दलित युवती से गैंगरेप के जुर्म में दो अभियुक्तों को अदालत ने 15-15 साल की सश्रम कैद व 21-21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसमें 20 हजार रुपये पीड़िता को मिलेंगे। मुकदमे का फैसला 15 साल बाद हुआ।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक नरैनी कोतवाली क्षेत्र के गांव निवासी पीड़िता के पति ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 10 नवंबर 2001 को उसकी पत्नी गांव की एक अन्य महिला के साथ शौच को गई थी। रास्ते में लहुरेटा गांव के ओम प्रकाश तिवारी पुत्र जगदीश व राजकरन तिवारी पुत्र तिलक तिवारी ने उसकी पत्नी को पकड़ लिया और मवेशी बाड़े ले जाकर दुराचार किया। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए बताने पर जान से मारने की धमकी दी। विवेचना के बाद पुलिस ने अदालत में दोनों आरोपियों के विरुद्ध धारा 376, 506 और एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) डीपीएन सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने पांच गवाह पेश किए। मंगलवार को न्यायाधीश ने दोनों अभियुक्तों को धारा 376 में 15-15 साल का सश्रम कारावास व 15-15 हजार रुपये जुर्माना किया। अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। एससीएसटी एक्ट में पांच-पांच साल की सश्रम कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माना और धारा 506 में एक-एक साल की सश्रम कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर सात माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।