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85 स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों की जिंदगी पर संकट

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Crisis on the lives of thousands of students studying in 85 schools - फोटो : Ambala
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अंबाला। जिले में 85 स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों की जान पर संकट मंडराया हुआ है। इन स्कूलों में करीब 218 कमरों की हालत खस्ता है। लेकिन इन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि एक साल पहले पीडब्ल्यूडी बीएंड आर विभाग को पत्र लिखकर शिक्षा विभाग ने इन कमरों की निरीक्षण रिपोर्ट मांगकर खानापूर्ति जरूर कर दी थी। लेकिन इसके बाद किसी ने कोई कदम नहीं उठाया।
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अलबत्ता अब किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है। लिहाजा इन सभी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूमों पर मौत का संकट मंडराया हुआ है। इनमें 47 मिडल और प्राथमिक स्कूल के 104 और 38 हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के 114 कमरे शामिल हैं। अब यह खतरा और भी गहरा गया है क्योंकि आज से मिडल स्कूल भी खुल जाएंगे। बता दें पिछले करीब 94 दिनों से मिडल स्कूल बंद थे। यदि इस दौरान विभागीय अधिकारी चाहते तो इन कमरों को कड़म घोषित करने अथवा रिपेयर करवाने की कार्रवाई की जा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही कारण है कि अब इन स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों की जान खतरे में है।
कंडम भवनों में यह भवन भी था शामिल
करीब छह माह पहले इस स्कूल के कमरों की गैलरी के लेंटर में दरार आने के कारण स्कूल प्रबंधन ने इस भवन को कंडम घोषित करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी से पत्राचार शुरू करते हुए लेंटर की जानकारी दे दी थी। इससे पहले जुलाई 2020 में जो जो लिस्ट तैयार की गई थी उसमें भी इस स्कूल का नाम शामिल था लेकिन किसी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद कुछ दिन यहां कक्षाएं लगी भी थी।
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2011 में बनाई गई थी जिला स्कूल भवन कंडमेशन कमेटी
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए 31 अक्टूबर 2011 में वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव हरियाणा सरकार, शिक्षा विभाग, सुरीना राजन ने प्रदेशभर के जिलों में जिला स्कूल भवन कंडमेशन कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे। इसके अनुसार इस कमेटी के चेयरमैन एडीसी, सदस्यों के तौर जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और संबंधित स्कूल के मुखिया को शामिल किया गया है।
क्या कहते हैं जिले के जिम्मेदार अधिकारी
कितने स्कूलों की स्थिति खराब है रिपोर्ट देखने के बाद ही इस बारे में सही स्थिति बताई जा सकती है। यदि 218 कमरों की हालत खराब है तो निश्चित तौर पर जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी।
हम सर्व शिक्षा अभियान के तहत नए भवन निर्माण के लिए कार्य करते हैं। लेकिन हमने जिला शिक्षा अधिकारी के कहने के बाद जिले के करीब 85 स्कूलों के करीब 200 कमरों की रिपोर्ट बनाकर अधिकारियों को उपलब्ध करवा दी थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र लिखा गया था।
-राहुल भारद्वाज, उपमंडल अभियंता, समग्र शिक्षा अंबाला।
मामला निश्चित तौर पर गंभीर है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी एक्सईएन से मैं बात करता हूं। यदि कमरों की रिपेयर करनी है तो रिपेयर की रिपोर्ट दें यदि कंडम हैं तो कंडम रिपोर्ट दें।
जगदीप ढांडा, एडीसी अंबाला।
शिक्षा विभाग ने इस तरह की कोई लिस्ट हमें भेजी थी इसके बारे में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। शिक्षा विभाग के पास भी अपनी तकनीकी शाखा है वह उनसे भी जांच करवा सकते हैं। यदि भवन कंडम हैं तो रिपोर्ट नहीं होने तक वहां बच्चों को न बिठाया जाए।
-निशांत, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी बीएंड आर
शाहपुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के कमरों की गैलरी का लेंटर गिरा
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल शाहपुर के कमरों के बाहर गैलरी का बुधवार देर रात अचानक लेंटर गिर गया। स्कूल में पहली से 12वीं तक के 500 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। स्कूल प्रबंधन ने 13 जुलाई को ही इन कमरों में कक्षाएं नहीं लगाने का निर्णय लिया था। चूंकि हादसा देर रात हुआ और यहां कक्षाएं लगानी बंद कर दी गई थी इसी कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। 13 जुलाई को डिप्टी डीईओ सुधीर कालड़ा ने इस स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल कमरों की गैलरी की छत भी देखी। निर्देश दिए कि यहां पर 16 जुलाई से जब स्कूल खुलें तो कक्षाएं न लगाई जाएं। इसी का परिणाम रहा कि बड़ी अनहोनी टल गई।
जनवरी माह व 16 जुलाई को भी खंड शिक्षा अधिकारी के नाम पत्र भेजकर उन्हें लेंटर में दरारें आने की अवगत करवाया गया था। बिल्डिंग को कंडम घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही थी। करीब एक सप्ताह पहले ही डिप्टी डीईओ सुधीर कालड़ा भी स्कूल का जायजा लेकर गए थे। गनीमत यह रही कि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
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-प्रदीप, प्रिंसिपल राजकीय स्कूल शहापुर।
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