- जिला नागरिक अस्पताल में दवा काउंटर, पंजीकरण केंद्र और प्रतीक्षा स्थलों पर रखे गए थे कूलर, अब स्टोर और वार्डों में पहुंचाए
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भीषण गर्मी के बीच जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों को राहत देने के लिए लगाए गए कूलर यूं ही रखे गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने 27 मई को मरीजों और तीमारदारों की सुविधा के लिए पंजीकरण केंद्र, दवा वितरण काउंटर और खुले प्रतीक्षा स्थलों पर कूलर रखवाए थे लेकिन वे एक दिन भी चालू नहीं हो सके। दो दिन तक कूलर वहीं पड़े रहे और इसके बाद उन्हें वहां से हटा दिया गया।
अस्पताल में प्रतिदिन 1500 से 2000 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गर्मी के कारण ओपीडी, दवा काउंटर और जांच केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कूलर लगाए जाने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन व्यवस्था धरातल पर नहीं उतर सकी।
मरीजों का कहना है कि कूलर रखे जाने के बाद भी उन्हें कभी चालू हालत में नहीं देखा गया। बाद में कूलर वहां से हटा दिए गए, जिससे लोगों में निराशा है। दूसरी ओर अस्पताल परिसर के कुछ हिस्सों में लगे पंखे भी बंद पड़े हैं। सीटी स्कैन विभाग के बाहर मरीजों के बैठने के लिए बनाई गई शेड में लगे पंखे नहीं चल रहे जबकि कुछ वार्डों के बाहर भी ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।
कई जगह पंखे भी बंद
स्थिति केवल कूलरों तक सीमित नहीं है। अस्पताल परिसर के कई हिस्सों में लगे पंखे भी बंद पड़े हैं। सीटी स्कैन विभाग के बाहर मरीजों के बैठने के लिए बनाई गई शेड में लगे पंखे लंबे समय से नहीं चल रहे। इसी तरह कुछ वार्डों के बाहर भी पंखे बंद होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। विडंबना यह है कि एक ओर स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को गर्मी से बचने, ठंडी जगहों पर रहने और लू से सावधान रहने की सलाह दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल परिसर में ही मरीजों को पर्याप्त ठंडक उपलब्ध नहीं हो पा रही।
अब वार्डों में पहुंचाए गए कूलर
जिला नागरिक अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि कुछ कूलरों को मरीजों की आवश्यकता को देखते हुए वार्डों में शिफ्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन इस व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है और स्टोर प्रभारी के माध्यम से एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि जरूरत वाले स्थानों पर कूलरों का संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
मरीजों की पीड़ा
जब कूलर रखे थे तो लगा था कि गर्मी से राहत मिलेगी। लेकिन हमने उन्हें चलते कभी नहीं देखा। दो दिन बाद वे गायब हो गए। - सीता, मरीज।
गर्मी बहुत है। यहां घंटों इंतजार करना पड़ता है। कूलर और पंखे चलें तो मरीजों को राहत मिले। - अमृतलाल, मरीज।
मरीजों के लिए कूलर लगाए, एक दिन भी नहीं चलाए- फोटो : मरीजों के लिए कूलर लगाए, एक दिन भी नहीं चलाए