माई सिटी रिपोर्टर,
अंबाला सिटी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने बिजली चोरी के एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी (धारा 135) से जुड़े मामलों में सिविल कोर्ट का हस्तक्षेप करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। गांव रामगढ़ माजरा निवासी गुरचरण सिंह ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) के खिलाफ एक सिविल सूट दायर किया था।
उपभोक्ता का कहना था कि उन्होंने जून 2018 में लोड बढ़ाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में विभाग ने उनके मीटर को संदिग्ध बताकर 16 जुलाई 2018 को उतार लिया। इसके बाद विभाग ने उन पर 56,010 रुपये का जुर्माना और बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए नोटिस जारी कर दिया। इस मामले में निचली अदालत यानि सिविल जज सीनियर डिवीजन ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिजली विभाग के जुर्माने और नोटिस को अवैध करार दिया था। इस फैसले के खिलाफ बिजली निगम ने जिला अदालत में अपील दायर की थी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले (महेश कुमार बनाम एसडीओ) का हवाला देते हुए कहा कि बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 145 के तहत, बिजली चोरी या धारा 126 और 135 के तहत की गई कार्रवाई में सिविल कोर्ट का क्षेत्राधिकार पूरी तरह वर्जित है। लैब रिपोर्ट में मीटर की सील टूटी हुई पाई गई थी और मीटर डेड स्टॉप की स्थिति में था, जो गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। अदालत ने बिजली निगम की अपील को स्वीकार करते हुए उपभोक्ता के सिविल सूट को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि जब मामला बिजली चोरी से जुड़ा हो, तो उसे विशेष न्यायाधिकरण या संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत ही सुलझाया जाना चाहिए, न कि दीवानी अदालत में फैसला हो सकता है।