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ट्रक में 800 किमी रवानगी को बैठाई छह दिन की जच्चा-बच्ची, खुशी से छलके पिता के आंसू

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पैदल चल रही गर्भवती को प्रसव पीड़ा के बाद छावनी के नागरिक अस्पताल प्रबंधन ने न केवल संभाला बल्कि डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को इतना प्यार दिया कि अस्पताल से डिस्चार्ज होते समय बच्ची के पिता की अश्रुधारा बहने लगी। बिना सरकारी मदद के अस्पताल प्रबंधन ने वह मिसाल कायम कर दी जिसकी किसी ने शायद कल्पना भी नहीं की थी।
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कुछ समाजसेवियों की मदद से जच्चा और बच्चा को न केवल एक ट्रक के जरिये उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई बल्कि जाते समय छह दिन की कन्या को आरएमओ डॉ. मुकेश, समाजसेवी करन अग्रवाल, संदीप वासन, संदीप जिंदल व कुछ अन्य ने 501-501 रुपये का शगुन देकर उसके जीवन की मंगलकामना भी की। साथ ही उन्हें रास्ते के लिये खाने पीने व जरूरत का सामान भी दिया। यही कारण था बच्ची का पिता शिवचंद्र खुद को रोक नहीं पाया और खुशी के आंसू छलक पड़े। माहौल पूरी तरह से भावपूर्ण हो गया। स्टाफ ने तालियां बजाकर उन्हें अस्पताल से रवाना किया।
छह दिन पहले पैदल चल रही महिला को हुई थी प्रसव पीड़ा
दरअसल पटियाला से गर्भवती महिला पूनम अपने पति शिव चंद्र व एक बेटे अर्जुन के साथ उन्नाव जाने के लिए अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पहुंची थी। तभी उसे प्रसव पीड़ा उठी और एंबुलेंस के जरिये छावनी के नागरिक अस्पताल पहुंचाया था। अस्पताल में ही प्रवासी महिला ने नार्मल डिलीवरी से एक बच्ची को जन्म दिया। तभी से यह परिवार उन्नाव जाने के लिए परेशान हो रहा था।
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आरएमओ की पहल को समाजसेवियों ने मंजिल तक पहुंचाया
उन्नाव जाने की गुुहार लगा रहा शिव शंकर जब अस्पताल के आरएमओ डॉ. मुकेश से मिला तो उन्होंने जच्चा-बच्चा को सुरक्षित घर पहुंचाने का जिम्मा उठा लिया। पहले तो वह सरकारी मदद के लिए प्रयास करते रहे, जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो उनके पास समाजसेवी संदीप जिंदल के जरिए ट्रांसपोर्टर संदीप वासन व समाजसेवी करन अस्पताल पहुंचे। करन ने बताया कि संदीप वासन का ट्रक झारखंड सामान लेकर जा रहा था। जब उन्हें बच्ची का पता चला तो वह मदद के लिए आगे आए और घर पर पहुंचाने का जिम्मा उठाया।
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