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पानी पर रार, डिप्टी कमांडर ने ठुकराया पार्षदों का प्रस्ताव

Wed, 21 Dec 2016 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
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राोष्ाष
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अंबाला कैंटोनमेंट।  कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला (सीबीए) की सदन की बैठक में आर्मी अफसरों, सीबीए अफसरों और वार्ड के पार्षदों में तनातनी का माहौल बना रहा। पार्षदों ने जहां अफसरों पर विकास कार्य करवाने में भेदभाव बरतने का आरोप लगाया, तो वहीं अफसरों ने इसे सिरे से नकारते हुए साफ कहा कि सीबीए कोई भी काम बोर्ड एक्ट के दायरे से बाहर जाकर नहीं किया जाएगा। अफसरों के अनुसार पार्षदगण बिना वजह का दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हर काम बोर्ड एक्ट के दायरे में रहकर ही होगा।
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सदन की बैठक की शुरुआत सीबीए के कर अधीक्षक नरेश शर्मा के पिता गंगाराम शर्मा के निधन पर उन्हे श्रद्धांजलि देने से हुई। उसके बाद पार्षदों ने रोष जाहिर किया कि हर महीने होने वाली बैठक  तीन महीने बाद क्यों हो रही है? इस बारे में भी सीबीए और सैन्य अफसर बताएं? उसके बाद सभी पार्षदों ने अपनी-अपनी समस्याएं अफसरों के समक्ष रखी और तुरंत समाधान की मांग की। इस अवसर पर सभी पार्षदों समेत ब्रिगेडियर नवदीप सिंह सेठी, मेजर एनएल ओडियो, कर्नल जीएस पुरी, कर्नल जेजे राजगुरु समेत सुभाष चावला, नरेश शर्मा, सतीश गुप्ता, स्वीटी आदि अन्य अफसर मौजूद रहे।
इस बात हुआ अफसरों, पार्षदों में टकराव
सदन की कार्रवाई शुरू होते ही वाइस प्रेजीडेंट सुरेंद्र तिवारी, पार्षद अजय बवेजा, राजू बाली, लक्ष्मी देवी, आशिमा, नीलम शर्मा व गरीब दास ने अफसरों के समक्ष मुद्दा रखते हुए तोपखाना परेड, हिम्मतपुरा, शिवला व दूधला मंडी और पीएंडटी कालोनी में पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की।  लेकिन बोर्ड के प्रेजीडेंट एवं डिप्टी आर्मी कमांडर ब्रिगेडियर विजय सहगल और सीईओ वरुण कालिया ने फिलहाल पार्षदों के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
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उन्होंने पार्षदों ने समझाया कि मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस की ओर से अभी इन इलाकों में स्टे लगा हुआ है। उनके  अनुसार यह रिहायशी इलाके अभी जमीन हस्तांतरण मामले में रक्षा मंत्रालय में विचाराधीन है। साथ ही  यहां कई लोग भी अवैध अतिक्रमण व अवैध कब्जों में लगातार लगे रहते हैं। इसलिए यहां अभी यहां रिहायशी इलाकों के लिए नई विकास योजनाएं नहीं बनाई जा सकती। इसलिए यहां पानी के लिए कोई ट्यूबवेल भी नहीं लगाया जा सकता।
