अंबाला सिटी। ऐतिहासिक तीन दिवसीय वामन द्वादशी मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भगवान वामन के हिंडोलों का सजाया जा रहा है। वहीं बेड़ा शुक्रवार से तैयार होगा।
पुरानी अनाज मंडी में झंडा पूजन के बाद टेंट लगना शुरू हो गया है। 24 सितंबर से मेला शुरू होगा। पुरानी अनाज मंडी में चार मंदिरों से भगवान वामन के पांच हिंडोले 24 सितंबर को शोभायात्रा के साथ विराजमान होंगे। शुक्रवार से वामन भगवान के हिंडौलों के नौकाविहार के लिए नौरंगराय तालाब में बेड़ा बनना शुरू होगा।
करीब 100 वर्ष से वामन द्वादशी का मेला होता है। इस बार 60 बल्लियों, 25 ड्रम व 125 बांस से बेड़ा तैयार होगा। इस बेड़े को पूर्व पार्षद बृजलाल सिंगला का परिवार बनाएगा। बृजलाल सिंगला ने बताया कि उनके पिता लाला पूर्ण चंद भी भगवान वामन का बेड़ा बनाते थे।
उन्होंने मेले में करीब 60 से 70 साल तक सेवा की और वह तैरना भी जानते थे। सिंगला बताते हैं कि बाण की रस्सी से यह बेड़ा तैयार किया जाएगा। इसकी लंबाई करीब 24 से 25 फुट होगी। इस बेड़े में 26 सितंबर को शोभायात्रा के साथ भगवान वामन पांच हिंडौलों के साथ विराजमान होंगे। उनको नौरंगराय तालाब में नौकाविहार करवाया जाएगा। बृजलाल सिंगला ने बताया कि उनके परिवार में पहले उनके पिता लाला पूर्ण चंद बेड़ा खींचते थे। अब उनके बड़े भाई लाला अमृतलाल बेड़ा खींचते हैं। संवाद
मशीन से हो रही पैकिंग
भगवान वामन को खास तौर पर देसी घी की पंजीरी का प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह प्रसाद भी सभी मंदिरों ने बनाना शुरू कर दिया है। शहर पुराना सिविल अस्पताल के सामने श्री राधे श्याम मंदिर में भी देसी घी की पंजीरी तैयार की जा रही है। मंदिर में करीब चार क्विंटल पंजीरी के पैकेट बनाए जाएंगे। साथ ही अंबिका देवी मंदिर में भी अलग-अलग मंदिरों की प्रसाद पैकिंग के लिए मशीन लगाई गई है। यह मशीन भी दिन रात चल रही है। इस मशीन से हजारों पैकेट रोजाना ऑटोमेटिक तरीके से पैक किए जा रहे हैं।
शोभायात्रा के साथ भगवान वामन होते हैं विराजमान
मेले के पहले दिन मंदिरों से हिंडोले आते हैं। शोभायात्रा और पूजा-अर्चना के बाद भगवान वामन शहर की पुरानी अनाज मंडी में विराजमान होते हैं। यह हिंडोले बड़ा ठाकुरद्वारा, राधे श्याम मंदिर, कलाल माजरी से दो हिंडौले, नौरियान धर्मशाला से आते हैं। मेले के तीसरे व अंतिम दिन बैंड के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है। देर रात तक हिंडोले नौरंगराय तालाब पर परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं।