आपराधिक मामले में संलिप्त किशोर और किशोरियों के पुनर्वास को लेकर सरकार ने ठोस योजना तैयार कर ली है। इसके लिए जल्द ही अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एकीकृत केंद्र बनाए जाएंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस योजना को शुरुआत में अंबाला, गुरुग्राम, सोनीपत और हिसार में इंटीग्रेटिड कांप्लेक्स खोले जाएंगे। यहां सफलता मिली तो पूरे प्रदेश में सरकार इस योजना को सिरे चढ़ा देगी।
अंबाला में इस समय रेलवे चाइल्ड लाइन और दो एनजीओ काम कर रही हैं। इन्हें 18 साल से कम उम्र के बच्चों को रेस्क्यू करना होता है। इसके बाद जिला बाल कल्याण समिति की अनुशंसा पर देखरेख तब तक करनी पड़ती है। यहां पर ऐसा कोई आश्रय स्थल नहीं है। केवल ओपन शेल्टर होम है। जहां केवल लड़कों को तीन दिन के लिए रखा जा सकता है। आसपास के जिलों की बात करें तो केवल अंबाला में ही यह सुविधा है। जिसमें क्षमता 40 के स्थान पर 53 नाबालिग रहते हैं। इतना ही नहीं, ऐसे किशोर जोकि जघन्य अपराधों में संलिप्त हैं, उन्हें रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पैलेस आफ सेफ्टी बनाने के निर्देश दिए हैं। जोकि इस समय करनाल में है। अलबत्ता करनाल का पैलेस आफ सेफ्टी फुल होने के कारण उन्हें अंबाला के ही बाल सुधार गृह में भेज दिया जाता है। इस तरह बाल सुधार गृह में रहने वाले सामान्य बाल अपराधों में संलिप्त नाबालिगों को मजबूरी में इनके साथ रहना पड़ता है। इसके चलते कई वारदात बाल सुधार गृह में हो चुकी हैं। इस एकीकृत केंद्र के बनने से इन सभी दिक्कतों से निजात मिलेगी। इसके लिए अंबाला में सद्दोपुर, सोनीपत के जाजा गांव, हिसार में बीड और गुरुग्राम के कादपुर में जमीन तलाश की गई है। ं हिसार और सोनीपत में जमीन महिला एवं बाल विकास विभाग के नाम पर ट्रांसफर भी कर दी गई है।
कैसा होगा स्वरूप
एक ही छत के नीचे सद्दोपुर में अलग-अलग आवश्यकताओं के अनुसार चार कांप्लेक्स बनाए जाएं। इसमें करीब 4 एकड़ में पार्क की सुविधा होगी। इतना ही नहीं यहां रखे जाने वाले किशोर-किशोरियों के खेलने के लिए भी अलग से व्यवस्था की जाएगी। अत्याधुनिक सुविधा से संपन्न इस कांप्लेक्स में छोटे बच्चों के लिए झूलों की व्यवस्था भी होगी ताकि उनका अच्छे से विकास हो सके।
30 से ज्यादा बेरोजगारों को मिलेगी नौकरी
सद्दोपुर में बनने वाले एकीकृत कांपलेक्स के बनने से इसे चलाने और इसकी देखरेख करने के लिए कर्मचारियों की भी जरूरत होगी। अलबत्ता 30 से ज्यादा युवाओं के लिए यहां रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
चिल्ड्रन इन नीड केयर एंड प्रोटेक्शन की भी यहीं मिलेगी सुविधा
इसी एकीकृत कांपलेक्स में चिल्ड्रन इन नीड केयर एंड प्रोटेक्शन की सुविधा भी मिलेगी। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता का निधन हो चुका है, गुमशुदा बच्चे, गर्भवती किशोरियों इत्यादि जिन्हें विशेष देखरेख की जरूरत है उनके लिए भी इसी कांपलेक्स में व्यवस्था की जाएगी।
अभी कहां भेजे जाते हैं ऐसे बच्चे
1 एक 17 साल तक के ऐसे बच्चे जिन्हें विशेष देखरेख की जरूरत होती है उन्हें अब छछरौली यमुनानगर में, पंचकूला शिशु गृह और बाल सदन में, कैथल, जघन्य अपराधों में संलिप्त को करनाल शिफ्ट किए जाता है। एक साल की बात करें तो रेलवे चाइल्ड लाइन को कुल करीब 270 बच्चे मिले इनमें से 100 को दूसरे जिलों में भेजना पड़ा। इसी तरह चाइल्ड लाइन को 50 बच्चे मिले। इनमें से करीब 15 बच्चों को अंबाला से बाहर भेजा गया क्योंकि अंबाला में रखने की व्यवस्था नहीं थी।
किशोरियों के रखने की नहीं कोई व्यवस्था
लड़कों को तो जैसे-तैसे रातभर रख लिया जाता है लेकिन दिक्कतें तब आती हैं जब किशोरी मिलती है। अंबाला में आज तक किशोरियों को रखने की कहीं भी कोई भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रात को ही उन्हें कर्मचारियों की सुरक्षा में भेजना पड़ता है। वरना विशेष निगरानी में यहीं पर इधर-उधर रात कटवानी पड़ती है। लेकिन एकीकृत कांपलेक्स बनने से यह दिक्कत भी खत्म हो जाएगी।
जघन्य अपराधों में शामिल नाबालिगों, किशोरियों इत्यादि को रखने के लिए हम चार जिलों में इंटीग्रेटिड कांप्लेक्स बनाने जा रहे हैं। अंबाला के सद्दोपुर सहित हमने सोनीपत, हिसार और गुरुग्राम में 8-8 एकड़ जमीन तलाश ली है। जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
कैप्टन मनोज यादव, निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचकूला।