अंबाला कैंट। विद्यार्थियों को जंक फूड से बचाने के आदेश हवा हो गए लगते हैं। स्कूलों के आसपास जंक फूड व गंदे खाद्य पदार्थ बेचने वालों का जमावड़ा लगता रहता है। विद्यार्थियों की सेहत पर भी खतरा मंडरा रहा है, जबकि मानसून सीजन में यह खतरा और बढ़ रहा है। इस मामले में शिक्षा विभाग की कार्रवाई पूरी तरह से सवालों के घेरे में है।
यह हैं हालात
जिला के अधिकतर स्कूलों के बाहर स्कूल की छुट्टी के दौरान जंक फूड रेहड़ियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। जैसे ही बच्चे क्लासों से बाहर आते हैं, सीधे रेहड़ियों पर पहुंच जाते हैं और यह खाद्य पदार्थ खरीदकर खाते हैं। कई स्कूलों में कैंटीन की सुविधा है, लेकिन इसके बावजूद स्कूलों के आसपास ऐसी रेहड़ियों का जमावड़ा कम नहीं हो रहा है। उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए थे कि बच्चों की सेहत को देखते हुए स्कूलों के आसपास जंक फूड व गंदे खाद्य पदार्थ बेचने वाली रेहड़ियों को खड़ा नहीं होने दिया जाए। यदि ऐसा होता है कि इसके लिए स्कूल प्रिंसिपल को जिम्मेदार माना जाएगा।
मानसून सीजन में बीमारी का खतरा
मानसून सीजन में ऐसी रेहड़ियों से खाने का सामान खरीदना महंगा साबित हो सकता है। डॉ. संजीव कौशिक का कहना है कि जंक फूड जिस तरह से बनाया जाता है, उससे मानसून सीजन में बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। वैसे भी जंक फूड बच्चों के लिए ठीक नहीं है। गंदे खाद्य पदार्थ खाने से डायरिया, फूड प्वाइजनिंग, जलन आदि परेशानियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में आम जनता सहित विद्यार्थियों को भी ऐसी रेहड़ियों से खाने पीने का सामान नहीं लेना चाहिए, ताकि बीमार होने का खतरा न रहे। इन
जनता का सवाल, क्यों नहीं होती कार्रवाई
कैंट के रहने वाले कर्ण कुमार, जसबीर सिंह, अरुण शर्मा, युवराज वालिया, हरजीत सिंह, गुरपाल सिंह, कपिल बजाज का कहना है कि स्कूलों के आसपास ऐसी रेहड़ियों को खड़ा ही नहीं होने देना चाहिए। शिक्षा विभाग निर्देश तो जारी करता है, लेकिन इस पर अमल सख्ती से किया जाना चाहिए। एक ओर बच्चों की सेहत के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाता है, लेकिन दूसरी ओर इस तरह के गंदे खाद्य पदार्थ लगातार स्कूलों के आसपास ही बिक रहे हैं।
स्कूलों के आसपास खड़ी होने वाली रेहड़ियों को हटाया जाएगा। इस बारे में प्रिंसिपल व विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए जाएंगे। बच्चों की सेहत को लेकर विभाग संजीदा है और जल्द ही इस मामले में कार्रवाई होगी।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला