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गैर इरादतन हत्या में शव की नहीं हुई शिनाख्त, कोर्ट से हत्यारे को सात साल कैद

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रेलवे स्टेशन के माल गोदाम के पास इसी वर्ष अप्रैल माह में गैर इरादतन हत्या (आइपीसी 304-पार्ट टू) के मामले में अभी तक शव की शिनाख्त भी नहीं हुई है। लेकिन अदालत ने उप्र के जिला गौंडा, गांव मानकपुर वासी दोषी विक्रम को सात साल कैद की सजा सुना दी। दोषी द्वारा गुनाह कबूलने, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व घटना के कारणों को आधार बनाकर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीन गुप्ता की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। जीआरपी, छावनी थाने में एएसआई विलायती राम के बयानों पर अज्ञात पर हत्या की धारा 302 में केस दर्ज किया गया था जोकि बाद में आरोपी की पहचान व तफ्तीश के बाद अनचाही हत्या की धारा में तबदील हो गया था। मामले में करीब एक दर्जन लोगों ने गवाही दी। इनमें मौके के गवाह, पुलिस, डाक्टर व अन्य शामिल हैं।
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शराब पीने को लेकर हुआ था झगड़ा
शराब पीने को लेकर हुए झगड़े में दोषी ने मृतक को चोट पहुंचाने की नीयत से उसके सिर व चेहरे पर कई वार किए थे। इन्हीं चोटों की वजह से उसने दम तोड़ दिया था। जानकारी के अनुसार मंगलवार आरोपी को दोषी करार देने के बाद सजा अवधि के लिए बुधवार की तारीख रखी गई थी। सुबह उसे कोर्ट रूम में बने बक्शीखाने में रखा गया था। दोपहर बाद अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद सजा सार्वजनिक की गई।
यह हुई थी घटना
17 अप्रैल को यात्रियों से शहर माल गोदाम के पास शव होने की सूचना पाकर जीआरपी मौके पर पहुंची। मृतक के सिर व चेहरे पर चोट के निशान थे। पहचान के लिए शव सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया लेकिन पहचान नहीं हुई। डाक्टरों के पैनल द्वारा कराए गए पोस्टमार्टम से पता चला कि मौत का कारण चोटें बनी। अज्ञात पर हत्या का केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी गई। जीआरपी छावनी थाना इंचार्ज राम बचन के अनुसार मृतक की पैंट की जेब से शराब का पव्वा मिला। पूछताछ में पता चला कि वह रोजाना यहां बैठकर शराब पीता था। कुछ दिन पूर्व उसका लंबे बालों वाले विक्रम से झगड़ा हुआ था। दोषी घटनास्थल से कुछ दूरी पर बने एक रेलवे के खंडहरनुमा क्वाटर में रहता था। हिरासत में लेकर की गई पूछताछ में दोषी ने माना कि उसने मृतक को यहां शराब पीने से मना किया था लेकिन उसने नहीं मानी। उसे चोट पहुंचाने की नीयत से उसने पत्थर से उसे चोट पहुंचाई थी।
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नहीं हुई शव की शिनाख्त
थाना प्रभारी रामबचन के मुताबिक मृतक के फोटो सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों पर लगाने के अलावा एनसीआर में भी भेजे गए जहां पर देश भर में मिलने वाले अज्ञात शवों का रिकार्ड होता है लेकिन आज तक पहचान सार्वजनिक नहीं हुई।
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