी तरीके से क्लीनिक चलाई जा रही है और इस क्लीनिक पर पंकज कुमार गुप्ता द्वारा गैर पंजीकृत अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भ में पल रहे भ्रूण की जांच की जाती थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डॉ. बीबी लाला के नेतृत्व में इस क्लीनिक पर औचक रेड की और जसपाल सिंह, पंकज कुमार गुप्ता और भ्रूण जांच करवाने आई महिला व उसे लेकर आने वाले चालक को मौके पर काबू कर लिया गया।