गेहूं का सीजन जहां शुरु हो चुका है, वहीं खेतों में पकी खड़ी फसल पर आग का खतरा मंडरा रहा है। जिला के 430 गांवों के लिए मात्र 14 फायर ब्रिगेड ही हैं। यानी आपको खुद ही खेतों की हिफाजत करनी पड़ेगी। किसानों को खुद ही कुछ हद तक अपने स्तर पर इंतजाम भी करना पड़ेगा। जिला अंबाला में गेहूं और धान की रकबा सबसे ज्यादा है और यही कारण है कि खतरा भी काफी बड़ा है।
यह है स्थिति
अंबाला जिले में 430 गांव हैं और लगभग हर गांव में गेहूं का रकबा है। छह ब्लाकों में बंटे इन गांवों के लिए अंबाला सिटी, अंबाला कैंट व नारायणगढ़ में फायर स्टेशन बनाए गए हैं, जहां पर गेहूं अथवा धान के सीजन में खेतों में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां रवाना की जाती हैं। लेकिन सिटी में जहां पांच गाड़ियां हैं, वहीं कैंट में छह व नारायणगढ़ में तीन गाडिय़ां हैं। यानी तीस गांवों के लिए मात्र एक गाड़ी है। गेहूं के इस सीजन में खतरा ज्यादा है और मात्र चौदह गाड़ियों के सहारे करीब अस्सी हजार हेक्टेयर का रकबा कवर करना काफी मुश्किल है।
यह कहते हैं किसान
किसानों में करम सिंह नवीन कुमार, यशपाल राणा, विनोद कुमार, करनैल सिंह, कुलवंत सिंह, अच्छर सिंह, जसविंदर सिंह, तेजपाल सिंह, जोध सिंह, मलकीत सिंह, रामनिवास, दर्शन सिंह का कहना है कि गर्मियों में गेहूं के खेतों में आग लगने की घटनाएं काफी सामने आती हैं। यदि उन गांवों के खेतों में आग लगे, जहां फायर स्टेशन नजदीक हैं, वहां पर तो स्थिति को संभाला जा सकता है, लेकिन यदि फायर स्टेशन से दूर यदि किसी गांव के खेतों में आग लगती है तो काफी मुश्किल होती। ऐसी स्थिति में काफी बड़ा नुकसान होता है। यदि गाड़ी पहुंच भी जाए, तो कईं बार स्थिति ऐसी आती है कि गाड़ी को दोबारा भरने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं मिल पाता। यही कारण है कि आगजनी की घटनाओं में किसानों का काफी नुकसान होता है।
एक फायर स्टेशन पास, फिर भी लेटलतीफी
एमसीए ने करीब एक साल पहले अपनी हाउस की मीटिंग में सिटी के मानव चौक के पास फायर स्टेशन बनाने का प्लान पास किया था। लेकिन साल बीतने के बाद भी इस पर काम नहीं चल पाया है। यदि यह फायर स्टेशन बन जाता है, तो अंबाला-हिसार रोड के आसपास के गांवों में इसका फायदा होता। अभी तक यह योजना कागजों से ही बाहर नहीं आ पाई है।
सीजन में की जाए व्यवस्था
किसानों का कहना है कि गेहूं के सीजन को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इसके तहत शहजादपुर, साहा, नग्गल, मुलाना, बराड़ा के लिए भी गाड़ियां दी जाएं, जो आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंच सके। यदि प्रशासन ऐसी व्यवस्था करता है, तो गेहूं के सीजन में किसानों को थोड़ी राहत तो मिलेगी।
फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां तो कम हैं, लेकिन फिर भी कोशिश यही है कि गेहूं के सीजन में खेतों में आग लगने की स्थिति में किसानों को परेशानी न हों। एमसीए ने एक फायर स्टेशन भी सिटी के मानव चौके लिए पास किया था, लेकिन यह भी कागजी फेर में उलझाया हुआ है। गेहूं के सीजन के लिए कोई न कोई व्यवस्था अवश्य बनाई जाएगी।
- रमेश मल, मेयर एमसीए