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नोटबंदी के बाद 21वां दिन .

Wed, 30 Nov 2016 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
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बाला कैंट। नोटबंदी के 21वें दिन आरबीआई की ओर से राहत के बाद भी बैंकों से पूरा कैश नहीं मिल पा रहा है। लोगों को चिंता सता रही है कि आने वाले महीने का रूटीन खर्च कैसे एडजस्ट करेंगे। लोगों का यह भी कहना है कि आरबीआई एक ओर राहत दे रहा है, तो दूसरी ओर बैंकों को पर्याप्त कैश मुहैया नहीं कराया जा रहा है, तो इस राहत का कोई फायदा नहीं है।
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 एटीएम से कैश हासिल करने में अभी भी लोगों को दो-दो घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह होते ही लोग एटीएम के बाहर पहुंचना शुरू हो जाते हैं। धीरे-धीरे यह लाइन भी लंबी होनी शुरू हो जाती है और लोगों को भी कई घंटों तक लाइनों में ही खड़ा रहना पड़ता है। अब जनता भी कहने लगी है कि नोटबंदी के इक्कीस दिन बीतने के बाद भी यदि बैंकों से कैश पूरा न मिले, तो स्थिति कब सुधरेगी। एटीएम से कैश निकासी में भी दो हजार या फिर सौ-सौ रुपये के नोट मिल रहे हैं, जबकि एटीएम से भी तय मात्रा में कैश मिल सकता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन एटीएम पर है, जहां पर नो कैश का बोर्ड लटका मिल रहा है।

यह कहती है जनता  
नोटबंदी के इक्कीस दिन बीतने के बाद भी यदि जनता लाइनों में है, तो यह सरकार की नाकामी ही है। कम से कम अब तो मार्केट में नए नोट सर्कुलेट करवाने चाहिएं, ताकि जनता को राहत मिल सके। बैंकों से भी कैश पूरा नहीं मिल पाता।
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- आनंद मोहन शुक्ला, समाज सेवी

नोटबंदी के बाद से ही हालात बिगड़ने लगे हैं, जबकि जनता छोटे नोटों के साथ-साथ दो हजार के नोट से भी परेशान हैं। कई बैंकों में पूरा कैश नहीं मिल रहा है, जबकि जनता भटक रही है। अब तो आने वाले महीने की टेंशन लोगों को होने लगी है कि कैसे खर्च को एडजस्ट करेंगे।
- स्नेहपाल धीमान, इनवेस्टमेंट एंड लोन कंसलटेंट

कालाधन बाहर लाने के लिए बेशक यह कदम अच्छा हो सकता है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट अभी तक खत्म नहीं हुए हैं। हां, बैंकों में लाइनें थोड़ी कम हुई हैं, लेकिन जब तक बैंक और मार्केट में कैश पूरी तरह से फ्लो नहीं होता, राहत मिलती नहीं दिख रही है।
- राजेश नैनीवाल, करियर कंसलटेंट

कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है, जबकि व्यापारियों को एक बार में पचास हजार रुपये निकलवाने की छूट दी है। अब क्या करें, कारोबार के लिए सामान खरीदना है, जबकि उधार कम मिल रहा है और बैंक से कैश पूरा नहीं मिलता। लगता है कि कुछ और दिन नोटबंदी का यह असर झेलना पड़ेगा, जबकि स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा।
- अजय कुमार, कारोबारी

बीमा किस्त नगद जमा करने का लेटर भेजा
नारायणगढ़ में बीमा पालिसी धारक को कंपनी ने पत्र भेजकर बीमा की किस्त नकद राशि में जमा करने को कहा है। गांव बख्तुआ वासी रामपाल ने बताया कि उन्होंने एक बीमा कंपनी की पालिसी ले रखी है, जिसकी किस्त हर छह माह पर दी जाती है। उन्होंने बताया कि बीते 21 नवंबर को उन्होंने यह राशि चेक में भरकर उक्त बीमा कंपनी के खाते में लगा दी। हैरानी की बात है कि कुछ दिनों के बाद लेटर मिला। इसमें साफ लिखा कि पालिसी का प्रीमियम चेक से नहीं बल्कि नगद राशि में जमा करवाना होगा, जबकि चेक से अदा की गई किस्त नहीं मानी जाएगी। जब बीमा कंपनी के पदाधिकारियों से बातचीत की गई ,तो उन्होंने भी पल्ला झाड़ते हुए इस बार नकद राशि जमा करवाने को कहा।

नोटबंदी के बाद अब स्थिति में काफी सुधार है, जबकि बैंकिंग अब नार्मल की ओर बढ़ रही है। कुछ कैश मिलने में दिक्कत आ रही है, जो जल्द ही दूर हो जाएगी। धीरे-धीरे करेंसी सर्कुलेट हो रही है और यह समस्या भी खत्म हो जाएगी, जिसके बाद जनता को राहत मिलेगी।
- नरेश सिंगला, लीड बैंक मैनेजर, अंबाला

 लड़खड़ा रहा इलेक्ट्रानिक बाजार
- सरकार द्वारा बड़े नोटों के बंद होने के फैसले से कारोबार में 50 प्रतिशत की गिरावट
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। सरकार द्वारा पांच सौ व एक हजार रुपये के नोटबंदी के फैसले के इक्कीसवें दिन बाद भी बाजारों में मंदी का आलम बना हुआ है। अगर इलेक्ट्रानिक बाजार की बात करें तो उनका कारोबार आधा रह गया है, जबकि कई दुकानदार तो केवल दाल रोटी चलाने तक ही सीमिति है। अब केवल क्रेडिट व डेबिट कार्ड के जरिये ही दुकानदारी चलाने को मजबूर हो गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि नवम्बर व दिसंबर दो माह ही उनके सीजन के दिन होते हैं। उन्हीं दिनों में मंदा झेल रहे हैं।

मार्केट में केवल क्रेडिट व डेबिट कार्ड के इस्तेमाल से जो कारोबार हो रहा है, केवल वहीं तक समिति है। जबकि दूसरे ग्राहक केवल छोटी चीजों की खरीदारी कर रहे हैं। अगर कोई चेक से पेमेंट करता है तो वो भी दुकानदारों के लिए परेशानी बना हुआ है कि कहीं ये चेक बाउंस न हो जाएं। भला ऐसे में कारोबार कैसे उठेगा।
- ललित भाटिया, रायमार्केट, दुकानदार

ये सीजन का समय है और स्वैपिंग मशीन की एक कारोबार का जरिया है। इस नोटबंदी से ग्रामीण इलाकों बाजारों में कम खरीदारी कर रहे है और अगर वो चेक देते हैं तो मना करना मजबूरी है। अगर सरकार जल्द छोटे नोटों को मार्केट में उपलब्ध करवाता है तो जरूर कारोबारियों को थोड़ा राहत मिलेगी
- सुमित गुप्ता, दुकानदार, रायमार्केट

इलेक्ट्रानिक बाजार तो काफी प्रभावित हुआ है, ग्राहक केवल पुरानी करेंसी के बड़े नोट या फिर चेक लेकर पहुंचता है। ऐसे में दोनों लेना ही दुकानदार के लिए आफत है। जिन दुकानों पर स्वैपिंग मशीन है वह थोड़ा कारोबार कर रहे हैं। लेकिन बिना मशीन के तो कारोबार ठप होने के कारण दुकान का खर्च तक भी निकालना मुश्किल होता जा रहा है। अगर ये ही हालत रहे तो स्थिति काफी बिगड़ जाएगी।
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- सरबजीत, दुकानदार, रायमार्केट
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