सेक्टर 7 में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में दूर-दराज से लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां पर मांगी गई मन्नत पूरी होती है। बतादें कि सेक्टर-7 को हुडा विभाग द्वारा 80 के दशक में स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना के दौरान ही यहां पर नीलकंठ महादेव मंदिर की भी स्थापना की गई थी।
हुडा विभाग की ओर से 80 के दशक में प्लॉट काटे गए तो यहां पर कुछ लोगों ने इसके पास रिहायशी भवन बनाने भी शुरू कर दिए। कुछ स्थानीय लोगों ने शिवलिंग के प्रति आस्था जताते हुए शिवलिंग के स्थान पर वर्ष 1990 में एक कमरे का निर्माण कर दिया और यहां एक भव्य मंदिर बनाने की योजना तय की गई, लेकिन हुडा प्रशासन ने शिवलिंग के स्थान पर बनाए गए उस कमरे को 1993 में यह कहकर तोड़ दिया कि यह भूमि हुडा विभाग की है। यहां पर किसी प्रकार का अवैध निर्माण नहीं हो सकता। मंदिर के रूप में बनाए गए उस कमरे के टूट जाने के बाद लोगों की आस्था को गहरी चोट लगी थी। इस पूरे मामले में विश्व हिंदू परिषद के कुछ सदस्य सामने आए और हुडा अधिकारियों से मिलकर मंदिर बनाने के लिए उस जगह को खरीद कर मंदिर के नाम समर्पित कर दी थी। विश्व हिंदू परिषद के सुरेश मितल, विनोद कुमार, फकीर चंद, लज्जाराम, सुभाष गुप्ता, सोहन लाल कपूर सहित अन्य सदस्यों ने वर्ष 1994 में श्री नीलकंठ महादेव मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया।
करीब तीन वर्ष मंदिर का निर्माण कार्य चला और वर्ष 1997 में श्री नीलकंठ महादेव का भव्य मंदिर बनाकर सेक्टर वासियों को समर्पित कर दिया। मंदिर भवन बनने के कुछ दिनों बाद 1998 में मंदिर भवन में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम करने के लिए राजस्थान के अलवर जयपुर से अनुभवी कलाकारों से मूूर्तियां तैयार करवाई गई, जोकि आज भी मंदिर भवन में स्थापित हैं।
विश्व हिंदू परिषद के जिला प्रधान समीर गुप्ता व मार्ग दर्शक राजिंद्र बसंल ने बताया कि वर्ष 2000 में मंदिर का भव्य सुंदरीकरण करने के लिए दिल्ली छतरपुर मंदिर से विशेष कलाकारों को बुलाया गया। इसमें कलाकारों ने करीब एक वर्ष में मंदिर को सुंदर बनाया। मंदिर में पुजारी पंडित भगवती प्रसाद सहित दो सहयोगी पुजारी पंडित धमेंद्र गौड़ व पंडित त्रिलोचन शास्त्री पूजा करते हैं।
श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में राम नवमी से एक महीना पहले सामूहिक रामायण पाठ शुरू किया जाता है। इसमें सभी परिवारों से कोई एक सदस्य रामायण पाठ में भाग लेकर रामायण पाठ को आगे बढ़ाता है और इस सामूहिक रामायण पाठ का समापन विधिपूर्वक राम नवमी को किया जाता है।
- पीसी गुप्ता, व्यवस्था प्रमुख, श्री महादेव नीलकंठ मंदिर, अंबाला सिटी।
प्रतिवर्ष सावन मास में श्री महादेव नीलकंठ मंदिर परिसर में सवा करोड़ ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप किया जाता है। इस जाप में प्रतिदिन 100 भक्तजन मंदिर में बैठकर कर जाप करते हैं और एक भक्त एक लाख बार ओम नम: शिवाय का जाप करता है। सावन मास में किए जाने वाले ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप पिछले करीब दस वर्ष पहले शुरू किया गया था जोकि निरंतर जारी है।
- सतीश छाबड़ा, उपप्रधान, श्री महादेव नीलकंठ मंदिर, अंबाला सिटी।
श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में कई कार्यक्रम बहुत बड़े स्तर पर करवाए जाते हैं। इसमें खास तौर पर जन्माष्टमी का कार्यक्रम धूमधाम से मनाया जाता है। इस कार्यक्रम में रासलीला करने के लिए वृंदावन से अनुभवी कलाकारों को बुलाया जाता है। यह कार्यक्रम देखने के लिए शहर भर के अलावा दूर दराज के क्षेत्रों से भी भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण जी की सुंदर वेश भूषा से सजे कलाकारों की प्रस्तुति देखने का आनंद उठाते हैं।
नरेश अग्रवाल, प्रधान, श्री महादेव नीलकंठ मंदिर, अंबाला सिटी।
मंदिर बनाने की प्रक्रिया 80 के दशक में शुरू की गई थी, लेकिन उस दौर में मंदिर का निर्माण करवाने के लिए हुडा विभाग से भूमि मांगी गई थी, लेकिन भूमि लेने के लिए समाजसेवी लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ी थी। विभागीय दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने पूरा जोर लग चुका था, लेकिन सेक्टर वासियों ने लगातार संबंधित विभागीय अधिकारियों से तालमेल कर कानूनी दायरे में रहकर प्रक्रिया को पूरा कर मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। जिस कारण आज सेक्टर सात में एक भव्य मंदिर भक्तों के लिए समर्पित है।
- समीर गुप्ता, जिला प्रधान, हिन्दू विश्व परिषद, अंबाला।
सेक्टर के करीब 80 प्रतिशत परिवार ऐसे हैं जोकि प्राचीन समय से मंदिर से जुड़े हुए हैं। मंदिर को लेकर सेक्टर वासियों में बहुत ज्यादा श्रद्धा देखने को मिलती है। मंदिर का कोई भी काम हो सभी लोग श्रद्धापूर्वक अपनी हिस्सेदारी रखते हैं। इस मंदिर की स्थापना करने में कुछ ऐसे लोग रहे हैं। जिन्होंने मंदिर स्थापित करवाने के लिए हर संभव प्रयास किए थे।
- संदीप सचदेवा, प्रधान, वेलफेयर सोसायटी, सेक्टर-7, अंबाला सिटी।
मंदिर भवन में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्तजन पहुंच रहे हैं। श्री महादेव नीलकंठ मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर से भक्तों की प्राचीन समय से आस्था जुड़ी हुई है। प्राचीन समय में शिवलिंग पर जल चढ़ाकर लोग मन्नतें मांगते थे। जोकि कुछ समय में संपूर्ण हो जाती थी।
- पुजारी भगवती प्रसाद, श्री महादेव नीलकंठ मंदिर, अंबाला सिटी।