अंबाला सिटी। मारकंडा नदी में जल प्रदूषण के मामले में दो बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। इस मामले में हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के बाद आठ नवंबर को एनजीटी कोर्ट की प्रिंसिपल बेंच ने सुनवाई की थी।
इस मामले में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने आदेश में मारकंडा नदी से जुड़े पूरे प्रकरण पर निगरानी के लिए न्यायालय मित्र की तैनाती की है। इस मामले में हिमाचल प्रदेश के काला आम्ब स्थित कुछ उद्योगों को भी केस से जोड़ा गया था। इन्हें कोर्ट ने रेस्पांस देने के लिए समय दिया है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इसके दूसरी तरफ हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में जनस्वास्थ्य विभाग, एचएसआईआईडीसी और शुगर मिल पर नियमों के पालन में कमी मिलने पर कुल नाै करोड़ 81 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, उसे भी मुख्यालय ने स्वीकृत कर दिया है। इसमें नारायणगढ़ शुगर मिल पहले ही अपने हिस्से का छह लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भर चुका है। अब जनस्वास्थ्य विभाग, एचएसआईआईडीसी को कुल नाै करोड़ 75 लाख रुपये जुर्माना भरना होगा।
विभागों को भरना होगा जुर्माना
9.75 करोड़ रुपये का जो जुर्माना भरना है उसमें जन स्वास्थ्य विभाग के 14 एसटीपी हैं। पीसीबी के अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान इन एसटीपी को लेकर कमियां पाई गईं थी। इसको लेकर 9.63 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसमें दो एसटीपी पंचकूला के, 11 एसटीपी अंबाला के, 1 एसटीपी कुरुक्षेत्र में स्थित है। इसी प्रकार 12 लाख रुपये का जुर्माना एचएसआईआईडीसी से संंबंधित तीन सीईटीपी पर लगाया है। इसमें दो सीईटीपी अंबाला के तो एक पंचकूला का है। इसी प्रकार नारायणगढ़ शुगर मिल में ईटीपी को लेकर 6.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
ये है मारकंडा नदी से जुड़ा मामला
वर्ष 2022 में नारायणगढ़ के शिकायतकर्ता धर्मवीर ने वाद दायर किया था कि धार्मिक महत्व रखने वाली मारकंडा नदी में हिमाचल प्रदेश के त्रिलोकपुर स्थित उद्योगों का गंदा पानी नालों के माध्यम से डाला जा रहा है। जिससे यह पवित्र नदी प्रदूषित हो रही है। इसके साथ ही कालाआम्ब में इससे बीमारियां फैलने का खतरा है। यह मामला हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से जुड़ा था। इसलिए इसमें एनजीटी ने जांच के लिए संयुक्त समिति का गठन किया था। समिति ने जल प्रदूषण को लेकर कई कमियां पाईं और सुधार के तरीकों को भी बताया। जांच में 37 ड्रेन इस नदी में गिरती पाईं गईं। मुख्यत: पंचकूला, अंबाला और कुरुक्षेत्र जिलों की यह ड्रेनें थी।