ब्लाक शहजादपुर का छोटा सा गांव मघ्घरपुरा आज बड़ी आफत झेल रहा है। आफत हैं डेंगू बुखार की। इस गांव में खतरनाक डेंगू फैल गया है। जिसे लेकर गांव वाले तो बहुत ज्यादा दहशत में हैं और स्वास्थ्य महकमा के अफसर खासी टेंशन में। इसी को लेकर सेहत महकमे ने यहां गांव में ही एक मेडिकल डाक्टर की टीम को ही तैनात कर रखा है, जो गांव में डेंगू बुखार पर नजर रखे हुई हैं।
दूसरा, स्वास्थ्य महकमे ने अपने एंटी लारवा स्प्रे टीम को भी इसी गांव में ही तैनात कर दिया, जबकि एएनएम की टीम पंफलेट बांट-बांटकर लोगों को जागरूक कर रही है। रोजाना यहां लोगों की टंकियां चैक की जा रही है और उसका पानी निकालकर देखा जा रहा है। लेकिन जैसे-जैसे गांववासियों की टंकियों के पानी का जैसे ही निरीक्षण किया जा रहा है, वैसे-वैसे सेहत महकमे की टेंशन बढ़ती जा रही है, क्योंकि गांव की हर दूसरी टंकी में महकमे को डेंगू मच्छर का लारवा ही नहीं प्यूपा भी मिल रहा है।
जागरूकता के अभाव से आफत में आया निर्मल गांव
हैरानी की बात यह कि मघ्घपुरा अंबाला में निर्मल गांव का पुरस्कार भी जीत चुका है। मगर किसी ने सोचा न होगा कि साफ-सुधरे इस निर्मल गांव में लोगों में जागरूकता का अभाव इस गांव के लिए बड़ी आफत को न्यौता दे रहा है। नतीजतन आज गांव में डेंगू ने जबरदस्त पांव पसार लिए है। गांव के नौ मरीजों को डेंगू पॉजीटिव आ चुका है और करीबन बाइस लोग अभी भी संदिग्ध बुखार से ग्रस्त है, प्राइवेट चिकित्सीय संस्थानों ने तो इन्हें भी संदिग्ध डेंगू की पुष्टि कर दी है, मगर सरकारी पुष्टि के लिए सेहत महकमे को अभी बुखारग्रस्त मरीजों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। बहरहाल, ग्रामीण इस वक्त डेंगू बुखार से खासी दहशत में हैं और हल्का बुखार होते ही डाक्टरों के पास दौड़ रहे हैं।
गांव में इस वजह से फैला डेंगू
गांव में डेंगू बुखार का फैलना गांववासियों के लिए एक विडंबना से कम नहीं है, क्योंकि गांव वाले तो अपनी एक टेंशन दूर करने की कोशिश कर रहे थे, मगर उन्हे नहीं पता था कि उनकी एक टेंशन को दूर करने की कोशिश, दूसरी बड़ी टेंशन को जन्म दे देगी। गांव के सरपंच अमरजीत सिंह ने बताया कि दरअसल, गांव में एक ही ट्यूबवैल है, वो भी अमूमन खराब ही रहता है। कभी ट्यूबवैल ठीक रहे तो कई-कई दिनों तक बिजली गायब रहती है। इसी वजह से कई बार गांव में ये स्थिति आ जाती है कि लोगों को पांच से सात दिनों तक पानी ही नसीब नहीं होता।
हालात तो उस वक्त ज्यादा खराब हो गए थे, जब विगत वर्ष ये ट्यूबवेल ही फेल हो गया था और गांववालों को 13 माह तक पेयजल किल्लत झेलनी पड़ी और दूसरे गांवों से पानी लाकर व हैंडपंप के पानी से गुजारा करना पड़ा। इसी परेशानी की वजह से अब पिछले कई दिनों से गांववाल बड़े-बड़े लोहे व प्लास्टिक के टबों, ड्रमों, सीमेंट की हौदियों व टंकियों में पानी का संग्रह करते हैं। लोगों को टेंशन रहती है कि यदि कई-कई दिन पेयजल किल्लत हुई तो इसी संग्रह किए गए साफ पानी से घरेलू काम भी चल जाएगा और उस पानी को पी भी लिया जाएगा।
लेकिन गांववालों की यही प्रवृत्ति उनके लिए आफत बन गई। गांव में जिन टबों, ड्रमों, सीमेंट की हौदियों व टंकियों में साफ पानी एकत्रित कर रहे थे, उनके निचले हिस्से में डेंगू मच्छर के लारवा पैदा हो गया। ये लारवा प्यूपा बना और फिर व्यस्क मच्छर बनकर इस मच्छर ने गांव में डेंगू बुखार फैला दिया। सेहत महकमे के चीफ मेडिकल अफसर डाक्टर विनोद गुप्ता ने भी जब गांवों का सर्वे किया तो डेंगू की यही वजह जानकर वे भी हैरान रह गए और उन्होंने रविवार को तुरंत पंफलेट छपवाकर न केवल लोगों से तुरंत अपनी टंकियां, हौदियों, टबों व ड्रमों के पानी को खत्म करने का आह्वान किया, बल्कि एक अस्थायी कैंप यहां गांव के रघुनाथ मंदिर में ही स्थापित कर दिया।
इस कैंप में मेडिकल अफसर डाक्टर मुकेश कुमार, एएनएम नीलम बाला, कांता व रितु पूरा दिन गांव में ही तैनात रहेंगी, जबकि मलेरिया विभाग के कर्मचारियों महेंद्रपाल, अजीत सिंह, राजेंद्र कुमार, रामसरण, राजकुमार व सुरजीत सिंह की टीम की ड्यूटी गांव के घर-घर जाकर एंटी लारवा का स्प्रे करने में लगाई गई है।
डेंगू फैलने का जिम्मेदार कौन?
