रात के 1 बजे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में 32 वर्षीय रेखा, 25 वर्षीय गुरमेज सिंह, 35 वर्षीय अंग्रेज सिंह और 65 वर्षीय पाला राम जिनके सिर फूटे हुए थे। सिर पर पट्टी बंधी थी, सभी ट्रामा सेंटर में पहुंचे। सभी दर्द से कराह रहे थे। ऊपर से हाड़ कंपाने वाली ठंड। एक ही परिवार के इन चारों सदस्यों को करीब 17-18 युवकों ने गांव मेहलां में घर में घुसकर जमकर पीटा था। यहां इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे इन मरीजों को डाक्टर ने एडमिट करने से इंकार कर दिया। तर्क दिया कि उनके पास इतने बैड नहीं हैं। आधी रात में अब ये चारों कहां जाएं और क्या करें किसी को कुछ नहीं सुझा तो अस्पताल में ही एक जगह बैठकर चारों ने दर्द और सर्दी से कांपते हुए रात बिताई। सुबह हुई तो किसी रिश्तेदार के घर शरण ली। लेकिन सुबह जब फिर से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे तब भी डाक्टरों ने भर्ती करने से इंकार कर दिया।
ये है पूरा मामला
दरअसल गांव मेहलां के रहने वाले अंग्रेज सिंह ने बताया कि शुक्रवार को गांव में उनके घर के पास तेज आवाज पर कुछ लोग डीजे बजाकर नाच रहे थे। यह देखकर उसने उन युवकों को डीजे बंद करने की गुहार लगाई। इस मामले को लेकर काफी बहस हुई। लेकिन इसके बाद वह वहां से चले गए। करीब आधे घंटे बाद दोनों युवक करीब 18-20 युवकों को लेकर उसके घर पहुंचे। रॉड, डंडों से उसकी पिटाई शुरू कर दी। शोर सुनकर छोटा भाई गुरमेज, पिता पाला राम और ससुराल से घर आई हुई बहन रेखा ने जब बीच-बचाव का प्रयास किया तो आरोपियों ने उन्हें भी पीटना शुरू कर दिया। चीखें सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और आरोपियों से उन्हें छुड़ाया। इसके बाद उन्हें चौड़मस्तपुर के सामुदायिक केंद्र में ले जाया गया। जहां उनके सिर में टांके लगाकर शुक्रवार-शनिवार रात करीब 12 बजे उन्हें अंबाला शहर जिला नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया।
डॉक्टर ने बैड नहीं होने की बात कहकर दाखिल करने से किया इंकार
अंग्रेज सिंह व गुरमेज सिंह और उसके पिता पाला राम ने बताया कि वह रात करीब 1 बजे यहां आईं और चौड़मस्तपुर से रेफर किया गया कार्ड डाक्टर को दिखाया तो उन्होंने सभी को यहां एडमिट करने से इंकार कर दिया। तर्क दिया कि उनके पास कोई बैड खाली नहीं है। करीब दो घंटे भरी सर्दी में वह अस्पताल में डाक्टर से इलाज की गुहार लगाते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
आरएमओ के पास पहुंचा विवाद तो शुरू हुआ इलाज
घायल पाला राम, अंग्रेज व गुरमेज तीनों ने जब एएसएमओ डॉ. सीमा को पूरे मामले की जानकारी दी तो उन्होंने ट्रामा सेंटर में मौजूद डाक्टर को इलाज के आदेश दिए। हालांकि इससे पहले उन्हें पीजीआई रेफर किया जा रहा था।
पीजीआई रेफर का खेल जारी, नहीं हो रहे आदेश मान्य
डीजी हेल्थ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विशेष परिस्थतियों में ही मरीजों को पीजीआई रेफर किया जाए ताकि पीजीआई का वर्क लोड कम रहे और सीरियस मरीजों की वहां जान बचाई जा सके। लेकिन अंबाला में यह आदेश मान्य नहीं है। जनवरी से अक्टूबर तक के आंकड़े इसके गवाह हैं। जनवरी से अक्टूबर तक ट्रामा सेंटर में 2605 मरीज यहां आए। इनमें से 1041 को पीजीआई रेफर कर दिया गया।
शुक्रवार को जीरपुर के पास ऑटो पलटा उसमें 5 महिला सवारियां घायल हुईं। मनमोहन नगर अंबाला शहर की रहने वाली इन सभी महिलाओं को जब यहां लाया गया तो डाक्टरों ने पीजीआई रेफर करने की बात कही। परिजनों ने विरोध किया तो डाक्टर ने इलाज किया। जिन्हें पीजीआई रेफर की बात कही जा रही थी। उन्हें आधे घंटे बाद छुट्टी कर घर भेज दिया गया। शनिवार सुबह भी इन लोगों को इलाज से इंकार कर दिया गया, कहा कि आपको पीजीआई रेफर करना पड़ेगा। परिजनों ने फिर एएसएमओ से गुहार लगाई इसके बाद यहीं से इलाज शुरू हुआ।
शुक्रवार-शनिवार रात आए मेहलां गांव के चार लोगों को एडमिट नहीं किया गया। सुबह आरएमओ के कहने के बाद इलाज देकर पीजीआई रेफर की बात कही लेकिन परिजन तैयार नहीं हुए तब जाकर वहीं पर इलाज शुरू हुआ। जैसा कि परिजनों ने बताया।
किस माह ट्रामा सेंटर में कितने मरीज आए, कितने हुए रेफर
माह--------कुल आए----------रेफर
जनवरी --- 181--------80
फरवरी-----177---------77
मार्च ---------206-----85
अप्रैल---------207-----101
मई -----------279------122
जून---------299----------121
जुलाई --------288--------111
अगस्त ---------309------154
सितंबर ---------341-------155
अक्टूबर---------318------175
मुझे इस बारे में सुबह ही जानकारी मिली थी। इसके बाद तीन लोगों जोकि ट्रामा सेंटर में मौजूद थे उनके इलाज के लिए मैंने डाक्टर को कह दिया था।
डाक्टर सीमा, एएसएमओ
इस मामले की जांच की जा रही है। बयान दर्ज करने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
धर्मबीर सिंह, एसआई नग्गल थाना