इस पर उक्त पार्षदों ने कहा कि रक्षा मंत्रालय स्तर का मामला तो चलता रहेगा, लेकिन कम से कम सीबीए इन लोगों को बुनियादी सुविधाएं खासकर पानी तो मुहैय्या करवा सकता है, क्योंकि ये रिहायशी इलाके सैन्य क्षेत्र में 1857 से पहले के बसें हैं और अंग्रेजों ने अपनी सहूलियतों के लिए इन्हें यहां बसाया था।
इस पर डिप्टी कमांडर ने कहा कि न तो अफसर केंद्र  सरकार हैं और न ही राज्य सरकार, वे तो सिर्फ बोर्ड एक्ट को ही मानेंगे और इसके मुताबिक अभी इन इलाकों में कोई  नई विकास योजनाएं नहीं बनाई जा सकती। इसी बात पर पार्षद ज्यादा उखड़ गए। इस पर सीनियर पार्षद एवं पूर्व वाइस प्रेजिडेंट वीरेंद्र गांधी ने सीबीए सीईओ वरुण कालिया से पूछा कि उनसे पहले भी सीईओ थे, तब भी इन इलाकों में विकास हुआ है, तो मौजूदा सीईओ बताएं कि पहले इन इलाकों में विकास योजनाएं कैसे बनी? इस पर सीईओ वरूण कालिया ने कहा कि उनसे पहले रहे सीईओ ने यदि इन इलाकों में विकास करवाया है तो उन्होंने अपनी रिस्क पर करवाया है, लेकिन वे सिर्फ बोर्ड एक्ट का ही अनुसरण कर काम करेंगे? सीबीए अफसर किसी के दबाव में काम नहीं करेंगे।
इसी विवाद में पार्षदों ने जब आर्मी के डिप्टी कमांडर से मानवता के आधार पर रिहायशी इलाकों में पानी देने को कहा तो डिप्टी कमांडर बिग्रेडियर विजय सहगल ने साफ कहा कि फौज हमेशा अपने देशवासियों के लिए होती है, इस मामले में भी फौज लोगों की समस्याओं से पूरी इत्तेफाक रखती है, लेकिन यहां कई ऐसे मामले सामने आएं हैं, जिसमें लोगों ने फौज की भावनाओं का गलत इस्तेमाल किया है।
लोग फौज के मना करने पर भी धड़ल्ले से बिना अनुमति अतिक्रमण और अवैध निर्माण किए जा रहे हैं, इतना ही जबरदस्त मना करने पर भी एक मंदिर तक बना दिया गया। यदि स्टाफ रोकता है, तो उनके साथ भी नोकझोंक की जाती है। इसलिए अब फौज एक्ट से बाहर कोई काम नहीं करेगी।
पंजोखरा रोड पर भी पार्षदों, अफसरों में ठनी
पार्षदों ने सदन में करीबन एक साल से अधर में लटकी पंजोखरा रोड के निर्माण का मुद्दा उठाया। ये रोड दो विभागों सेना और पीडब्यूडी बीएंडआर के हिस्से में आती है। पार्षदों ने कहा कि पीडब्यूडी ने तो अपने हिस्से की सड़क बना दी, लेकिन सेना अपने हिस्से की सड़क नहीं बना  रही है, इसलिए यहां लोगों को बहुत ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। पार्षदों ने कहा कि यहां से हजारों लोग ऐतिहासिक गुरुद्वारा पंजोखरा साहब दर्शनों के लिए जाते हैं, लेकिन अब सड़क इतनी ज्यादा खराब है कि यहां से गुजरना मुश्किल है।
इस पर सैन्य अफसरों ने बताया कि अभी फंड की कमी चल रही है, पर्याप्त फंड आने पर वे सड़क निर्माण करवाएंगे। इस पर पार्षदों ने सैन्य अफसरों को ऑफर देते हुए यदि सैन्य अफसर अनुमति दें तो पार्षदगण पीडब्ल्यूडी विभाग के अफसरों से आग्रह करके उनके विभाग से ही  जनहित में इस सड़क का सैन्य क्षेत्र वाला हिस्सा भी बनवा सकते हैं। लेकिन सैन्य अफसरों ने पार्षदों के इस ऑफर को भी ठुकरा दिया। अफसरों ने कहा कि सेना अपने फंड से ही ये काम करवाएगी।

