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मिलीभगत का खेल, गैस वैल्डिंग से काटते थे मशीनें

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एमसीए कार्यालय से स्क्रैप के साथ-साथ वर्केबल मशीनों, इंजनों, मोटरों व अन्य सामान को भी स्क्रैप बनाने का खेल पिछले पंद्रह दिनों से बैखौफ चल रहा था। ऐसा नहीं था कि एमसीए के अन्य कर्मचारियों व निचले अफसरों को इस बात की भनक नहीं थी। कर्मचारियों और निचले अफसरों को इसकी पूरी भनक थी, लेकिन फिर भी इसे नजरअंदाज रखा गया और ये खेल बैखौफ जारी रहा।
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 मशीनों को छोटे टुकड़ों में बनाया जाता था स्क्रैप
स्क्रैप घोटाले के इस खेल में वर्केबल मशीनों को भी स्क्रैप बनाने का काम गैस वैल्डिंग से होता था। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले पंद्रह दिनों से एमसीए कार्यालय में गैस वैल्डिंग के जरिए वर्केबल मशीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जा रहा था, ताकि वर्केबल मशीनों के इन हिस्सों को स्क्रैप के साथ ही मिक्स कर ट्रक में भरकर एमसीए कार्यालय से गायब की जा सके। ये खेल बदस्तूर जारी था और इस घोटाले में लिप्त निचले अफसर और कर्मचारी इससे जानबूझकर अनभिज्ञता जताए हुए थे। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस घपलेबाजी के चलते पहले भी कई बार इसी तरह वर्केबल मशीनों को गैस वैल्डिंग से काट-काट छोटे हिस्सों में गायब किया जा चुका है और वीरवार को भी लाखों का माल गायब होते पकड़ा गया।
 उधर, एमसीए में विजिलेंस की रेड फेल
इसी घटना के दौरान म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला में रेड करने पहुंची विजिलेंस की टीम की रेड भी फेल हो गई। रेड फेल होने के बाद विजिलेंस के एसपी अशोक कुमार व अन्य कर्मचारी स्क्रैप घोटाले की घटनास्थल पर पहुंच गए और घोटाले के केस को खंगालने लगे। लेकिन मामला सिविल पुलिस का थी, इसलिए घोटाले मामले की जानकारी लेकर एसपी विजिलेंस व उनकी टीम रवाना हो गई। जानकारी के अनुसार विजिलेंस एमसीए कार्यालय में एक स्पेशल रेड करने आई थी। दरअसल, विजिलेंस को शिकायत थी कि एमसीए के जन्म मृत्यु शाखा में कर्मचारी  एक बच्चे की जन्म तिथि बदलने के लिए रिश्वत की मांग कर रहे हैं और मामला भी सैट हो गया था। अब वीरवार को कर्मचारियों ने शिकायतकर्ता से रिश्वत लेनी थी और उधर विजिलेंस ने रेड कर उन्हें धर दबोचना था। लेकिन इस दौरान अचानक स्क्रैप घोटाले का परदाफाश हो गया, जिससे हड़कंप मच गया और जन्म मृत्यु ब्रांच के कर्मचारी भी घबराकर रिश्वत से परे हो गए। इसी वजह से वहां पहुंची विजिलेंस की रेड भी फेल हो गई।
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