अंबाला सिटी। जिला नागरिक अस्पताल में घूसखोरी कांड में सोमवार को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने पीएमओ ऑफिस के अकाउंटेंट हरदीप राणा को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में सुपरवाइजर संजीव कुमार के बाद यह दूसरी गिरफ्तारी है। उधर ऑपरेशन थियेटर सहायक लगाने के लिए 30 हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए सुपरवाइजर के खिलाफ दो दर्जन कर्मचारियों ने भी अपने बयान कलमबंद करवाए। इन कर्मचारियों का आरोप है कि मंत्री के नाम पर इनसे भी 60-60 हजार रुपये की डिमांड की गई थी। न देने पर इन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। ऐसे में विजिलेंस अब मुख्य आरोपी संजीव व हरदीप के बाद पानीपत के ठेकेदार पुनीत अत्री व फील्ड ऑफिसर राजकुमार की भी मामले में तलाश कर रही है।
ऐसे हुई दूसरी गिरफ्तारी
रिश्वतकांड के तार पीएमओ ऑफिस से जुड़े होंगे इसकी किसी को भनक तक नहीं थी लेकिन सोमवार को स्टेट विजिलेंस ब्यूरो ने रेड कर हरदीप को भी काबू कर लिया। तब हरदीप ड्यूटी पर था। जांच टीम की मानें तो मुख्य आरोपी संजीव के खुलासे के बाद ही हरदीप को पकड़ा गया है। जांच टीम के पास पूरे मामले में हरदीप की संलिप्तता के पुख्ता सबूत थे। इसी आधार पर उसे काबू किया गया।
आरोप-मंत्री के नाम पर मांगे थे 60-60 हजार रुपये
नौकरी से निकाले गए दो दर्जन आउटसोर्सिंग कर्मियों ने भी मुख्य आरोपी संजीव कुमार पर मंत्री के नाम पर 60-60 रुपये की डिमांड करने का आरोप लगाया है। इस सिलसिले में इन कर्मचारियों ने विजिलेंस को अपने बयान भी दर्ज करवाएं हैं। इनमें सफाई कर्मी, सिक्योरिटी गार्ड व वार्ड सर्वेंट तक शामिल हैं। इन सभी कर्मियों ने अस्पताल में चल रहे गोरखधंधे का पर्दाफाश किया। साफ कहा कि कांट्रेक्ट रिन्यू करने के लिए मंत्री के नाम पर 60-60 हजार रुपये मांगे गए थे। न देने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया ।
ठेकेदार के कर्मी डॉक्टरों व स्टाफ पर बनाते थे दबाव
-बताया जाता है कि आरोपी सुपरवाइजर व सहयोगी कर्मी डॉक्टरों व पक्के स्टाफ पर दबाव बनाते थे। करीब 200 के लगभग आउटसोर्सिंग कर्मियों की मनमर्जी से ड्यूटी लगवाते थे। रोस्टर बनाने वालों से अभद्रता करते थे। यहां तक कि एक बार तो रौब जमाने के लिए सुपरवाइजर ने डॉक्टर के कमरे में आए चूहे को उन्हीं के सामने पैरों से कुचलकर मार डाला था। चर्चा है कि मर्जी से ड्यूटी लगवाने के लिए कर्मियों से एक हजार रुपये प्रतिमाह सुविधा शुल्क लिया जाता था। इस मामले में आरोपी एफओ राजकुमार ने अपने व नजदीकी गांवों के लोग भर्ती किए थे। इसी तरह मामले में शामिल अलाउद्दीन माजरा का आरबोपी फील्ड ऑफिसर राजकुमार ने अपने व नजदीकी गांवों के जानकारों को ही भर्ती में तवज्जो देता था।
नौकरी से निकाले गए जंडली के अवतार सिंह, पुलिस लाइन के दिलबाग सिंह, गोहाना के रवि कुमार, सेगता गांव के मुकेश कुमार, बंबे बकनौर के सतनाम सिंह, दुनिया माजरा के पवन कुमार, खेड़ा गांव के संदीप कुमार, सेगता का राकेश शर्मा, कैंट का भूपिंद्र सिंह, भुड़ंगपुर का सागर, झांसा का अनिल कुमार, बड़ी घेल का रवि कुमार व सिटी के रवि ने भी विजिलेंस को आरोपियों के खिलाफ बयान दर्ज करवाए। कांट्रेक्ट के दौरान ये कर्मचारी वार्ड सर्वेंट, सिक्योरिटी गार्ड, हेल्पर इलेक्ट्रिीशियन के पदों पर तैनात थे।
रिश्वतकांड का खुलासा करने वाले स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के एसपी सुरेश कौशिक ने बताया कि पिछले ठेके से निकाले गए करीब दो दर्जन कर्मियों ने अपने बयान दर्ज कराए हैं कि उनसे भी मंत्री के नाम पर सुविधा शुल्क मांगा गया था। गरीबी का हवाला देकर जब इन कर्मचारियों ने पैसे देने मेें असमर्थता जताई तो इनका कांट्रेक्ट रिन्यू नहीं किया गया। इसी वजह से बाद में इन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। पता चला है कि ये लोग डॉक्टरों व स्टाफ की भी नहीं मानते थे। अपनी चलाते थे। उन्होंने बताया कि मामले में दूसरा आरोपी हरदीप को गिरफ्तार किया गया है। जबकि अन्य की तलाश जारी है। क्लीयर किया कि गोरखधंधे की जड़ तक जाएंगे, किसी आरोपी को नहीं छोड़ा जाएगा। हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है।