- दो मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार, बोले- नाम से दर्ज की जाए प्राथमिकी, रात को धरनारत लोगों को फिर मनाने पहुंचे एसपी मगर नहीं माने
- कैबिनेट मंत्री के सामने भी हुआ हंगामा, विज बोले- एक-एक को नहीं छोडूंगा
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। धूलकोट में रविवार को तीन मंजिला गोदाम की निर्माणाधीन इमारत गिरने से छह श्रमिकों की माैत और 12 घायल होने का मामला सोमवार को उग्र रूप में बदल गया। सिटी के नागरिक अस्पताल में दो मृतकों के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। गरनाल गांव के ग्रामीण और मृतकों के परिजन आरोपियों के नाम से प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए।
इसको लेकर अस्पताल में 9 घंटे से भी अधिक समय तक हंगामा हुआ। पहले सुबह 11:30 बजे कैबिनेट मंत्री अनिल विज जब मरीजों को देखने पहुंचे तो उनके सामने भी परिजनों ने कार्रवाई न होने की बात कहते हुए हंगामा कर दिया। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल के भवन के आगे धरना दिया। इस धरने को पूर्व मंत्री विनोद शर्मा ने आकर समर्थन दे दिया। शाम पांच बजे एसपी ने मामले में एसआईटी के गठन की जानकारी दी और कार्रवाई का आश्वासन दिया फिर भी परिजन गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे और शव नहीं उठाया। वहीं देर रात एसपी धरनारत लोगों को फिर मनाने के लिए माैके पर पहुंचे लेकिन वह नहीं माने।
परिजनाें का आरोप- पुलिस ने आरोपियों को बचाने का किया प्रयास
इस घटना में छह लोगों की मौत हुई थी। जिनमें से चार के परिजन पोस्टमार्टम कराने के बाद शव ले गए। मगर सुबह 9 बजे गरनाला गांव निवासी मृतक लाल बहादुर शास्त्री की बेटी काजल व अन्य परिजनों ने पुलिसिया कार्रवाई पर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि बलदेव नगर पुलिस ने जींद के एक व्यक्ति के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर दी, जबकि उनके बयान पर प्राथमिकी दर्ज की जाए।
प्राथमिकी में जग्गी बिल्डर्स लिखा है, जबकि यह फर्म तो कई हो सकती हैं। इसमें मालिक का नाम होना चाहिए था। इसके अलावा पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की। काजल ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि पुलिस आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।
सांसद वरुण और विधायक निर्मल सिंह ने कार्रवाई की उठाई मांग
जब मृतक के परिजनों ने विरोध कर दिया तो सबसे पहले लोकसभा सांसद वरुण चौधरी और सिटी विधायक निर्मल सिंह घायलों व मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंचे। पूरी घटना की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस मामले में दोषी अधिकारियों व अन्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई सरकार को करनी चाहिए। उचित मुआवजा भी पीड़ितों व परिजनों को मिलना चाहिए।
हम लेबर आदमी हैं, हमारी सुनवाई नहीं हो रही, विज बाेले... मैं हूं न
कैबिनेट मंत्री अनिल विज दोपहर साढ़े 12 बजे जब घायलों के परिजनों से बात कर बाहर आए तो यहां पर मृतकों के परिजनों व घायलों के परिजनों ने उन्हें घेर लिया। मृतक कालिया के रिश्तेदार ने विज से कहा कि मंत्री जी, हम लेबर आदमी हैं, हमारी यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही। मंत्री ने कहा कि मैं हूं न, अब आ गया हूं कार्रवाई करवाऊंगा। रिश्तेदार ने फिर कहा कि कल से आया हुआ हूं, हर जगह परेशान किया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया अस्पताल प्रबंधन हमें जबरन रेफर करना चाहता है। अस्पताल में बिल्डर के लोग आ रहे थे, जो प्राइवेट में इलाज कराने का प्रलोभन दे रहे थे। यहां पर जग्गी को गिरफ्तार करो, मुर्दाबाद के भी लोगों ने नारे लगाए। मंत्री विज ने कहा कि एक को भी नहीं छोड़ेंगे। मुआवजा सभी को दिया जाएगा। विज के निर्देश के बाद शाम को एसआईटी का गठन हो गया।
पूर्व मंत्री ने मृतकों के परिजनों के साथ डाला डेरा
पूर्व मंत्री विनोद शर्मा अंबाला में लंबे समय बाद किसी बड़े घटनाक्रम में पहुंचे। वह अचानक से दोपहर डेढ़ बजे नागरिक अस्पताल पहुंच गए। यहां पर पीड़ितों से बात की। इसके बाद मृतक के परिजनों के साथ ही अस्पताल की दहलीज पर बैठ गए। पूर्व मंत्री ने एसएचओ बलदेव नगर कुलदीप सिंह से परिजनों के आरोपों पर जानकारी ली। इसके बाद एएसपी शिवम से काफी देर तक धरने पर ही बात चलती रही। इस दौरान उन्होंने मुआवजे की घोषणा भी की। वह तीन घंटे से भी अधिक समय तक मृतक के परिजनों के साथ रहे। जब मामला नहीं सुलझा तो एसपी अजीत सिंह शेखावत आए और उन्हें पूर्व मंत्री ने पूरी बात बताई। एसपी ने मृतक की बेटी काजल से लिखित बयान लिए और एफआईआर में शामिल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसआईटी जांच करेगी।
रात तक नहीं निकला समाधान
एसपी के आश्वासन के बाद भी मृतक लाल बहादुर के परिजन व ग्रामीण नहीं माने और गिरफ्तारी की अगली मांग पर अड़ गए। इसके बाद एसपी घायलों का हाल जानने निकल गए और परिजन व ग्रामीण पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।