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Ambala News: शंभू बॉर्डर पर पुलिस-किसानों में टकराव

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अंबाला। हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर दिल्ली कूच के दौरान पुलिस और किसानों के बीच टकराव हो गया। करीब साढ़े तीन घंटे तक चले इस हंगामे और संघर्ष के बीच छह किसान घायल हुए। किसानों को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के कई गोले दागने पड़े। आखिर में किसान नेता पंधेर किसानों को शांत करवा वापस ले गए। उनका कहना है कि किसान विचार-विर्मश के बाद आगामी रणनीति तैयार करेंगे।
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पंजाब की ओर से दोपहर को 101 आंदोलनकारी किसानों का जत्था दिल्ली कूच के लिए रवाना हुआ। इस दौरान किसानों ने पुलिस की तीन स्तर की सुरक्षा बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और पुल से नीचे घग्गर नदी में फेंक दिया। इसके बाद किसान मुख्य बैरिकेडिंग तक पहुंच गए जहां पर पुलिस ने जालियां लगाई हुईं थीं। पुलिस की चेतावनी के बावजूद किसान नहीं माने और जालियों को उखाड़ने की कोशिश करने।
इस दौरान पुलिस को बार-बार विशेष प्रकार के स्प्रे का प्रयोग करना पड़ा। किसान जब कड़ियों की मदद से जाली को उखाड़ने लगे तो पुलिस ने आंसू गैस के गोलों का प्रयोग शुरू कर दिया। करीब साढ़े तीन घंटे तक किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष चला। इसमें करीब छह किसान घायल हो गए। उन्हें राजपुरा स्थित अस्पताल में पहुंचाया गया। ऐसे हालात को देखते हुए किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने पहले तो मंच से किसानों को वापस आने के लिए कहा, बाद में खुद ही किसानों को वापस लेकर आए और आज के संघर्ष को विराम दे दिया।
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सुबह 11 बजे अरदास के साथ दिल्ली कूच की तैयारी शुरू हो गई थी। उसके बाद एक-एक कर उन किसानों के मंच से नाम बोले गए जिनका चयन 101 जत्थेबंदियों में दिल्ली कूच के लिए हुआ था। सभी कतार में खड़े हुए और ठीक एक बजे जयकारा लगाते हुए बॉर्डर की तरफ रवाना हो गए।




पहले पंजाब पुलिस की बैरिकेडिंग उखाड़ी

101 जत्थेबंदियों को इस प्रकार चयनित किया गया था कि उसमें 35 वर्ष से 75 वर्ष तक के लोग शामिल थे। इसमें दिव्यांग भी थे। आगे बढ़ते हुए युवा आंदोलनकारी किसानों ने पहले पंजाब पुलिस की बैरिकेडिंग को हटा दिया। इसके बाद इनमें से कुछ बैरिकेडिंग को घग्गर नदी में फेंक दिया। इसके बाद आगे कंटीली तारों और कीलों की मजबूत बैरिकेडिंग को भी तोड़ दिया और सीधे किसान सीमेंट की बैरिकेडिंग तक पहुंच गए। यहां हरियाणा पुलिस माइक पर चेतावनी दे ही रही थी कि तभी एक किसान बैरिकेडिंग के ऊपर बनी टीन की छत पर चढ़ गया। जिसे पुलिस ने ऊपर जाकर पीछे धकेला। जब किसान जाली हटाने का प्रयास करने लगे तो आंसू गैस के गोले छोड़ दिए गए। इस दौरान किसानों की भीड़ तितर-बितर होने लगी। कुछ देर बाद किसान फिर आगे बढ़ने लगे और पुलिस के साथ काफी देर तक बहस करते दिखे। पुलिस भी उन्हें चेतावनी देती रही कि उनके पास हरियाणा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं हैं। लिहाजा पहले वे अनुमति लेकर आएं। काफी देर तक समझाने के बावजूद जब किसान नहीं माने तो पुलिस ने एक के बाद एक फिर आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। अबकी बार कई किसान घायल हो गए।


पुलिस ने लाउड स्पीकर पर चलाया जाप

इस बार आंदोलनकारी किसानों को शांत करने के लिए पुलिस उतनी आक्रामक नहीं थी, जितनी 13 फरवरी के आंदोलन में दिखी थी। इस बार लाउडस्पीकर पर पुलिस ने श्री सतनाम वाहे गुरु का जाप की ऑडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। हालांकि इस दौरान कई किसान पीछे तो हटे मगर उनका आरोप था कि धार्मिक जाप के दौरान भी उन पर आंसू गैस के गोले दागे जाते रहे। हालांकि ड्रोन से हरियाणा और पंजाब दोनों तरफ पुलिस प्रशासन द्वारा मौके की वीडियोग्राफी की गई।


गुरु महाराज की पालकी साहिब पर सेवा करते ग्रंथी सिंह व अन्य सेवादार। संवाद

गुरु महाराज की पालकी साहिब पर सेवा करते ग्रंथी सिंह व अन्य सेवादार। संवाद

गुरु महाराज की पालकी साहिब पर सेवा करते ग्रंथी सिंह व अन्य सेवादार। संवाद

गुरु महाराज की पालकी साहिब पर सेवा करते ग्रंथी सिंह व अन्य सेवादार। संवाद

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