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कई बैंकों में नोट एक्सचेंज बंद, सिर्फ जमा और निकासी तक सीमित

Wed, 16 Nov 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
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बैंक
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अंबाला कैंट।
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नोटबंदी के सातवें दिन भी अंबाला की जनता बैंकों और एटीएम के बाहर लाइनों में लगी रही। कहीं बैंकों ने गेट बंद कर एक-एक उपभोक्ता को बैंक में भेजा, जबकि एटीएम के बाहर भी लोगों में रुपये निकलवाने की होड़ लगी रही। सातवें दिन भी बैंक के सुरक्षा कर्मियों को इन लोगों को कंट्रोल करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कईं बैंकों में तो नोट एक्सचेंज बंद ही कर दिया गया, जबकि कहीं पर कुछ ही घंटों में कैश भी खत्म हो गया। लोगों के लिए कैश हासिल करना अभी आसान नहीं हुआ है।
पहले लाइन में फिर बैंक में बढ़ रही परेशानी
लोग सुबह ही बैंक खुलने से पहले लाइनों में लग रहे हैं। बैंक कर्मी भी बैंक का एंट्री गेट बंद कर कुछ लोगों को ही भीतर भेज रहे हैं ताकि बैंक में स्थिति न बिगड़े। ऐसे ही हालात बैंकों के एटीएम पर है, जहां एक-एक कर उपभोक्ता को भेजना काफी मुश्किल हो रहा है। दिन में कईं बार बैंक कर्मियों से उपभोक्ताओं की बहसबाजी हो चुकी है। लोगों का सब्र भी अब टूटने लगा है, जबकि बैंक सिर्फ डिपोजिट और दोपहर बाद नकद निकासी के लिए कहने लगे हैं।
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लाइन में घंटों बाद नंबर आया तो नगदी खत्म
500 और 1000 रुपये के नोटों की नोटबंदी के सातवें दिन भी नोटों को बदलवाने व जमा कराने वाले लोगों की बैंक खुलने से पहले ही लंबी लाइनें लग गई। जैसे ही बैंक खुले तो लोगों ने राहत की सांस ली और लाइनों में लग गए। लेकिन दोपहर होते ही अधिकतर बैंकों में कैश खत्म हो गया और जैसे ही लोग घंटों लाइनों में लगकर काउंटर पर पहुंचे तो नगदी समाप्त की बात कहकर वापिस भेज दिया गया। इससे लोगों ने बैंक के खिलाफ भी रोष प्रकट किया। इसी को लेकर बैंक कर्मचारियों से बातचीत भी की, लेकिन कोई हल न निकलने पर लोग वापस अपने घरों को लौट गए।
बैंकों के बाहर भीड़ के सामने पुलिस बेबस
मंगलवार को कई बैंकों में पैसों को लेकर पहले ही अपेक्षा अधिक भीड़ रही। इस बीच लाइनों में लगी महिलाओं व उम्रदराजों में मामूली सी कहासूनी को लेकर झड़प भी होती दिखाई दी। लेकिन बैंकों के बाहर जमा पुलिस ऐसे मामलों में पूरी तरह से बेबस दिखी और आनन-फानन में ऐसे मामलों को केवल शांत कर रही थी। कुछ देर व्यवस्थाएं संभालने के बाद इन कर्मचारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए।
एटीएम से भी नहीं मिल रही राहत
नोटबंदी के बाद जनता का सबसे बड़ा सहारा एटीएम हैं, लेकिन यह भी उपभोक्ताओं को पूरी तरह से राहत नहीं दे पा रहे हैं। कुछ ही घंटों में एटीएम का कैश खत्म हो रहा है, जबकि कईं तो बंद ही पड़े हैं। आलम यह है कि ज्यादातर एटीएम सुबह से ही खाली रहे, जबकि जो खुले उनमें भी कुछ समय के बाद लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। एटीएम में दोबारा पैसे डालने की जहमत नहीं उठाई गई, जिसके चलते लोग भी पूरा दिन एटीएम के आसपास ही भटकते रहे।
नई करंसी के दीदार को तरसी जनता
बैंकों में लेनदेन को लेकर जनता को पूरा एक सप्ताह बीत चुका है। परंतु अभी तक अधिकतर जनता नई करंसी के दीदार को भी तरस गई है। ज्यादातर बैंकों में केवल 100, 10 व 20 के नोट ही दिए जा रहे हैं और एटीएम में भी नई करंसी नहीं भेजी जा रही है। केवल बैंक प्रबंधक छोटे नोटों का ही लेनदेन कर रहे हैं। वहीं बैंक के बाहर मौजूद दीपक ठाकुर, नवीन, अनुज, बलजिंद्र, देवेंद्र ने बताया कि अभी तक केवल दोस्तों के हाथ में ही नई करंसी को देखा है, बैंकों में अभी तक ये करंसी पूरी तरह से नहीं बांटी जा रही है। केवल अपने चहेतों को ही ये राशि दी जा रही है।
करंसी बदलने में भी खेल
पुरानी करंसी बदलने में भी लोग अब जुगाड़ चला रहे हैं। दुकानदार अथवा अन्य, जिनके पास वर्कर काम करते हैं, उनको चार-चार हजार रुपये देकर करंसी बदलने के लिए लाइनों में लगाया जा रहा है। इसके बदले उनको 100 से 200 रुपये भी दिए जा रहे हैं। यही कारण है कि बैंकों के बाहर लाइनें लंबी हो रही हैं। कईं तो रोजाना ही अलग-अलग बैंकों में अपने वर्करों को भेज रहे हैं, ताकि घरों में पड़ी करंसी को बदला जा सके।
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दो-दो महीने की एडवांस सैलरी भी बांट दी
नोटबंदी के बाद कई कारोबारियों ने अपने वर्करों को दो-दो महीने की एडवांस सैलरी भी बांट दी है। अब इनके वर्कर भी दो महीने की सैलरी तो ले चुके हैं, लेकिन इनको बदलने के लिए अपने परिवार के सदस्यों को रोजाना ही बैंक भेज रहे हैं। कुछ ने तो नकदी डिपोजिट करवा दी है, जबकि जरूरत के हिसाब से अब हर दूसरे और तीसरे दिन बैंकों में लाइन लगाकर नगदी निकलवा रहे हैं।
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