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अब आम नहीं रहेगा मॉल रोड, कांग्रेस के पंजे के दम पर सेना की जीत

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अंबाला छावनी के माल रोड का दृश्य - फोटो : AMBALA
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सेना और सिविलियन के बीच माल रोड को लेकर करीब 29 साल से चल रहा विवाद मंगलवार को खत्म हो गया। कांग्रेस के पंजे के दम पर सेना की इस मुद्दे पर जीत हुई और भाजपा के पार्षदों का सदन में बहुमत होने के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जिससे अब माल रोड आम नहीं रहेगा और इसे सिविलियन के लिए बंद कर दिया जाएगा। मॉल रोड बंद करने को लेकर करीब 40 मिनट तक कैंटनोमेंट बोर्ड हाउस की बैठक में तर्क-वितर्क चला जो कि किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। जिसके बाद बोर्ड के सीईओ अनुज गोयल ने वोट डलवाने के आदेश दिए। करीब 10 मिनट चली वोटिंग के बाद 8 वोट सेना के पक्ष में पड़े जबकि सिविलियन के पक्ष में 6 पार्षदों ने वोट पड़े। हाउस में मौजूद एक सदस्य ने वोटिंग ही नहीं की।
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सैर के लिए और एंबुलेंस व फायर बिग्रेड को मिलेगी छूट
बिग्रेडियर एसएस सिद्धु ने सदन में यह स्पष्ट कर दिया कि सुबह और शाम की सैर करने वाले सिविलियन के लिए माल रोड पर कोई दिक्कतें नहीं आएंगी। वहीं एंबुलेंस और फायर बिग्रेड के अलावा जिन लोगों के वहां पर बंगले या आवास है उन्हें सेना स्टीकर या पास जारी कर देगी ताकि किसी को दिक्कतें न आएं। लेकिन आम नागरिक और वाहनों की आवाजाही इस रोड पर हमेशा के लिए बंद हो जाएगी।
इस तरह दो कांग्रेसी पड़े छह भाजपाइयों पर भारी:-
दरअसल सदन में 8 पार्षद हैं। इनमें अजय बवेजा, आसीमा, नीलम रानी, सन्नी, वीरेंद्र गांधी, सुरेंद्र तिवारी, राजू बाली और लक्ष्मी देवी शामिल हैं। इनमें वीरेंद्र गांधी और सुरेंद्र तिवारी दोनों कांग्रेसी पार्षद हैं। वहीं सदन में सेना की और डिप्टी जीओसी बिग्रेडियर एसएस सिद्धु, कर्नल विजय माथुर, कर्नल आरएस दलाल, कर्नल विभोर पंथ, कर्नल आरडी देसाईं और कर्नल दीपांकर गोगई के अलावा कैंटोमेंट बोर्ड के सीईओ अनुज गोयल शामिल हैं। इस तरह कुल 15 सदस्यों का सदन हैं। इस तरह छह पार्षद भाजपा के होने के कारण उन्हीं का बहुमत है। लेकिन सेना के साथ दो कांग्रेसी मिलने से उनका पलड़ा भारी हो गया और 8 वोट सेना को मिलने से सेना की जीत हो गई।
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एक वोट किसने नहीं किया को लेकर विवाद:
भाजपा के सभी पार्षदों ने दावा किया कि उन्होंने सिविलियन के पक्ष में वोटिंग की। यदि छह के छह पार्षदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया तो इसका मतलब आर्मी की ओर से एक वोट नहीं पड़ा लेकिन आर्मी तो लंबे समय से इस रोड को बंद करना चाहती थी। ऐसे में एक वोट का प्रयोग किसने नहीं किया यह एक सवाल है। वहीं कांग्रेसी पार्षदों ने भाजपाइयों को घेरते हुए कहा कि उनके ही एक पार्षद ने उनके पक्ष में वोट नहीं डाली।
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