नोटबंदी के पचास दिन अब पूरे होने वाले हैं। सरकार की ओर से भी लोगों को कैशलेस के प्रति जागरूक किया जा रहा है, लेकिन कैशलेस का फंडा अभी पूरी तरह से नहीं चल पाया है। इसमें अभी भी कारोबारियों को ग्राहकों की अधूरी तैयारियां परेशान कर रही हैं, जबकि पब्लिक डीलिंग वाले महकमे भी अभी पूरी तरह से डिजिटल नहीं हो पाए हैं। माना जा रहा है कि अभी इसमें और समय लग सकता है, जबकि सबसे ज्यादा परेशानी उस वर्ग को है, जिसके पास स्मार्ट फोन नहीं है और अशिक्षित हैं।
नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर रुझान तो बढ़ा है, लेकिन इसमें सबसे बड़ा पेंच उस वर्ग का है, जो इस पर विश्वास नहीं कर पा रहा है या फिर डिजिटल पेमेंट के फंडे नहीं जानता है। इस में भी कई ऐसे हैं, जिनके पास न तो बैंक खाते हैं और यदि हैं, तो उनके पास डेबिट कार्ड नहीं है। इनका सारा काम अभी भी कैश पर ही टिका है। कुछ ऐसे ही हालात कारोबारियों के भी हैं। मध्यम तथा छोटे कारोबारियों व दुकानदार भी अभी तक कैशलेस ट्रांजेक्शन की ओर नहीं बढ़ पा रहे हैं, जबकि इनके पास आने वाले ग्राहक अथवा पेमेंट भी कैश में ही ले रहे हैं। दूसरी ओर सरकारी महकमों को भी इसकी ट्रेनिंग तो दी जा रही है, जबकि अधिकतर विभाग अभी भी पूरी तरह कैशलेस नहीं हो पाए हैं। पब्लिक डीलिंग वाले विभागों में नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, रोडवेज, तहसील आदि ऐसे विभाग हैं, जो सीधे पब्लिक से जुड़े हुए हैं। इन में भी धीरे-धीरे कैशलेस की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन जनता अभी भी कैश पेमेंट को ही प्राथमिकता दे रही है।
यह कहते हैं कारोबारी
कैंट के कारोबारी चरणजीत सिंह, अशोक कुमार, हेमंत गुप्ता, बृजभूषण का कहना है कि डिजिटल पेमेंट को लेकर लोगों का रुझान बढ़ा तो है, लेकिन यह इतना ज्यादा नहीं है। लोग अपनी पेमेंट करने के लिए कैश का ही इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। हां, कुछ लोगों ने अपनी नियमित बिलिंग आदि तो ऑनलाइन देनी शुरू कर दी है, लेकिन घरेलू खर्च आदि के लिए तो कैश ही चल रहा है। दुकानदार राजीव यादव, सुरेश कुमार, इंप्रीत सिंह, महेंद्र, राजीव कुमार का कहना है कि लोग चाहे रसोई का सामान खरीदने आए या फिर कुछ अन्य सामान कैश पेमेंट ही हो रही है। शिक्षित वर्ग का भी एक हिस्सा ही डिजिटल पेमेंट कर रहा है, लेकिन व्यवस्था होने के बावजूद अभी भी कैश को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
यह कहते हैं नौकरीपेशा
नौकरीपेशा लक्ष्यवीर शुक्ला, राजन गुप्ता, चमन लाल, दैनिक वेतन भोगी प्रह्लाद, मंजीत सिंह, कपिल शर्मा, ट्रक ड्राइवर सिद्धार्थ, रंजीत सिंह, टैक्सी चालक संजीव आनंद, लक्षित, रविंदर का कहना है कि डिटिजल पेमेंट के लिए बेशक कुछ लोग दिलचस्पी दिखाते हैं, लेकिन ज्यादातर कैश पेमेंट ही कर रहे हैं। हां, लोग अपने बिजली, टेलीफोन, पानी, मोबाइल बिल आदि तो ऑनलाइन दे देते हैं, लेकिन रूटीन के खर्च में काफी कम स्तर पर यह इस्तेमाल हो रहा है।
दस हजार स्वाइप मशीनों के लिए आवेदन
बैंक अधिकारियों की मानें तो नोटबंदी के बाद अब तक करीब दस हजार लोगों ने कारोबार के लिए स्वाइप मशीनों के लिए आवेदन किया है। इससे पहले भी चार से पांच हजार कारोबारी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। खास बात है कि यदि पूरी तरह से डिजिटल पेमेंट का फंडा अपनाना है, तो इससे कई गुणा स्वाइप मशीनों की आवश्यकता होगी, जबकि हर व्यक्ति को इसके लिए डिजिटल पेमेंट के फंडे सीखने होंगे।
डिजिटल पेमेंट की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है, जबकि लोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है। अब यह व्यक्ति की दिलचस्पी पर है कि वे इस ओर कितना आगे बढ़ते हैं। फिलहाल बैंकों में स्थिति सामान्य होने लगी है, जबकि जल्द ही लोगों को और राहत मिलेगी।
- नरेश सिंगला, लीड बैंक मैनेजर अंबाला