गांव में पेयजल किल्लत की टेंशन ने गांव में डेंगू बुखार फैला दिया। ये कहानी सिर्फ मघ्घरपुरा की नहीं है, जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां लोग पेयजल किल्लत की वजह से साफ पानी का इसी तरह संग्रह करते हैं और डेंगू जैसे बुखार को न्यौता देते हैं। गांव मघ्घरपुरा के सरपंच की माने तो वे पिछले दस साल से गांव के सरपंच हैं और उनका गांव निर्मल गांव पुरस्कार विजेता है।
लेकिन वे पिछले कई सालों से गांव में दूसरा ट्यूबवैल लगवाने की मांग कर रहे हैं। इस बारे में ग्राम पंचायत प्रस्ताव पास कर संबंधित विभाग को भी भेज चुकी है, लेकिन आज तक इस मांग की ओर प्रशासन ने ध्यान ही नहीं दिया। उनके अनुसार यदि लोगों को ये आभास हो जाए कि गांव में पानी किल्लत नहीं होगी, तो वे न तो पानी का संग्रह नहीं करेंगे और न ही ऐसी नौबत आएगी। लेकिन अब मघरपुरा में डेंगू फैलने का जिम्मेदार कौन है? इस प्रश्न पर न तो स्वास्थ्य महकमे के अफसर कुछ बोल रहे हैं और न ही जल महकमे के अफसर कुछ कहना चाहते हैं।
गांव डेहर में भी ग्रामीणों कां संदिग्ध बुखार ने घेरा
इसी उपमंडल के गांव डैहर को भी संदिग्ध बुखार ने घेर लिया है। गांव डैहर की विद्यावती ने बताया कि उसका पुत्र जितेन्द्र सहित पत्नी व बच्चें को 20 दिन पहले बुखार हुआ था, लेकिन तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे नारायणगढ़ निजि अस्पताल में दिखाया था जिस पर उसके टेस्ट में प्लैटलेटस कम होने पर उसे जगाधरी अस्पताल में दाखिल करवाया। वहीं गांव की रीटा देवी ने बताया कि उसका पति विनोद जिसे बुखार हुआ था।
इलाज के लिए उसे भी एक निजी अस्पताल में ले जाया गया जहां पर उसके प्लैटलेटस कम होना पाया गया अब उसका ईलाज यमुनानगर के अस्पताल में चल रहा है। डैहर की ही सुनीता पत्नी पवन जो कई दिनों से बुखार से ग्रस्त थी। तबीयत अधिक खराब होने पर उसे परिजन सिविल अस्पताल नारायणगढ़ ले आए जहा पर डाक्टरों ने बताया कि उसके टेस्ट करने पर प्लैटलेटस कम पाए गए थे और उसे तुरंत सेक्टर 32 चंडीगढ़ रैफर कर दिया।
गांव के मेघराज 22 दिन पहले उसकी पत्नी बबली को बुखार चढ़ा था, जिसपर उन्होंने अम्बली में निजी क्लीनिक से बुखार की दवाई ली थी लेकिन मेघराज की तबीयत खराब होने पर उसे नारायणगढ़ के निजी अस्पताल में ले आए जहा उसके प्लैटलेटस 28 हजार रहने पर उसे तुरन्त पीजीआई चंडीगढ़ रैफर कर दिया है। गांव डैहर के पूर्व सरपंच राम नारायण व पूर्व पंच अनिल कौशिक के अनुसार हमारे गांव में तीन दर्जन के करीब बच्चों, महिलाओं एवं पुरुष संदिग्ध बुखार से ग्रस्त हैं। लेकिन गांव में स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन द्वारा अभी तक गांव की सुध नहीं ली है।
गांव मघ्घरपुरा को लेकर महकमे को पूरी तरह टेंशन बनी हुई है। डॉक्टर व एएनएम की टीम वहीं गांव में ही तैनात कर दी गई है। जबकि स्प्रे टीम को भी गांव में ही तैनात रखा गया है। गांव में संग्रह किए गए पानी में ही डेंगू मच्छर का लारवा मिला, यही सबसे बड़ी हैरानी की बात दिखी। इसलिए लोगों की टंकियां खाली कराकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही मघ्घरपुरा गांव में डेंगू बुखार की स्थिति पर कंट्रोल कर लिया जाएगा। लोग अपने घरों के आसपास पानी इकट्ठा न होने दें, यदि पानी है तो उसमें डीजल या कच्चा तेल जरूर डालें।
-डॉक्टर विनोद गुप्ता, चीफ मेडिकल अफसर, अंबाला
अब लक्ष्मीनगर में मिला डेंगू का मरीज
रविवार को डेंगू का एक और मरीज सिटी के जंडली इलाके में स्थित लक्ष्मीनगर कालोनी में मिला। यहां युवक तरुण को कई दिनों से बुखार था, वे पहले प्राइवेट क्लीनिक में इलाज करा रहा था, लेकिन बुखार नहीं दूर हुआ तो उसे सिटी के अस्पताल रेफर किया गया, वहां अब टेस्ट के बाद तरुण को डेंगू की पुष्टि हो गई है।