अंबाला। जलमग्न हुए अंबाला इंडस्टि्रयल एरिया से साइंस कारोबार की सांसें उखड़ गई। नौ जुलाई को हुई भारी बरसात के छह दिन बाद भी फैक्टरियों का कारोबार पूरी तरह से ठप है। कई फैक्टि्रयां कई-कई इंच गाद से भर चुकी हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा असर अंबाला की पहचान यानी शिक्षण संस्थानों से जुड़ी साइंस इंडस्ट्री पर पड़ा है।
देशभर के अलग-अलग राज्यों के स्कूलों व कॉलेजों की साइंस किटें सप्लाई से पहले ही डूब चुकी हैं। इससे कारोबारियों का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं अब स्कूलों व कॉलेजों के ऑर्डर को समय से देने पर भी संकट गहरा गया है। ऐसा ही एक गोदाम में पांच राज्यों यानी उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल, पंजाब व ओडिसा के सरकारी स्कूल में सप्लाई होने वाली किट ही डूब गई है।
हैरानी की बात यह है कि कारोबारी ने एक साल पहले ही इंडस्टि्रयल एरिया में गोदाम लिया था और कुछ समय बाद ही करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई इन किट की सप्लाई होनी थी। ऐसे में संबंधित कारोबारी को अब फैक्टरी के खुलने का इंतजार है, ताकि अनुमान लगाया जा सके कि आखिर कितना नुकसान हुआ है।
सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की तरफ से जारी होने वाली साइंस किट में करीब 15 अलग-अलग उपकरण थे। जिसमें माइक्रोस्कोप से लेकर छोटा-बड़ा अन्य सामान शामिल था।
अंबाला की साइंस इंडस्ट्री में शिक्षण संस्थानों के लिए काफी उपकरण बनाए जाते हैं। फिजिक्स इक्यूप्मेंट्स के अलावा, लैब और मेडिकल इक्यूप्मेंट्स का निर्माण होता है। स्कूल, काॅलेज, यूनिवर्सिटी या मेडिकल काॅलेजों में इन उपकरणों का प्रयोग होता है। देश के अलग-अलग कोनों के अलावा विदेशों में इन उपकरणों की सप्लाई है। हालांकि अप्रैल से आरंभ होने वाले नए वित्त वर्ष से पहले इंडस्ट्री को अलग-अलग शिक्षण संस्थानों से ढेरों ऑर्डर मिले थे और वो अधिकतर पूरी भी हो गए थे। दोबारा मिले ऑर्डरों को अब समय पर देने का संकट गहरा गया। बता दें कि एनसीईआरटी के अधीन देशभर में हजारों स्कूल व इंस्टीट्यूट हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए साइंस किट की सप्लाई की जाती है जिसकी खरीद प्राइवेट पार्टियों से होती है। साइंस किट अलग-अलग प्रकार की होती है जिसमें फिजिक्स लैब किट, मैथ किट, बॉयोलॉजी लैब किट, केमिस्ट्री लैब किट आदि शामिल हैं।
कारोबारी बोले- कोरोना से भी ज्यादा हो चुका नुकसान
साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैनुफेक्चर्स एसोसिएशन (असीमा) के जनरल सेक्रेटरी गौरव सोनी व अन्य कारोबारियों ने बताया कि पिछले छह दिन से जलमग्न इंडस्टि्रयल एरिया में करोड़ों का नुकसान हुआ है। उसका सही अंदाजा पूरी तरह से पानी उतरने व गाद निकलने के बाद लगाया जा सकता है। कोरोना के समय में भी इतना नुकसान नहीं हुआ था जितना मशीनों से डूबने से हो चुका है। काम पूरी तरह से ठप हो चुका है और समय लगेगा इसे शुरू होने में। ऐसे में वर्कऑर्डर समय से पूरे करने पर भी संकट गहराया गया है। ऐसे में इसका असर उपकरणों के निर्धारित रेटों पर भी पड़ेगा। इस नुकसान के बीच रेट बढ़ भी सकते हैं।