घर में 10 वर्षीय बेटा है। जिसे घर में अकेला छोड़ कर डाक्टर माता-पिता कोरोना से लड़ रहे हैं। पर दोनों खुश हैं। क्योंकि कुछ ही दिनों में 10 वर्षीय बेटा जिम्मेदार बन गया है। खुद खाना गर्म कर लेता है, खा लेता है, ऑनलाइन पढ़ाई भी खुद ही करने लगा है। जब मम्मी घर आती हैं तो क्या पढ़ाई की है, यह भी खुद ही बताता है। सेवा ही परमोधर्म की कहावत को चरितार्थ कर रहे डॉक्टर दंपति पुनीत शर्मा और गीतांजली की इन दिनों यही कहानी है। दंपत्ति की कोरोना वायरस को लेकर स्पेशल ड्यूटी लगाई गई है। डाक्टर पुनीत शर्मा कैंट एपिक सेंटर में तैनात हैं तो उनकी अर्धांगिनी डॉक्टर गीतांजलि शर्मा को संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने की जिम्मेवारी दी गई है। वह बताते हैं कि विषम परिस्थितियों में भी अपने 10 वर्षीय बेटे रिधान शर्मा को घर पर अकेला छोड़ सुबह निकल जाते हैं। बेटा लॉक डाउन की अनुपालना करते हुए पूरा दिन घर पर ही रहता है। अब बच्चा है, इसलिए सुबह खाना बनाकर रख आते हैं ताकि भूख लगने पर खुद गर्म खा सके। अब तो चाय कॉफी भी बनानी सीख गया है। पर चिंता तो होती ही बच्चा घर पर अकेला है। डाक्टर दंपति ने बताया कि यदि इस घड़ी में भी पीछे हट गए तो डाक्टर होने का क्या फायदा हुआ।
मुझे गर्व है मम्मी पापा पर जो देश के लिए कर रहे बेस्ट काम: अमर उजाला की टीम ने जब डॉक्टर दंपत्ति के 10 वर्षीय बेटे रिधान शर्मा से फोन पर बात की तो रिधान ने बताया कि वह घर पर सारा काम कर लेता है। पता है मम्मी-पापा थक कर घर पहुंचते हैं, इस लिए अब उन्हें तंग भी नहीं करता। मुझे गर्व है कि मेरे मम्मी-पापा इतना बड़ा काम कर रहे हैं और दोनों देश के लिए बेस्ट काम कर रहे हैं।
फालतू घूम रहे लोग लें सीख: लॉक डाउन के चलते सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग अपने परिवार के साथ रहकर बोरियत महसूस करने लगे हैं। ऐसे लोगों को इस डॉक्टर दंपत्ति व इनके नौनिहाल से सबक लेना चाहिए कि जब देश पर विपदा की घड़ी आई है तो कैसे हम सबकी जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। इसलिए घर में रहें और सहयोग करें।