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दिल्ली में लॉकडाउन से अटकी कच्चे माल की सप्लाई , मिक्सी उद्योग पर मंडराया संकट

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कोरोना काल में लॉकडाउन के भय का असर अंबाला के मिक्सी उद्योग पर अभी से दिखाई देने लगा है। जून 2020 से लेकर मार्च 2021 तक पहले ही कच्चे माल के दामों में 25 से लेकर 230 प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है। अभी उद्यमी इस संकट से भी नहीं उबरे थे कि अब नई आफत उन पर आन पड़ी है। यह है लॉकडाउन का भय।
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प्रदेश में लॉकडाउन लगने की आशंका और दिल्ली में लगे एक सप्ताह के लॉकडाउन ने मिक्सी उद्यमियों की कमर तोड़ दी है। पहले से ही कच्चे माल की शॉर्टेज और बने हुए माल के उठान नहीं होने से परेशान उद्यमियों को अब कच्चा माल ही नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि मिक्सी निर्माण के लिए आवश्यक सामान की आपूर्ति दिल्ली और मुंबई से ही होती है। दोनों जगह आंशिक लॉकडाउन लगाया गया है। जिले में इस समय मिक्सी उद्योग की छोटी-बड़ी करीब 65 इकाइयां कार्यरत हैं, जोकि इस कारण सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं। इनसे करीब 300 करोड़ रुपये का टर्नओवर होता है। पहले से कच्चे माल के दामों में चल रही तेजी के चलते अंबाला के मिक्सी उद्योग की सेल 40 प्रतिशत तक गिर चुकी है।
बता दें कि पिछले कुछ महीनों में सबसे ज्यादा दाम प्लास्टिक के दाने के करीब 230 फीसदी बढ़ चुके हैं। पहले यह 138 रुपये किलो मिलता था, जोकि आपूर्ति प्रभावित होने से पहले तक 320 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। इसी तरह अन्य सामान के दामों में तजी आई थी।
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दिल्ली से आने वाले किस सामान की आपूर्ति पर पड़ रहा असर
मिक्सी बनाने के लिए सबसे जरूरी प्लास्टिक का दाना हो या फिर कॉपर वायर, एल्युमीनियम बुश इत्यादि सभी की आपूर्ति दिल्ली से ही होती है, लेकिन दिल्ली में एक सप्ताह का लॉकडाउन लगा हुआ है। मुंबई की बात करें तो स्टेलनेस स्टील के जार मुंबई से ही अंबाला पहुंचते हैं और वहां भी एक मई तक सरकार ने लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाई हुई हैं। इसीलिए स्टेलनेस स्टील के जार की आपूर्ति भी सही तरीके से नहीं हो पा रही। यदि थोड़ी बहुत आपूर्ति चल भी रही है तो वहां से जार बनाने वाली लेबर पलायन कर चुकी है। अंबाला के मिक्सी उद्योग की बात करें तो यहां करीब तीन हजार कर्मचारी इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।
जानिए कहां पड़ती है कुशल लेबर की जरूरत
मोटर प्रोडक्शन
मॉल्डिंग प्रक्रिया
पैकेजिंग
टेस्टिंग
यह चार प्रक्रियाएं हैं जहां पर कुशल यानी स्किल्ड लेबर की जरूरत मिक्सी उद्यमियों को पड़ती है।
लेबर पलायन का सता रहा भय
मुंबई से लेबर पलायन हो चुकी है और दिल्ली में भी यही हालात हैं। इसीलिए अंबाला के उद्यमियों को अब भय यह सता रहा है कि कहीं यहां कि स्किल्ड लेबर मुंबई या दिल्ली की कंपनियों में शिफ्ट न कर जाए, क्योंकि वहां बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं वह चंद रुपयों को लालच देकर यहां की स्किल्ड लेबर को तोड़ सकती हैं। इसी तरह हरियाणा में भी लॉकडाउन की अफवाहों के चलते प्रवासी लेबर पलायन की तैयारी कर चुकी हैं, हालांकि अभी तक उद्यमी जैसे-तैसे लेबर को समझाने में जुटे हैं।
लेबर पलायन हुआ तो क्या होगा असर
लेबर में यदि स्किल्ड लेबर का पलायन हुआ तो अंबाला में मिक्सी प्रोडक्शन थम जाएगा। इसके बाद स्किल्ड लेबर को तलाशने में दोबारा मशक्कत करनी पड़ेगी या फिर सामान्य लेबर को स्किल्ड करने में समय और धन दोनों जाया करने होंगे। अलबत्ता दोनों ही परिस्थितियों में उद्यमियों की कमर टूटना तय है।
निश्चित तौर पर दिल्ली और मुंबई में लगे आंशिक लॉकडाउन का असर मिक्सी उद्योग पर सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है। कच्चे माल की आपूर्ति थम गई है। पहले से ही रेट इतने ज्यादा बढ़ चुके थे कि तैयार माल को बेचना चुनौती से कम नहीं था। अब नया संकट लेबर पलायन का भी सता रहा है। हम लेबर को समझा रहे हैं कि लॉकडाउन नहीं लगेगा, लेकिन यह कब तक इस बात को समझते हैं यह नहीं कहा जा सकता।
- अजय अग्रवाल, प्रधान, अंबाला इलेक्ट्रिकल अप्लायंस एसो.
कॉपर वायर की बात हो या फिर स्टेलनेस स्टील और एल्युमीनियम बुश या अन्य सामान सभी की आपूर्ति लॉकडाउन के चलते ठप हो गई है, क्योंकि हमारा सारा माल ही दिल्ली और मुंबई से आना होता है। अब लॉकडाउन लगा तो उद्योग को बचाना मुश्किल हो जाएगा। पहला लॉकडाउन तो हम जैसे-तैसे बर्दाश्त कर गए, लेकिन इस बार नहीं झेल सकेंगे।
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- एलसी गोयल, पैटर्न अंबाला इलेक्ट्रिकल एसो.
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