अंबाला। जिले की हवा इस बार पिछले साल की दिवाली की तरह दशहरे पर ही जहरीली हो गई। वर्ष 2019 में रात 8 बजे प्रदूषण का जो स्तर दिवाली वाले दिन था इस बार के दशहरे पर ही वायु प्रदूषण का वह स्तर पहुंच गया। अलबत्ता यदि अब हम जागरूक नहीं हुए तो इस बार दिवाली पर सांसे लेना तक मुश्किल हो जाएगा। जहरीली हो चुकी जिले की हवा के चलते बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में जहां शिशु रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर खांसी-जुकाम व एलर्जी से परेशान बच्चे पहुंच रहे हैं वहीं चर्म रोग विशेषज्ञ के पास भी अब मरीजों की करतार लगनी शुरू हो गई हैं। यह सब जहरीली और दूषित हो चुकी हवा का परिणाम है। लेकिन अब अंबाला के लोगों ने पटाखों के विरुद्ध एक युद्ध छेड़ने के अभियान के आहुति डालने का संकल्प ले लिया है। टीम अमर उजाला ने इस अभियान को लेकर उन लोगों से बातचीत की जिन्हें इस समय एलर्जी की दिक्कतें हो रही हैं तो वह खुलकर इस अभियान में जुड़ने के लिए तैयार हो गए। संकल्प लिया कि वह न केवल अपने आप पटाखों का बहिष्कार करेंगे बल्कि अपने परिचितों को भी ऐसा नहीं करने की प्रेरणा देंगे।
2020 में अक्टूबर माह में वायु प्रदूषण
23 को 279
24 को 296
25 को 320
26 को 294
27 को 251
बता दें कि इस साल 25 अक्टूबर को दहशरा था और वायु प्रदूषण 320 जबकि गत वर्ष दिवाली जोकि 27 अक्टूबर को थी उस दिन जिले में वायु प्रदूषण का स्तर 333 था।
2019 में अक्टूबर में वायु प्रदूषण का स्तर
23 को 228
24 को 256
25 को 236
26 को 310
27 को 333
आंकड़ों पर नजर डालें तो 26 और 27 यानि छोटी दिवाली और बड़ी दिवाली को छोड़ दें तो वर्ष 2019 के अक्टूबर के आखिरी सप्ताह के दिन इस साल के दिनों से कम प्रदूषण हुआ और इस साल के दहशहरे पर पिछली साल की दिवाली जितना ही प्रदूषण हो गया जबकि इस साल छावनी सहित कई स्थानों पर रावण का दहन भी नहीं हुआ।