दशहरा आयोजन पर भी हुआ विरोध

सैन्य अफसरों ने पार्षदों से आग्रह किया कि इस बार तो पार्षदों ने सैन्य क्षेत्र में दशहरा मेले का आयोजन कर इतनी भारी भीड़ जुटा ली थी। लेकिन आगे से पार्षदगण वहीं दशहरा मनाएं जहां पहले दशहरा मनता था। उनके अनुसार सैन्य क्षेत्र में कई तरह के सिक्योरिटी इनपुट ऐसे होते है, जिनके तहत इस तरह के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले मेले सैन्य क्षेत्र में लगाना ठीक नहीं होता। लेकिन सैन्य अफसरों की इस बात पर पार्षद भड़क गए, उन्होंने कहा कि सेना इस तरह के आयोजनों पर बंदिशें न लगाएं। विरोध बढ़ता देख इस मामले को आगे बैठक में विचार करने की बात कहकर टाल दिया गया।

डिप्टी कमांडर से मिले लोग, मिला आश्वासन
पानी उपलब्ध करवाने के मसले पर सदन की बैठक खत्म होने के बाद वार्ड नंबर सात के पार्षद गरीब दास कई इलाकावासियों को लेकर सीबीए कार्यालय पहुंच गए। डिप्टी कमांडर ने सभी लोगों से बातचीत की और उन्हे समझाया कि अफसरगण उनका मसला फिर से रक्षा मंत्रालय में रखेंगे और उन्हें उम्मीद है कि रक्षा मंत्रालय इस मसले में उन्हे गाइडलाइंस देगी। इसके बाद उन्हें जल्द पानी मिल सकेगा। अफसर के आश्वासन के बाद इलाकावासी व पार्षद लौट गए।

पार्षदों से कोई टकराव नहीं है, पार्षद बात को समझें। अफसर एक्ट से बाहर काम नहीं कर सकते हैं। रक्षा मंत्रालय ने जमीन हस्तांतरण मसले पर अभी स्टे किया हुआ है। इसलिए ये स्पष्ट नहीं है कि संबंधित इलाके में क्या सुविधाएं देनी है या नहीं? इसलिए बोर्ड की ओर से सिर्फ लोगों के हित के लिए एक खास प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा और उनसे इस इलाके में रहने वाले लोगों की सुविधाओं के बारे में गाइडलाइंस ली जाएगी। हमें उम्मीद है कि लोगों को जरूरी सुविधाएं मिलेंगी।
-ब्रिगेडियर विजय सहगल, डिप्टी आर्मी कमांडर एवं बोर्ड प्रेजिडेंट
पहले क्या हुआ, इन इलाकों को कैसे सुविधाएं दी गई, ये हम नहीं जानते, लेकिन यदि पहले गलत हुआ, तो मौजूदा अफसर भी गलती दोहराएं, ये ठीक नहीं। वे लोग रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजेंगे। वहां से गाइडलाइंस आते ही उसी की मुताबिक काम किया जाएगा।
-वरुण कालिया, चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर, सीबीए

राष्ट्रगान पर भी हुई अफसरों, पार्षदों में बहस
सीबीए सदन में मंगलवार को राष्ट्रगान पर भी अफसर और पार्षद में ठन गई। दरअसल, पार्षद अजय बवेजा ने सदन में आग्रह किया कि आगे से सदन की कार्रवाई की शुरुआत राष्ट्रगान से हो। लेकिन तभी डिप्टी आर्मी कमांडर ने उन्हें टोकते हुए कहा कि इस तरह की प्रथा का तब तक कोई फायदा नहीं है, जब तक हमारे दिलोदिमाग में राष्ट्रप्रेम न हो।
विजय सहगल ने कहा कि सीबीए क्षेत्र में अवैध कब्जे, अतिक्रमण व निर्माण हो रहे हैं, कई तरह की गलत गतिविधियां हो रही हैं। सभी पार्षदगण एक जिम्मेवार जनप्रतिनिधि के नाते इन्हें बंद करवाएं। भले इसके लिए आर्मी की भी मदद ली जाए, तभी राष्ट्रगान की सही मायनों को हम सदन समेत कई भी चरितार्थ कर सकते हैं। उनके अनुसार राष्ट्रगान को सिर्फ एक प्रथा न बनाएं, बल्कि राष्ट्रप्रेम का प्रतीक बनाएं।  उसके बाद उन्होंने सदन की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए और सदन में 46 एजेंडों को पास किया गया, लेकिन आर्मी डिप्टी कमांडर की इस बात पर पार्षद अजय बवेजा ने कहा कि ये राष्ट्रगान का अपमान है। उन्होंने कहा कि कोई  पार्षद इलाके में गलत गतिविधियां नहीं चलाता है, इसलिए राष्ट्रगान को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना गलत है और वे इस बात की शिकायत रक्षा मंत्रालय में करेंगे।
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