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सांडों की लड़ाई में टूटे वाहन एवं घरों की खिड़कियां, हजारों का नुकसान

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दो दिन पहले सांड़ की चपेट में आने से गई थी बुजुर्ग की जान, अब जंडली में सांड़ों की लड़ाई में क्षतिग्रस्त हुए वाहन और घरों की खिड़कियां
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फोटो नंबर : 13, 14 व 15
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सबहेड : लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए निगम नहीं कर रहा कार्रवाई, यूटीलिटी कोर्ट में भी सुनवाई के दौरान स्टाफ ने मांगा और समय
-सभी ने डंडों, ईंटों आदि से हमलाकर सांड़ों को भागने का किया प्रयास
-आए दिन किसी न किसी क्षेत्र में सांड़ों के उत्पात मचाने की आती है सूचना
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। अंबाला की सड़कों पर लावारिस पशुओं की भरमार है। सोमवार सुबह जंडली स्थित राजकीय स्कूल के पास दो सांड़ आपस में लड़ पड़े। गलियों में वह काफी देर तक लड़ते रहे। इस कारण कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि कुछ घरों की खिड़कियां टूट गईं। लोगों ने आनन-फानन में मौके से भाग कर अपनी जान बचाई। घबराए कई लोग तो घरों में दुबक गए। हिम्मत करके कुछ युवा और लोग बाहर निकले। सभी ने डंडों, ईंटों आदि से हमला कर सांड़ों को भागने का प्रयास किया। आधे घंटे तक यह तमाशा जंडली में चलता रहा। बामुश्किल सांड़ों को दूर तक खदेड़ा गया। स्थानीय लोगों ने इसके लिए निगम कार्यप्रणाली को दोषी ठहराया है और नुकसान की भरपाई की मांग की है। बता दें कि गांव जंडली में रविवार को ही लावारिस पशु के हमले से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है, जबकि इससे पहले भी नग्गल क्षेत्र में एक 15 वर्षीय युवती की मौत लावारिस पशुओं की चपेट में आने से ही हुई थी। लगातार हादसों के बावजूद न ही प्रशासन और न ही निगम कोई सकारात्मक कार्रवाई कर रहा है।
भागकर बचाई लोगों ने जान
जंडली क्षेत्र में सोमवार सुबह सरकारी स्कूल के साथ वाली गली में दो सांड़ों ने जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान सांड़ों ने वहां खड़ी बाइकों और स्कूटरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके अलावा मकानों की खिड़की तोड़ दी, इतना ही नहीं सांड़ों की टक्कर से एक लोहे का गेट भी टूट गया। जिस समय सांड़ लड़ रहे थे तो यहां से गुजर रहीं महिलाओं व बच्चों ने घरों में दुबक कर अपनी जान बचाई। स्थानीय निवासी स्वर्णजीत कौर, कुलदीप कौर, पूनम देवी, सुमित्रा, शाम यादव, आशीष, याचना, कमला देवी व रोहित आदि ने बताया कि उनके क्षेत्र में सांड़ घूमते रहते हैं और नगर निगम इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया जाए।
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अब तक हो चुके ये प्रमुख हादसे
-26 जनवरी को शहर के निकटवर्ती गांव जलबेड़ा में लावारिस सांड़ ने एक 66 वर्षीय बुजुर्ग काका सिंह को अपनी चपेट में ले लिया था। इस हादसे में काका सिंह ने रविवार दम तोड़ दिया था।
-वहीं कुछ माह पूर्व नग्गल क्षेत्र के गांव में 15 साल की बच्ची पर सांड़ ने हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
-गांव मलौर निवासी प्रदीप लावारिस पशु की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हो गए थे।
-जीटी रोड पर बाइक सवार युवक सड़क पर गाय आने के कारण हादसे का शिकार हो गया था और उसकी मौत हो गई थी।
-कैथ माजरी निवासी एक महिला कुछ दिन पूर्व अपने पोते को ट्यूशन छोड़ने जा रही थी जब सांड़ ने उन्हें टक्कर मार दी थी। इसके कुछ दिन बाद महिला ने दम तोड़ दिया था।

वकीलों ने भी कोर्ट में प्रस्तुत किया था ब्योरा
उधर, बीते पांच वर्षों में 85 से अधिक हादसे जिले में लावारिस पशुओं की वजह से हुए हैं। यह रिकॉर्ड यूटीलिटी कोर्ट में वकीलों द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है।

यूटीलिटी कोर्ट में हुई सुनवाई
दूसरी ओर सोमवार को यूटीलिटी कोर्ट में लावारिस पशुओं के मामले को लेकर सुनवाई हुई। इस मामले में नगर निगम की ओर से सेनेटरी इंस्पेक्टर फूल कुमार कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से कार्रवाई करने के लिए और समय की मांग की। उन्होंने कहा कि निगम क्षेत्र को लावारिस पशु मुक्त बनाने के लिए अभी निगम को कुछ और समय चाहिए। मामले को लेकर अब अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी। बता दें कि कोर्ट में एडवोकेट रोहित जैन, नरिंद्र सिंह, राजेश शर्मा, सुधीर सहगल, खुशीराम, विजय धीमान, दविंद्र शर्मा, हरिंद्रमान, शुभम व अन्य ने यूटीलिटी कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिसपर अभी सुनवाई चल रही है। पूर्व में भी सुनवाई के दौरान निगम द्वारा अपना पक्ष रखा गया था जिसपर याचिकर्ता संतुष्ट नहीं थे।

दो कारणों से स्थिति भयावह
-लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए निगम अब तक टेंडर ही अलॉट नहीं कर सका है। करीब आधा दर्जन से अधिक बार निगम टेंडर कॉल कर चुका है, मगर कोई भी ठेकेदार इसमें रुचि नहीं दिखा रहा है। निगम के पास अपना स्टाफ पर्याप्त नहीं है जिससे वह पशुओं को पकड़ने का अभियान चला सकें।
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-ग्वालों पर निगम का कोई नियंत्रण नहीं है। वह पशुओं को छोड़ देते हैं, जो गंदगी फैलाने के साथ-साथ हादसों को न्योता देते हैं। डेयरियां भी अंबाला से बाहर करने की योजना थी। यदि डेयरियां शहर से बाहर होतीं तो कुछ सुधार होता। मगर, यह योजना भी अधर में अटकी पड़ी है।
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