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आफत बना फोरलेन प्रोजेक्ट: 12 हजार 59 पेड़ काटने की अनुमति का इंतजार बरकरार, 7.3

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फोरलेन प्रोजेक्ट बना आफत: 12 हजार 59 पेड़ काटने की अनुमति का इंतजार, 7.38 करोड़ करवाने होंगे जमा
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नंबर आफ गेम्स...........
11.15 करोड़ का पोल शिफ्टिंग प्रोजेक्ट
7 करोड़ जमा करवाने हैं पेड़ कटाई के
6 माह पोल शिफ्टिंग में लगने तय
6 माह से ज्यादा पेड़ कटाई में बीतेगा समय
65 हजार वाहन को रोजाना झेलनी पड़ रही दिक्कतें, पेड़ कटाई व पोल शिफ्टिंग में देरी के चलते प्रोजेक्ट लटकना तय
जगह-जगह से ब्लॉक हुआ अंबाला-जगधारी नेशनल हाईवे, अवैध कट लील सकते हैं राहगिरों की जान
12 हजार पेड़ के बदले लगाने होंगे 24 हजार, वन विभाग को तलाशनी होगी जगह
उमेश भार्गव
अंबाला। गृहमंत्री अनिल विज के ड्रीम प्रोजेक्ट में अफरशाही की लापरवाही लोगों के लिए आफत बन गई है। एनएचएआई द्वारा अथॉरिटी इंजीनियर नियुक्त किए बिना शुरू किए गए अंबाला-साहा फोरलेन प्रोजेक्ट में अब नई आफत सामने आई है। इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए अंबाला से साहा तक बनने वाले 14.84 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में 12 हजार 59 पेड़ काटे जाने हैं। प्रोजेक्ट शुरू हुए 6 माह हो चुके हैं लेकिन अभी तक एनएचएआई को पेड़ काटने की अनुमति फोरेस्ट विभाग ने नहीं दी है। हालांकि पेड़ काटने की फाइल चल रही है। पेड़ काटने के लिए एनएचएआई को 7.38 करोड़ से अधिक रुपये फोरेस्ट विभाग के खाते में जमा करवाने होंगे। जोकि अभी तक नहीं हुए। इसी तरह करीब 15 किलोमीटर के इस मार्ग पर बिजली निगम ने पोल शिफ्टिंग का कार्य करवाना है। हालांकि बिजली निगम की प्रक्रिया चल रही है लेकिन अभी तक फाइल को अंतिम मंजूरी नहीं मिली। यदि अथॉरिटी इंजीनियर होता तो काम शुरू करने से पहले इन दोनों प्रोजेक्ट की फाइल तैयार हो चुकी होती।
ये है पेड़ काटने की प्रक्रिया, इसलिए होगी देर
पेड़ काटने के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी जरूरी है। इसके बाद वन विभाग उन पेड़ों की कीमत तय करता है। साथ ही इन पेड़ों के काटने से पर्यावरण को कितना नुकसान होगा? कितनी आक्सीजन ये पेड़ लोगों को दे रहे थे। इसका अनुमान लगाकर नेट अमाउंट तैयार किया जाता है। यह अमाउंट तय होने के बाद कंपनी को वन विभाग को तय राशि जमा करवानी पड़ेगी। राशि जमा होने के बाद उसे केंद्र सरकार के खाते में भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से फिर पेड़ काटने की अनुमति मिलेगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि इन पेड़ों को काटने के बाद उससे दोगुने पेड़ कहां पर लगाए जाएं। अभी तक न तो राशि जमा करवाई गई न अनुमति मिली। जगह की तलाश करना तो अभी दूर की बात है। राशि आने के बाद वन विभाग अपने दूसरे विंग को पेड़ काटने का प्रोजेक्ट सौंपेगा।
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500 लेटिस टॉवर लगेंगे, 6 महीने तक लगने तय
अंबाला-साहा नेशनल हाइवे पर पोल शिफ्टिंग के बाद 500 लेटिस टॉवर लगाए जाएंगे। इसके लिए बिजली निगम ने करीब सवा 11 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को तैयार कर उसे अंतिम स्वरूप दे दिया है। हालांकि अभी इसे मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी के बाद भी बिजली निगम को इस प्रक्रिया में करीब 5-6 महीने लग जाएंगे। बता दें कि पहले बिजली निगम ने ओवरहेड प्रोजेक्ट बनाया था लेकिन मंत्री विज चाहते थे कि ओवरहेड की बजाए अंडर ग्राउंड लाइन शिफ्टिंग हो। यह प्रोजेक्ट 38 करोड़ का बना। साथ ही बिजली निगम के अधिकारियों ने विज को बताया कि यदि अंडर ग्राउंड केबल में कहीं दिक्कत आ गई तो फाल्ट को तलाशना बेहद जटिल प्रक्रिया है। उसके कई नुकसान भी बताए गए। उधर एनएचएआई ने भी इतनी बड़ी राशि देने से इंकार कर दिया। लिहाजा तीसरी बार बिजली निगम ने ओवरहेड शिफ्टिंग का प्रोजेक्ट तैयार किया है। यही कारण रही कि बिजली निगम को तीन बार प्रपोजल को तैयार करना पड़ा और देर हो गई।
65 हजार वाहन चालक रोजाना हो रहे प्रभावित
इस प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले सर्वे करवाया गया था। इस सर्वे के अनुसार इस रोड से रोजाना 65 हजार वाहन चालक निकलते हैं। अलबत्ता मनमर्जी के इस प्रोजेक्ट के चलते इन वाहन चालकों को रोजाना दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। जगह-जगह से हाईवे को खोद दिया गया है। लिहाजा वाहन चालक अवैध कटों का प्रयोग कर रहे हैं या फिर आधे-आधे घंटे उन्हें जाम से जूझना पड़ रहा है।
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अभी प्रक्रिया चल रही है। प्रथम चरण की अनुमति मिल गई है। 7.38 करोड़ की एनएचएआई जैसे ही राशि जमा करवाएगा उसके बाद अगले चरण की अनुमति के लिए विभाग को लिख दिया जाएगा। इसके बाद उसे भारत सरकार के खाते में भेजा जाएगा। इतना ही नहीं 12 हजार 59 पेड़ों के बदले इससे दोगुने पेड़ भी लगाए जाएंगे। ये पेड़ मोरनी हिल वालों ने लगाने हैं। यह सब राशि आने और जमीन मिलने के बाद ही संभव होगा।
हैरतजीत कौर, जिला वन विभाग अधिकारी।
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