फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुख्य संसदीय सचिव गुर्जर को समन

Fri, 20 Sep 2013 12:28 AM IST
अंबाला
विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला के नारायणगढ़ के युवक पंकज उर्फ सन्नी खन्ना आत्महत्या कांड में फंसे हरियाणा सरकार के  मुख्य संसदीय सचिव और नारायणगढ़ के विधायक रामकिशन गुर्जर की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
विज्ञापन


वीरवार को अंबाला के अतिरिक्त सेशन जज की अदालत ने विधायक को इस केस में बतौर दोषी समन जारी कर दिया है।कोर्ट ने विधायक गुर्जर को 21 अक्तूबर, 2013 को इस केस में पेश होने के आदेश दिए हैं।

अदालत में इस मामले को लेकर दोनाें पक्षों के वकीलों ने अपनी - अपनी दलीलें दीं। गुर्जर पक्ष के वकील ने कहा कि यह केस साजिश के तहत विधायक को फंसाने और उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश है। जबकि इस केस को सुप्रीम कोर्ट  भी ‘सेट ए साइड’ कर चुकी है।
विज्ञापन


उधर, पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को ‘सेट ए साइड’ इसलिए किया था, क्योंकि इस मामले में मृतक युवक के पिता, जो इस केस में शिकायतकर्ता थे, उनका भी निधन हो गया था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को कहा था कि फिर से विचाराधीन कर लें कि क्या इस केस में कोई साक्ष्य हैं और कोई दूसरा शिकायतकर्ता मौजूद है।

इसी के चलते पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत में इस केस से जुड़े तमाम प्रमाण अदालत के समक्ष रखे और पंकज खन्ना की बहन प्रीति खन्ना की ओर से फिर से शिकायत अदालत में लगाई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने वीरवार को इस मामले में गुर्जर की मुश्किलें बढ़ाते हुए इस केस में उन्हे बतौर दोषी सम्मन जारी कर 21 अक्तूबर 2013 को खुद अदालत में पेश होने के आदेश जारी कर दिए हैं।

यह है मामला
जून 2009 में एक युवक पंकज खन्ना पुत्र यशपाल खन्ना ने संदिग्ध परिस्थितियों में सल्फास का सेवन कर लिया था। पीजीआई, चंडीगढ़ में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

पंकज ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था। जिसमें उसने मुख्य संसदीय सचिव रामकिशन गुर्जर और उनके समर्थक विजय अग्रवाल उर्फ मैक्की व अजीत अग्रवाल को आत्महत्या की वजह बताया था। पीड़ित पक्ष के वकील अनिल कौशिक बताते हैं कि सुसाइड  नोट में पंकज ने बताया कि वह पहले गुज्जर का ही समर्थक था।

मगर बाद में उसके मामा बसपा में चले गए, तो वह भी उनके साथ शिफ्ट हो गया। इसी  बात को गुर्जर और उनके समर्थक उससे नाराज थे। वकील के अनुसार मृतक ने सुसाइड नोट में लिखा था कि गुज्जर के कहने पर अन्य आरोपियों ने उसे पीटा और उसे झूठे मामले में भी फंसाया। इतना ही नहीं जब वह पुलिस स्टेशन उनकी शिकायत करने गया तो पुलिस ने उसकी सुनवाई नहीं की और आरोपियों ने थाने में भी आकर उसे बुरी तरह पीटा।

पहले भी समन जारी कर चुकी है अदालत
वकील अनिल कौशिक ने बताया कि इस मामले एडिशनल सेशन जज की अदालत ने विधायक को इसी मामले में बतौर आरोपी समन कर चुकी है।

 मगर विधायक ने इस पर हाईकोर्ट में रिविजन डाल दी। मगर हाईकोर्ट से भी विधायक को राहत नहीं मिली और रिविजन खारिज हो गई। उसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन इसी दौरान शिकायतकर्ता पंकज के पिता यशपाल खन्ना की मृत्यु हो गई।

इसलिए शिकायतकर्ता के निधन की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा इसे विचाराधीन के लिए निचली अदालत में भेज दिया है। वकील के अनुसार इस मामले में अब पंकज की बहन प्रीति केस लड़ रही है और बतौर गवाह एएसआई यामीन व दो डाक्टर रमेश कुमार पसरीचा व डा. रुचि गुप्ता मौजूद हैं।

यामीन के समक्ष मरने से पहले पंकज ने मुख्य संसदीस सचिव व विधायक गुर्जर व अन्य आरोपियों के खिलाफ बयान दिया था और पंकज के बयानों को उक्त दोनों डाक्टरों ने सत्यापित किया था। इसी अधार पर अदालत ने अब गुर्जर को बतौर दोषी समन किया है।

मेरे भाई के साथ अन्याय हुआ है। उसके पिता यशपाल खन्ना मेरे भाई को इंसाफ दिलवाने के लिए संघर्ष करते हुए गुजर गए। मगर अब वह अपने भाई को इंसाफ दिलवाने के लिए लड़ रही है। वह अपने भाई को इंसाफ दिलवाकर रहेगी और मुझे  अब भगवान और न्यायपालिका पर ही भरोसा है।
विज्ञापन

-प्रीति खन्ना, पंकज की बहन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें